बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का दूसरा दिन: श्रद्धालुओं की आस्था और सुरक्षा साथ-साथ, सेना से CRPF तक संभाल रहे मोर्चा
बूढ़ा अमरनाथ यात्रा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए राजोरी-पुंछ हाईवे पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है।
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बूढ़ा अमरनाथ यात्रा के दूसरे दिन जम्मू-कश्मीर के राजोरी-पुंछ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षित और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हाईवे पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है।
हाईवे पर चप्पे-चप्पे पर निगरानी
जम्मू से राजोरी और पुंछ को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवान तैनात किए गए हैं। संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। सुरक्षा बल हाईवे से गुजरने वाले वाहनों और लोगों की जांच के साथ-साथ लगातार निगरानी कर रहे हैं। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ यातायात को भी सुचारु बनाए रखना है।
28 अगस्त तक चलेगी यात्रा
वार्षिक बूढ़ा अमरनाथ यात्रा सोमवार को जम्मू से शुरू हुई थी। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भगवती नगर यात्री निवास से पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को रवाना किया था। पहला जत्था करीब 230 किलोमीटर की यात्रा कर पुंछ की ओर रवाना हुआ। 12 दिवसीय यह यात्रा 28 अगस्त तक चलेगी और रक्षाबंधन के दिन इसका समापन होगा। पुंछ जिले की मंडी तहसील के राजपुरा में स्थित प्राचीन बूढ़ा अमरनाथ मंदिर इस यात्रा का प्रमुख धार्मिक केंद्र है।
कई एजेंसियां मिलकर संभाल रहीं सुरक्षा
यात्रा को देखते हुए सुरक्षा और नागरिक प्रशासन की विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है। हाईवे के अलावा यात्रा से जुड़े प्रमुख स्थानों पर भी सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। राजोरी और पुंछ रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां विशेष सतर्कता बरत रही हैं। हाईवे के संवेदनशील हिस्सों में लगातार चेकिंग और निगरानी की जा रही है।
यातायात व्यवस्था पर भी फोकस
प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और यातायात प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासन मिलकर व्यवस्था संभाल रहे हैं। बूढ़ा अमरनाथ मंदिर समुद्र तल से करीब 4,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। भगवान शिव को समर्पित इस प्राचीन मंदिर में हर साल देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालु पुलस्त्य नदी में पवित्र स्नान के बाद मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं।