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Kathua News: एनडीपीएस मामले में आरोपी को मिली सशर्त जमानत

संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Tue, 28 Apr 2026 02:35 AM IST
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अदालत से
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- पुलिस ने आरोपी को 6.75 ग्राम हेरोइन के साथ किया था गिरफ्तार


संवाद न्यूज एजेंसी

कठुआ। एनडीपीएस मामले में अदालत ने आरोपी को सशर्त जमानत दे दी है। आरोपी को जमानत के लिए 50,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है।

साथ ही आरोपी को मामले में चल रही जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है। आरोपी को किसी भी तरीके से अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित नहीं करने की हिदायत दी गई है। यह याचिका प्रधान सत्र न्यायाधीश जतिंद्र जम्वाल की अदालत में दायर की गई है। याचिका में बताया कि आरोपी रूपेश कुमार निवासी चक द्राब खान को कठुआ पुलिस ने 6.75 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उसका मुवक्किल निर्दोष है और उसे पुलिस ने झूठे मामले में फंसाया है। अभियोजन पक्ष ने दलील दी है कि आरोपी की ओर से किया गया अपराध गंभीर और गैर-जमानती है। आरोपी को रिहा किए जाने पर जांच और साक्ष्य से छेड़छाड़ की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि अभियोजन के रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी के कब्जे से मात्र 6.75 ग्राम हेरोइन बरामद हुआ है। यह मात्रा न तो कमर्शियल श्रेणी में आती है और न ही इसमें एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 की कठोर शर्तें लागू होती हैं। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी को लंबे समय तक हिरासत में रखना सजा से पहले सजा देने के समान होगा। इसके बाद अभियोजन ने दलील दी है कि आरोपी अन्य तीन आपराधिक मामलों में भी नामजद है लेकिन बचाव पक्ष ने कहा कि केवल अन्य मामलों का लंबित होना जमानत न देने का एकमात्र आधार नहीं बन सकता।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध भले ही गंभीर हो लेकिन इसमें बरामद मात्रा मध्यम श्रेणी की है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जमानत को दंडात्मक या निवारक उपाय के रूप में नहीं देखा जा सकता। केवल अन्य मामलों की लंबितता के आधार पर आरोपी को जमानत से इन्कार नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने माना कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समाजहित के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है और वर्तमान तथ्यों में आरोपी जमानत का हकदार है। इसके बाद कोर्ट ने उसे सशर्त जमानत सुनाई।
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