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Kathua News: कठुआ रेलवे स्टेशन अब शहीद कैप्टन सुनील कुमार चौधरी के नाम पर
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कठुआ। कठुआ रेलवे स्टेशन का नाम बदल दिया गया है। अब इसका नाम शहीद कैप्टन सुनील कुमार चौधरी कठुआ रेलवे स्टेशन कर दिया गया है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। कैप्टन सुनील कुमार चौधरी कठुआ रेलवे स्टेशन के पास के ही चक राम सिंह के रहने वाले थे। इससे उनके गांव में खुशी की लहर है।
परिवारीजन और क्षेत्रवासी दो वर्ष से स्टेशन का नाम शहीद कैप्टन चौधरी के नाम पर रखने की मांग कर रहे थे। शहर के बीचोबीच स्थित चौक का नामकरण पहले ही कैप्टन के नाम पर किया जा चुका है। बीते दिसंबर में रेलवे ने तिनसुकिया से दिल्ली चलने वाली एक ट्रेन का इंजन भी शहीद कैप्टन सुनील चौधरी के नाम पर समर्पित किया था। कठुआ शहर में स्मारक है जिसका रखरखाव शहीद का परिवार करता है। हर साल उनके शहीदी दिवस और जन्मदिन पर सामूहिक आयोजन किया जाता है।
कैप्टन चौधरी का 18वां बलिदान दिवस तीन दिन पहले 27 जनवरी को ही मनाया गया था। शहीद के पिता कर्नल (रिटायर्ड) प्यारा लाल चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार और प्रदेश प्रशासन ने बलिदान को सम्मान दिया, इससे हमें बेहद गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि कैप्टन चौधरी के नाम पर यह स्टेशन युवाओं को प्रेरणा देगा और यहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति को देशभक्ति से जोड़ता रहेगा। मेरे बेटे की स्मृति सदैव लोगों के दिलों में जीवित रहेगी। कैप्टन चौधरी की माता सत्या देवी ने कहा कि मेरा बेटा अपने छोटे से जीवन में बहादुरी की जो कथा लिख गया वह हमेशा याद रखी जाएगी।
उल्फा उग्रवादियों से लोहा लेते बलिदान हुए थे कैप्टन सुनील
कैप्टन सुनील कुमार चौधरी 7/11 गोरखा राइफल्स के जांबाज अधिकारी थे। साल 2008 में असम में उल्फा उग्रवादियों के खिलाफ अभियान के दौरान उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया था। 26 जनवरी 2008 को उन्हें सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। इसके अगले ही दिन तिनसुकिया में उग्रवादियों की मौजूदगी का इनपुट मिलते ही उन्होंने जश्न छोड़ अपनी टीम के साथ अभियान में हिस्सा लिया। भीषण मुठभेड़ में उन्होंने दो खूंखार उग्रवादियों को ढेर किया और तीसरे को घायल कर दिया। अदम्य साहस का परिचय देते हुए मुठभेड़ के दौरान वे बलिदान हो गए।
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परिवारीजन और क्षेत्रवासी दो वर्ष से स्टेशन का नाम शहीद कैप्टन चौधरी के नाम पर रखने की मांग कर रहे थे। शहर के बीचोबीच स्थित चौक का नामकरण पहले ही कैप्टन के नाम पर किया जा चुका है। बीते दिसंबर में रेलवे ने तिनसुकिया से दिल्ली चलने वाली एक ट्रेन का इंजन भी शहीद कैप्टन सुनील चौधरी के नाम पर समर्पित किया था। कठुआ शहर में स्मारक है जिसका रखरखाव शहीद का परिवार करता है। हर साल उनके शहीदी दिवस और जन्मदिन पर सामूहिक आयोजन किया जाता है।
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कैप्टन चौधरी का 18वां बलिदान दिवस तीन दिन पहले 27 जनवरी को ही मनाया गया था। शहीद के पिता कर्नल (रिटायर्ड) प्यारा लाल चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार और प्रदेश प्रशासन ने बलिदान को सम्मान दिया, इससे हमें बेहद गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि कैप्टन चौधरी के नाम पर यह स्टेशन युवाओं को प्रेरणा देगा और यहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति को देशभक्ति से जोड़ता रहेगा। मेरे बेटे की स्मृति सदैव लोगों के दिलों में जीवित रहेगी। कैप्टन चौधरी की माता सत्या देवी ने कहा कि मेरा बेटा अपने छोटे से जीवन में बहादुरी की जो कथा लिख गया वह हमेशा याद रखी जाएगी।
उल्फा उग्रवादियों से लोहा लेते बलिदान हुए थे कैप्टन सुनील
कैप्टन सुनील कुमार चौधरी 7/11 गोरखा राइफल्स के जांबाज अधिकारी थे। साल 2008 में असम में उल्फा उग्रवादियों के खिलाफ अभियान के दौरान उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया था। 26 जनवरी 2008 को उन्हें सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। इसके अगले ही दिन तिनसुकिया में उग्रवादियों की मौजूदगी का इनपुट मिलते ही उन्होंने जश्न छोड़ अपनी टीम के साथ अभियान में हिस्सा लिया। भीषण मुठभेड़ में उन्होंने दो खूंखार उग्रवादियों को ढेर किया और तीसरे को घायल कर दिया। अदम्य साहस का परिचय देते हुए मुठभेड़ के दौरान वे बलिदान हो गए।
