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Kathua News: मधुमक्खी पालन के प्रति युवाओं का बढ़ा रुझान, बन रहा आय का मजबूत जरिया
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पंकज मिश्रा
कठुआ। खेती से जुड़े पारंपरिक कार्यों के साथ अब मधुमक्खी पालन भी किसानों और युवाओं के लिए आय का मजबूत साधन बन रहा है। जिले में इस क्षेत्र में हो रही प्रगति के आंकड़े यह गवाही दे रहे हैं कि लोग अब स्वरोजगार के नए विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
कभी सीमित स्तर तक सिमटा मधुमक्खी पालन अब जिले में रोजगार और अतिरिक्त आमदनी का बड़ा माध्यम बनता जा रहा है। कृषि विभाग की ओर से लगातार चलाए जा रहे जागरुकता अभियान और तकनीकी मार्गदर्शन का असर यह हुआ है कि हर वर्ष नए किसान इस कार्य से जुड़ रहे हैं। गत वर्ष जिले में इस काम के साथ 183 किसान जुड़े थे जबकि वर्तमान में जिले में 272 से अधिक नियमित मधुमक्खी पालक सक्रिय हैं, जबकि सैकड़ों अन्य किसान भी छोटे स्तर पर इस गतिविधि से जुड़े हुए हैं।
जिले में शहद उत्पादन के आंकड़े भी इस क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं की गवाही दे रहे हैं। वर्ष 2024-25 में जिले में 776 क्विंटल शहद का उत्पादन हुआ था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर करीब 825.58 क्विंटल पहुंच गया है। खास बात यह रही कि पिछले वर्ष जुलाई से सितंबर तक लगातार भारी बारिश के बावजूद उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई। इससे साफ है कि आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के चलते मधुमक्खी पालन अब अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है।
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जानकारों के अनुसार, मधुमक्खी पालन केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है। इससे मोम, पराग, रॉयल जेली और अन्य उत्पाद भी तैयार किए जा सकते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग रहती है। यही वजह है कि महिलाएं भी इस क्षेत्र में रुचि दिखा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार इसे अतिरिक्त आय के साधन के रूप में अपना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मधुमक्खियां कृषि उत्पादन बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में मधुमक्खियों का संरक्षण केवल पर्यावरण ही नहीं बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी जरूरी माना जा रहा है।
कृषि विभाग का कहना है कि आने वाले समय में जिले में और अधिक युवाओं को मधुमक्खी पालन से जोड़ने की योजना है। विभाग की ओर से प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और जागरुकता कार्यक्रमों के माध्यम से इस क्षेत्र को और मजबूत बनाने पर काम किया जा रहा है। (संवाद)
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कठुआ। खेती से जुड़े पारंपरिक कार्यों के साथ अब मधुमक्खी पालन भी किसानों और युवाओं के लिए आय का मजबूत साधन बन रहा है। जिले में इस क्षेत्र में हो रही प्रगति के आंकड़े यह गवाही दे रहे हैं कि लोग अब स्वरोजगार के नए विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
कभी सीमित स्तर तक सिमटा मधुमक्खी पालन अब जिले में रोजगार और अतिरिक्त आमदनी का बड़ा माध्यम बनता जा रहा है। कृषि विभाग की ओर से लगातार चलाए जा रहे जागरुकता अभियान और तकनीकी मार्गदर्शन का असर यह हुआ है कि हर वर्ष नए किसान इस कार्य से जुड़ रहे हैं। गत वर्ष जिले में इस काम के साथ 183 किसान जुड़े थे जबकि वर्तमान में जिले में 272 से अधिक नियमित मधुमक्खी पालक सक्रिय हैं, जबकि सैकड़ों अन्य किसान भी छोटे स्तर पर इस गतिविधि से जुड़े हुए हैं।
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जिले में शहद उत्पादन के आंकड़े भी इस क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं की गवाही दे रहे हैं। वर्ष 2024-25 में जिले में 776 क्विंटल शहद का उत्पादन हुआ था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर करीब 825.58 क्विंटल पहुंच गया है। खास बात यह रही कि पिछले वर्ष जुलाई से सितंबर तक लगातार भारी बारिश के बावजूद उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई। इससे साफ है कि आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के चलते मधुमक्खी पालन अब अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है।
जानकारों के अनुसार, मधुमक्खी पालन केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है। इससे मोम, पराग, रॉयल जेली और अन्य उत्पाद भी तैयार किए जा सकते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग रहती है। यही वजह है कि महिलाएं भी इस क्षेत्र में रुचि दिखा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार इसे अतिरिक्त आय के साधन के रूप में अपना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मधुमक्खियां कृषि उत्पादन बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में मधुमक्खियों का संरक्षण केवल पर्यावरण ही नहीं बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी जरूरी माना जा रहा है।
कृषि विभाग का कहना है कि आने वाले समय में जिले में और अधिक युवाओं को मधुमक्खी पालन से जोड़ने की योजना है। विभाग की ओर से प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और जागरुकता कार्यक्रमों के माध्यम से इस क्षेत्र को और मजबूत बनाने पर काम किया जा रहा है। (संवाद)