{"_id":"6a2f077a12cd31a0cc068443","slug":"srinagar-kashmiri-pandit-conclave-skicc-utpal-koul-srinagar-news-c-10-agr1010-938055-2026-06-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौज कशीर हमारे दिलों से कभी दूर नहीं हो सकती : उत्पल कौल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौज कशीर हमारे दिलों से कभी दूर नहीं हो सकती : उत्पल कौल
विज्ञापन
एसकेआईसीसी में उत्पल कौल। अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
- श्रीनगर में ग्लोबल कश्मीरी पंडित कॉन्क्लेव के समापन समारोह में रखीं भविष्य की योजनाएं
अजीम यूसुफ
श्रीनगर। डल किनारे एसकेआईसीसी में आयोजित ग्लोबल कश्मीरी पंडित कॉन्क्लेव के दूसरे दिन वक्ताओं ने अपने विचार रखे। अमर उजाला से खास बातचीत में जाने-माने कश्मीरी सामाजिक कार्यकर्ता और प्रमोटर उत्पल कौल ने कश्मीर और कश्मीरी पंडितों की वापसी को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, मौज कशीर हमारे दिलों से कभी दूर नहीं हो सकती।
उत्पल कौल ने साक्षात्कार की शुरुआत डल झील के प्रति अपनी यादों से की। उन्होंने बताया कि डल झील के किनारे से कुछ ही दूरी पर उनका पुश्तैनी घर हुआ करता था, जहां नाव के जरिए महज 35 मिनट और गाड़ी से 20-25 मिनट में पहुंचा जा सकता था। कश्मीर की सुंदरता केवल इसकी झीलों, वादियों और पहाड़ों तक सीमित नहीं है। कश्मीर की असली ताकत यहां की बुद्धिमत्ता में है। कश्मीर उनकी मां की तरह है और वह इसे दुनिया भर में प्रमोट करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
इतिहास गवाह है कि आज से 2000-3000 साल पहले चीन, सेंट्रल एशिया और मिडिल ईस्ट से लोग यहां शिक्षा ग्रहण करने आते थे। यदि आप ह्वेन सांग, फाह्यान या इब्न बतूता जैसे महान यात्रियों के संस्मरणों को पढ़ें तो उन्होंने भी यहां के लोगों की बुद्धिमत्ता की जमकर सराहना की है। कश्मीर के पानी, हवा और यहां के लोगों के डीएनए में एक अलग ही प्रतिभा है। चाहे वह हिंदू हों या मुसलमान, कश्मीरियों ने दुनिया भर में अपने काम के दम पर अपना नाम रोशन किया है।
विज्ञापन
जब उनसे कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी और उसमें सरकार की भूमिका के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 1989-1990 के मुकाबले आज हालात काफी बदल चुके हैं। उस समय कश्मीरी पंडितों को 45 डिग्री के तापमान में टेंटों में रहना पड़ा था लेकिन आज कई लोगों ने अपने अच्छे व्यवसाय स्थापित कर लिए हैं और वे बड़े-बड़े पदों पर आसीन हैं।
उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा, सरकार ने पिछले 36 वर्षों में केवल 4,500 से 5,000 लोगों को ही सरकारी नौकरियां दी हैं और उनके लिए छोटे कमरों का आवास उपलब्ध कराया है। मैं सरकार से अपील करता हूं कि कश्मीरी हिंदुओं के लिए कम से कम 10,000 और नौकरियां निकाली जाएं। जब तक युवाओं के पास रोजगार नहीं होगा, तब तक उनकी वापसी स्थायी नहीं हो सकती, क्योंकि हर किसी को अपने परिवार और बच्चों के पालन-पोषण की चिंता होती है।
कश्मीर में निवेश और मेडिकल टूरिज्म की अपार संभावनाएं
कौल ने यह दावा भी किया कि यदि कश्मीर में पूर्ण शांति स्थापित हो जाए तो कश्मीरी पंडित और दुनिया भर के निवेशक यहां हजारों करोड़ रुपये का निवेश करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने सिंगापुर और अमेरिका में बैठे कश्मीरी मूल के अरबपतियों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे सभी अपनी मातृभूमि के लिए कुछ करना चाहते हैं। उन्होंने कश्मीर के भविष्य को लेकर अपना दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि घाटी में दुनिया के सबसे बेहतरीन शैक्षणिक संस्थान और बड़े अस्पताल होने चाहिए जिससे यहां मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिल सके।
10 लाख लोगों को कश्मीर लाना है लक्ष्य
