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Srinagar News: वैज्ञानिक खेती और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
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संवाद न्यूज एजेंसी
बांदीपोरा। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) बांदीपोरा-1 जिले में वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देकर किसानों को सशक्त बना रहा है। टीम ने प्रगतिशील किसानों के खेतों का दौरा कर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रभाव का आकलन किया। किसानों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
वाटापोरा के रहने वाले एक किसान मोहम्मद रमजान भट ने केवीके के मार्गदर्शन में सब्जियों की नर्सरी तैयार कर अपनी अलग पहचान बनाई है। वे अब वेजिटेबल स्मार्ट फार्मर के रूप में जाने जाते हैं और उच्च गुणवत्ता के पौधे तैयार कर रहे हैं, जिनकी क्षेत्र में काफी मांग है। मंगनीपोरा के किसान गुलाम मोहम्मद भट ने हाई-डेंसिटी सेब बागवानी अपनाकर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार किया है। उनका बाग अब आधुनिक बागवानी का मॉडल बन चुका है।
अश्तंगू के जफरुल्लाह लोन ने तेलहन खेती से शुरुआत कर अपना ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट स्थापित किया है। वे शुद्ध और ऑर्गेनिक खाद्य तेल तैयार कर कश्मीर सहित अन्य राज्यों में आपूर्ति कर रहे हैं।
केवीके प्रमुख डॉ. तारिक सुल्तान और विस्तार निदेशक प्रो. रैहाना हबीब ने इन किसानों के कार्यों की सराहना करते हुए वैज्ञानिक खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाने पर जोर दिया। इस दौरान किसानों, विशेषकर महिलाओं को नर्सरी प्रबंधन, फसल उत्पादन और समेकित खेती के व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिए गए। उन्होंने बताया कि केवीके अब तक सैकड़ों किसानों को प्रशिक्षित कर चुका है और आगे भी कृषि विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
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वाटापोरा के रहने वाले एक किसान मोहम्मद रमजान भट ने केवीके के मार्गदर्शन में सब्जियों की नर्सरी तैयार कर अपनी अलग पहचान बनाई है। वे अब वेजिटेबल स्मार्ट फार्मर के रूप में जाने जाते हैं और उच्च गुणवत्ता के पौधे तैयार कर रहे हैं, जिनकी क्षेत्र में काफी मांग है। मंगनीपोरा के किसान गुलाम मोहम्मद भट ने हाई-डेंसिटी सेब बागवानी अपनाकर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार किया है। उनका बाग अब आधुनिक बागवानी का मॉडल बन चुका है।
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अश्तंगू के जफरुल्लाह लोन ने तेलहन खेती से शुरुआत कर अपना ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट स्थापित किया है। वे शुद्ध और ऑर्गेनिक खाद्य तेल तैयार कर कश्मीर सहित अन्य राज्यों में आपूर्ति कर रहे हैं।
केवीके प्रमुख डॉ. तारिक सुल्तान और विस्तार निदेशक प्रो. रैहाना हबीब ने इन किसानों के कार्यों की सराहना करते हुए वैज्ञानिक खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाने पर जोर दिया। इस दौरान किसानों, विशेषकर महिलाओं को नर्सरी प्रबंधन, फसल उत्पादन और समेकित खेती के व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिए गए। उन्होंने बताया कि केवीके अब तक सैकड़ों किसानों को प्रशिक्षित कर चुका है और आगे भी कृषि विकास के लिए प्रतिबद्ध है।