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Kathua News: तेजाब फेंकने के मामले में आरोपी महिला आठ साल बाद बरी

संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Mon, 16 Mar 2026 02:04 AM IST
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वर्ष 2017 का बिलावर का मामला

संवाद न्यूज एजेंसी

कठुआ। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीन पंडोह ने आठ साल पुराने एसिड हमले में आरोपी महिला को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर बरी किया है। मामला पुलिस थाना बिलावर क्षेत्र का है। शादीशुदा महिला ने अपने प्रेमी पर तेजाब से हमला कर दिया था जिसमें पीड़ित 35 से 55 प्रतिशत झुलस गया था।

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है इसलिए आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है। कोर्ट में पुलिस की ओर से प्रस्तुत चालान के अनुसार मामला 16 फरवरी 2017 का है। इसमें आरोपी महिला के खिलाफ पुलिस ने आरपीसी की धारा 326-ए और 201 के तहत मामला दर्ज कर चालान को 18 मई 2017 कोर्ट में प्रस्तुत किया गया था।
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आरोपी महिला के खिलाफ आरोप 6 जुलाई 2017 को तय किए गए थे, जिसमें महिला ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलाए जाने की वकालत की थी। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि पीड़ित और आरोपी महिला के बीच पिछले करीब पांच वर्षों से संबंध थे। इसी बीच पीड़ित की शादी 28 फरवरी 2017 को किसी अन्य युवती से तय हो गई थी। अभियोजन के मुताबिक जब आरोपी को इस बात की जानकारी मिली तो वह नाराज हो गई। आरोप था कि उसने पीड़ित को अपने घर बुलाया और शादी से रोकने तथा उसका चेहरा खराब करने की नीयत से उस पर एसिड फेंक दिया।
डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित के चेहरे, गर्दन, छाती और शरीर के अन्य हिस्सों पर 35 से 55 प्रतिशत तक जलने के घाव पाए गए थे। चिकित्सकीय राय में इन चोटों को गंभीर प्रकृति का बताया गया। अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए कुल 14 गवाहों को कोर्ट में प्रस्तुत किया लेकिन ज्यादातर गवाहों ने अभियोजन पक्ष की कहानी का समर्थन नहीं किया। कोर्ट ने पाया कि सबसे महत्वपूर्ण गवाह खुद पीड़ित भी अदालत में पहले दिए गए बयान से मुकर गया और उसने आरोपी के खिलाफ सीधे तौर पर आरोपों की पुष्टि नहीं की। इसके अलावा अन्य गवाहों के बयान भी प्रत्यक्षदर्शी नहीं थे और अधिकतर गवाहों के बयान सुनी-सुनाई बातों पर आधारित पाए गए। इसके अलावा कोर्ट ने पाया कि पुलिस की ओर से जब्त तेजाब की बोतल में सल्फ्यूरिक एसिड होने का दावा किया था लेकिन अदालत में बोतल में किसी भी तरह का तेजाब मौजूद नहीं था। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए उसके जमानती व व्यक्तिगत बांड रद्द कर उसे बरी करने का फैसला सुनाया गया।
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