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हर सैनिक तक पहुंचना चाहिए न्याय : सूर्यकांत
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लेह के रैना ऑडिटोरियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांतस्रोत – सूचना विभाग
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- भारत के मुख्य न्यायाधीश ने लेह में फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स से किया संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने लेह के रैना ऑडिटोरियम में सोमवार को फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स के अधिकारियों और सैनिकों के साथ संवाद किया। इस संवाद में न्यायपालिका और सशस्त्र बलों के बीच मजबूत समन्वय को रेखांकित किया गया। उन्होंने कहा कि न्याय हर सैनिक तक पहुंचना चाहिए।
इस कार्यक्रम में लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली, न्यायमूर्ति संजीव कुमार, सिंधु शर्मा और शहजाद अजीम, मुख्य सचिव लद्दाख आशीष कुंद्रा, डीजीपी लद्दाख मुकेश सिंह तथा जनरल ऑफिसर कमांडिंग हितेश भल्ला सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
स्वागत संबोधन में लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला ने सशस्त्र बलों की राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली ने सशस्त्र बलों के अद्वितीय बलिदान की सराहना की। उनके मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय कानूनी सेवाएं अथॉरिटी (एनएएलएसए) की वीर परिवार सहायता योजना के बाद कानूनी पहुंच में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस पहल के बाद उच्च न्यायालय में 200 से अधिक सशस्त्र बल न्यायाधिकरण से जुड़े मामलों का निपटारा किया गया है।
अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए रेजांग ला की ऐतिहासिक विरासत को याद किया। उन्होंने कहा कि न्याय हर सैनिक तक पहुंचना चाहिए और संविधान के अनुच्छेद 39-ए के तहत न्याय तक पहुंच एक मौलिक अधिकार है। उन्होंने वीर परिवार सहायता योजना और ‘न्याय आपके द्वार’ जैसी योजनाओं का उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य सशस्त्र बलों के जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, कानूनी सहायता प्रदान करना है।
मुख्य न्यायाधीश ने प्रशिक्षित पैरा-लीगल कार्यबल के महत्व पर भी जोर दिया। सेना इकाइयों में पैरा-लीगल स्वयंसेवकों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने यह भी कहा कि इच्छुक पूर्व सैनिक भी इसमें योगदान दे सकते हैं। उन्होंने न्याय तक पहुंच बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित तकनीक के बढ़ते उपयोग पर भी प्रकाश डाला।
न्याय वितरण में तकनीक के उपयोग में भारत विश्व में अग्रणी
इंटरएक्टिव सत्र के दौरान सेना के जवानों ने कानूनी पहुंच और पेशेवर विकास से जुड़े सवाल उठाए। जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अब कहीं से भी ऑनलाइन मामलों को दायर किया जा सकता है और न्याय वितरण में तकनीक के उपयोग में भारत विश्व में अग्रणी है। उन्होंने युवाओं को किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए धैर्य, समर्पण और सेवा भाव बनाए रखने की सलाह दी। कार्यक्रम के बाद सोनम वांगचुक स्टेडियम में ‘बड़ाखाना’ का आयोजन किया गया। इसमें गोरखा सैनिकों की ओर से खुकरी नृत्य, स्पाओ नृत्य, कलारीपयट्टू व गतका जैसे सांस्कृतिक और मार्शल आर्ट प्रदर्शन प्रस्तुत किए गए।
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लेह। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने लेह के रैना ऑडिटोरियम में सोमवार को फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स के अधिकारियों और सैनिकों के साथ संवाद किया। इस संवाद में न्यायपालिका और सशस्त्र बलों के बीच मजबूत समन्वय को रेखांकित किया गया। उन्होंने कहा कि न्याय हर सैनिक तक पहुंचना चाहिए।
इस कार्यक्रम में लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली, न्यायमूर्ति संजीव कुमार, सिंधु शर्मा और शहजाद अजीम, मुख्य सचिव लद्दाख आशीष कुंद्रा, डीजीपी लद्दाख मुकेश सिंह तथा जनरल ऑफिसर कमांडिंग हितेश भल्ला सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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स्वागत संबोधन में लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला ने सशस्त्र बलों की राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली ने सशस्त्र बलों के अद्वितीय बलिदान की सराहना की। उनके मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय कानूनी सेवाएं अथॉरिटी (एनएएलएसए) की वीर परिवार सहायता योजना के बाद कानूनी पहुंच में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस पहल के बाद उच्च न्यायालय में 200 से अधिक सशस्त्र बल न्यायाधिकरण से जुड़े मामलों का निपटारा किया गया है।
अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए रेजांग ला की ऐतिहासिक विरासत को याद किया। उन्होंने कहा कि न्याय हर सैनिक तक पहुंचना चाहिए और संविधान के अनुच्छेद 39-ए के तहत न्याय तक पहुंच एक मौलिक अधिकार है। उन्होंने वीर परिवार सहायता योजना और ‘न्याय आपके द्वार’ जैसी योजनाओं का उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य सशस्त्र बलों के जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, कानूनी सहायता प्रदान करना है।
मुख्य न्यायाधीश ने प्रशिक्षित पैरा-लीगल कार्यबल के महत्व पर भी जोर दिया। सेना इकाइयों में पैरा-लीगल स्वयंसेवकों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने यह भी कहा कि इच्छुक पूर्व सैनिक भी इसमें योगदान दे सकते हैं। उन्होंने न्याय तक पहुंच बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित तकनीक के बढ़ते उपयोग पर भी प्रकाश डाला।
न्याय वितरण में तकनीक के उपयोग में भारत विश्व में अग्रणी
इंटरएक्टिव सत्र के दौरान सेना के जवानों ने कानूनी पहुंच और पेशेवर विकास से जुड़े सवाल उठाए। जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अब कहीं से भी ऑनलाइन मामलों को दायर किया जा सकता है और न्याय वितरण में तकनीक के उपयोग में भारत विश्व में अग्रणी है। उन्होंने युवाओं को किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए धैर्य, समर्पण और सेवा भाव बनाए रखने की सलाह दी। कार्यक्रम के बाद सोनम वांगचुक स्टेडियम में ‘बड़ाखाना’ का आयोजन किया गया। इसमें गोरखा सैनिकों की ओर से खुकरी नृत्य, स्पाओ नृत्य, कलारीपयट्टू व गतका जैसे सांस्कृतिक और मार्शल आर्ट प्रदर्शन प्रस्तुत किए गए।