जब उनसे पूछा कि क्या वे कश्मीर और अपने घर को मिस करते हैं तो उन्होंने कहा, मैं कश्मीर को मिस नहीं करता, क्योंकि कश्मीर हमेशा मेरे दिल में रहता है। कश्मीरी में हम कहते हैं ''''मौज कशीर'''' यानी मां कश्मीर। कश्मीर हमारी मां है और वह हमारे दिलों से कभी दूर नहीं जा सकती। उन्होंने बताया कि वे पर्यटन को हमेशा बढ़ावा देते रहे हैं और अब उनका लक्ष्य कम से कम 10 लाख लोगों को कश्मीर लाने का है। इसके लिए उन्होंने एक बड़ी कंपनी भी बनाई है जो दुनिया को असली कश्मीर और यहां की समृद्ध विरासत से रूबरू कराएगी।
अजीम यूसुफ
श्रीनगर। डल किनारे एसकेआईसीसी में आयोजित ग्लोबल कश्मीरी पंडित कॉन्क्लेव के दूसरे दिन वक्ताओं ने अपने विचार रखे। अमर उजाला से खास बातचीत में जाने-माने कश्मीरी सामाजिक कार्यकर्ता और प्रमोटर उत्पल कौल ने कश्मीर और कश्मीरी पंडितों की वापसी को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, मौज कशीर हमारे दिलों से कभी दूर नहीं हो सकती।
उत्पल कौल ने साक्षात्कार की शुरुआत डल झील के प्रति अपनी यादों से की। उन्होंने बताया कि डल झील के किनारे से कुछ ही दूरी पर उनका पुश्तैनी घर हुआ करता था, जहां नाव के जरिए महज 35 मिनट और गाड़ी से 20-25 मिनट में पहुंचा जा सकता था। कश्मीर की सुंदरता केवल इसकी झीलों, वादियों और पहाड़ों तक सीमित नहीं है। कश्मीर की असली ताकत यहां की बुद्धिमत्ता में है। कश्मीर उनकी मां की तरह है और वह इसे दुनिया भर में प्रमोट करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
इतिहास गवाह है कि आज से 2000-3000 साल पहले चीन, सेंट्रल एशिया और मिडिल ईस्ट से लोग यहां शिक्षा ग्रहण करने आते थे। यदि आप ह्वेन सांग, फाह्यान या इब्न बतूता जैसे महान यात्रियों के संस्मरणों को पढ़ें तो उन्होंने भी यहां के लोगों की बुद्धिमत्ता की जमकर सराहना की है। कश्मीर के पानी, हवा और यहां के लोगों के डीएनए में एक अलग ही प्रतिभा है। चाहे वह हिंदू हों या मुसलमान, कश्मीरियों ने दुनिया भर में अपने काम के दम पर अपना नाम रोशन किया है।
जब उनसे कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी और उसमें सरकार की भूमिका के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 1989-1990 के मुकाबले आज हालात काफी बदल चुके हैं। उस समय कश्मीरी पंडितों को 45 डिग्री के तापमान में टेंटों में रहना पड़ा था लेकिन आज कई लोगों ने अपने अच्छे व्यवसाय स्थापित कर लिए हैं और वे बड़े-बड़े पदों पर आसीन हैं।
उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा, सरकार ने पिछले 36 वर्षों में केवल 4,500 से 5,000 लोगों को ही सरकारी नौकरियां दी हैं और उनके लिए छोटे कमरों का आवास उपलब्ध कराया है। मैं सरकार से अपील करता हूं कि कश्मीरी हिंदुओं के लिए कम से कम 10,000 और नौकरियां निकाली जाएं। जब तक युवाओं के पास रोजगार नहीं होगा, तब तक उनकी वापसी स्थायी नहीं हो सकती, क्योंकि हर किसी को अपने परिवार और बच्चों के पालन-पोषण की चिंता होती है।
कश्मीर में निवेश और मेडिकल टूरिज्म की अपार संभावनाएं
कौल ने यह दावा भी किया कि यदि कश्मीर में पूर्ण शांति स्थापित हो जाए तो कश्मीरी पंडित और दुनिया भर के निवेशक यहां हजारों करोड़ रुपये का निवेश करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने सिंगापुर और अमेरिका में बैठे कश्मीरी मूल के अरबपतियों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे सभी अपनी मातृभूमि के लिए कुछ करना चाहते हैं। उन्होंने कश्मीर के भविष्य को लेकर अपना दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि घाटी में दुनिया के सबसे बेहतरीन शैक्षणिक संस्थान और बड़े अस्पताल होने चाहिए जिससे यहां मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिल सके।
10 लाख लोगों को कश्मीर लाना है लक्ष्य
जब उनसे पूछा कि क्या वे कश्मीर और अपने घर को मिस करते हैं तो उन्होंने कहा, मैं कश्मीर को मिस नहीं करता, क्योंकि कश्मीर हमेशा मेरे दिल में रहता है। कश्मीरी में हम कहते हैं ''''मौज कशीर'''' यानी मां कश्मीर। कश्मीर हमारी मां है और वह हमारे दिलों से कभी दूर नहीं जा सकती। उन्होंने बताया कि वे पर्यटन को हमेशा बढ़ावा देते रहे हैं और अब उनका लक्ष्य कम से कम 10 लाख लोगों को कश्मीर लाने का है। इसके लिए उन्होंने एक बड़ी कंपनी भी बनाई है जो दुनिया को असली कश्मीर और यहां की समृद्ध विरासत से रूबरू कराएगी।