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Srinagar News: एप्रिकॉट ब्लॉसम फेस्टिवल में पहुंचे एलजी, सांस्कृतिक विविधता को सराहा
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लद्दाख के उपराज्यपाल आर्यन वैली की पारंपरिक टोपी पहनकर एप्रिकॉट ब्लॉसम फेस्टिवल में सभा को संबो
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संवाद न्यूज एजेंसी
कारगिल। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना शनिवार को आर्यन वैली के दारचिक्स गांव में आयोजित एप्रिकॉट ब्लॉसम फेस्टिवल 2026 में पहुंचे। लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने एक भारत- श्रेष्ठ भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित किया।
उपराज्यपाल ने कारगिल जिले की अपनी पहली यात्रा के दौरान चुली मेंडोक फेस्टिवल में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। यह उत्सव पर्यटन विभाग की ओर से विभिन्न स्थानों पर आयोजित किया जा रहा है जिसका उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करना है।
कार्यक्रम में लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद कारगिल के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद जाफर अखून, सांसद मोहम्मद हनीफा जान, वरिष्ठ अधिकारी, सेना के अधिकारी, कलाकार, पर्यटक और स्थानीय निवासी उपस्थित रहे। सभा को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने आर्यन वैली के लोगों की गर्मजोशी भरी मेहमाननवाजी की सराहना की। इसे एक अनूठा सांस्कृतिक गलियारा बताया जहां परंपराएं और रीति-रिवाज आज भी इतिहास को जीवंत बनाए रखते हैं।
विविधता में एकता के विचार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविध संस्कृतियों में निहित है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ नृत्य रूपों में उन्हें गरबा और दक्षिण भारत के कुछ पारंपरिक नृत्यों की झलक दिखाई दी जो अलग-अलग क्षेत्रों से होने के बावजूद एक ही राष्ट्र की भावना को दर्शाते हैं।
यह उत्सव वसंत ऋतु में खिलने वाले खुबानी के फूलों का उत्सव है जो घाटी को गुलाबी और सफेद रंगों की मनमोहक छटा में बदल देते हैं। इस आयोजन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक भी शामिल हुए। इस अवसर पर कारगिल युद्ध के वीर और महावीर चक्र से सम्मानित कर्नल सोनम वांगचुक को श्रद्धांजलि देने के लिए एक मिनट का मौन भी रखा गया जिन्हें लद्दाख का गौरवशाली पुत्र माना जाता है।
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कारगिल। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना शनिवार को आर्यन वैली के दारचिक्स गांव में आयोजित एप्रिकॉट ब्लॉसम फेस्टिवल 2026 में पहुंचे। लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने एक भारत- श्रेष्ठ भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित किया।
उपराज्यपाल ने कारगिल जिले की अपनी पहली यात्रा के दौरान चुली मेंडोक फेस्टिवल में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। यह उत्सव पर्यटन विभाग की ओर से विभिन्न स्थानों पर आयोजित किया जा रहा है जिसका उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करना है।
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कार्यक्रम में लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद कारगिल के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद जाफर अखून, सांसद मोहम्मद हनीफा जान, वरिष्ठ अधिकारी, सेना के अधिकारी, कलाकार, पर्यटक और स्थानीय निवासी उपस्थित रहे। सभा को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने आर्यन वैली के लोगों की गर्मजोशी भरी मेहमाननवाजी की सराहना की। इसे एक अनूठा सांस्कृतिक गलियारा बताया जहां परंपराएं और रीति-रिवाज आज भी इतिहास को जीवंत बनाए रखते हैं।
विविधता में एकता के विचार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविध संस्कृतियों में निहित है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ नृत्य रूपों में उन्हें गरबा और दक्षिण भारत के कुछ पारंपरिक नृत्यों की झलक दिखाई दी जो अलग-अलग क्षेत्रों से होने के बावजूद एक ही राष्ट्र की भावना को दर्शाते हैं।
यह उत्सव वसंत ऋतु में खिलने वाले खुबानी के फूलों का उत्सव है जो घाटी को गुलाबी और सफेद रंगों की मनमोहक छटा में बदल देते हैं। इस आयोजन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक भी शामिल हुए। इस अवसर पर कारगिल युद्ध के वीर और महावीर चक्र से सम्मानित कर्नल सोनम वांगचुक को श्रद्धांजलि देने के लिए एक मिनट का मौन भी रखा गया जिन्हें लद्दाख का गौरवशाली पुत्र माना जाता है।