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Srinagar News: सार्वजनिक स्थल पर नशा करने के आरोपी को मिली जमानत
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने नशे के आरोपी को सशर्त जमानत दे दी है। अदालत ने आरोपी को 20 हजार की राशि के जमानती और इतनी ही राशि के निजी मुचलके पर जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने आरोपी को किसी भी तरीके से अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित न करना और जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए है।
जमानत याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार की अदालत में की गई। दायर याचिका के अनुसार, पुलिस ने आरोपी अशोक कुमार निवासी वार्ड 14 कठुआ को एनडीपीएस एक्ट की धारा 27 के तहत हिरासत में लिया था। याचिका में यह भी दलील दी गई कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है, अब आरोपी से किसी प्रकार की हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है तथा उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। इसलिए उसे जमानत दी जाए।वहीं अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी को सार्वजनिक स्थान पर कथित रूप से नशीले पदार्थ के प्रभाव में पाया गया था। मेडिकल जांच के दौरान उसके सैंपल में मॉर्फिन की पुष्टि हुई, जिसके आधार पर उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 27 के तहत मामला दर्ज किया गया। अभियोजन ने यह भी दलील दी कि आरोपी को नशीला पदार्थ उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की पहचान अभी की जानी बाकी है और जमानत मिलने पर आरोपी साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि संबंधित अपराध की अधिकतम सजा एक वर्ष है और आरोपी लगभग आठ दिन से न्यायिक हिरासत में है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जमानत नियम है और जेल अपवाद।
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इन परिस्थितियों को देखते हुए जमानत याचिका स्वीकार करते हुए आरोपी को 20 हजार रुपये के जमानती बांड तथा 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने के निर्देश दिए गया।
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कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने नशे के आरोपी को सशर्त जमानत दे दी है। अदालत ने आरोपी को 20 हजार की राशि के जमानती और इतनी ही राशि के निजी मुचलके पर जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने आरोपी को किसी भी तरीके से अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित न करना और जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए है।
जमानत याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार की अदालत में की गई। दायर याचिका के अनुसार, पुलिस ने आरोपी अशोक कुमार निवासी वार्ड 14 कठुआ को एनडीपीएस एक्ट की धारा 27 के तहत हिरासत में लिया था। याचिका में यह भी दलील दी गई कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है, अब आरोपी से किसी प्रकार की हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है तथा उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। इसलिए उसे जमानत दी जाए।वहीं अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी को सार्वजनिक स्थान पर कथित रूप से नशीले पदार्थ के प्रभाव में पाया गया था। मेडिकल जांच के दौरान उसके सैंपल में मॉर्फिन की पुष्टि हुई, जिसके आधार पर उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 27 के तहत मामला दर्ज किया गया। अभियोजन ने यह भी दलील दी कि आरोपी को नशीला पदार्थ उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की पहचान अभी की जानी बाकी है और जमानत मिलने पर आरोपी साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि संबंधित अपराध की अधिकतम सजा एक वर्ष है और आरोपी लगभग आठ दिन से न्यायिक हिरासत में है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जमानत नियम है और जेल अपवाद।
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इन परिस्थितियों को देखते हुए जमानत याचिका स्वीकार करते हुए आरोपी को 20 हजार रुपये के जमानती बांड तथा 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने के निर्देश दिए गया।