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Srinagar News: पीडीपी नेता रेशी ने लगाया वक्फ जमीन गुपचुप पट्टे देने का आरोप, जांच की मांग
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के वरिष्ठ नेता और विधानपरिषद के पूर्व सदस्य (एमएलसी) यासिर रेशी ने बांदीपोरा जिले के सुंबल के अशम इलाके में लगभग 150 कनाल वक्फ बोर्ड की जमीन की कथित चौंकाने वाली और गुपचुप पट्टे पर देने की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है।
एक्स पर अपनी पोस्ट के बाद जारी एक बयान में रेशी ने उस बात को उठाया जिसे उन्होंने इस प्रमुख वक्फ संपत्ति के आवंटन में सार्वजनिक सूचना, प्रतिस्पर्धी बोली और पारदर्शिता की पूरी तरह से अनुपस्थिति बताया। उन्होंने इसे धार्मिक बंदोबस्त को नियंत्रित करने वाले स्थापित कानूनी और प्रशासनिक मानदंडों का गंभीर उल्लंघन करार दिया।
रेशी ने कहा कि वक्फ एक सार्वजनिक ट्रस्ट है जिसका उद्देश्य समुदाय के कल्याण के लिए काम करना है। सार्वजनिक टेंडर या खुली नीलामी जैसी उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना जमीन का किया गया कोई भी आवंटन न केवल एक प्रशासनिक चूक है बल्कि कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी का उल्लंघन भी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह आवंटन गुपचुप तरीके से किया गया और उन अनिवार्य प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिया गया जो यह सुनिश्चित करती हैं कि सामुदायिक संपत्तियों का उपयोग पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से हो। उन्होंने आगे सवाल उठाया कि जमीन का इतना बड़ा टुकड़ा स्थानीय हितधारकों की जानकारी के बिना या व्यापक सार्वजनिक जांच के बिना कैसे पट्टे पर दिया जा सकता है।
रेशी ने मांग की कि जम्मू और कश्मीर वक्फ बोर्ड तुरंत पट्टे का विवरण सार्वजनिक करे जिसमें लाभार्थियों की पहचान और आवंटन के लिए उपयोग किए गए मानदंड शामिल हों। लोगों को यह जानने का अधिकार है कि यह जमीन किसे और किस आधार पर दी गई है। जब तक एक पारदर्शी समीक्षा नहीं हो जाती तब तक जमीन पर चल रही किसी भी गतिविधि को रोक दिया जाए। अधिकारियों से आग्रह है कि वे आवंटन को निलंबित करें। सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक करें और यदि कोई गलत काम साबित होता है तो जिम्मेदारी तय करने के लिए एक समय-सीमा के भीतर जांच शुरू करें।
वक्फ बोर्ड ने आरोपों को सिरे से किया खारिज
जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बोर्ड ने इन दावों को गलत जानकारी पर आधारित और बिना किसी ठोस आधार के बताया है। बोर्ड ने जोर देकर कहा कि इस मामले में अपनाई गई प्रक्रिया हाल के सालों में सबसे ज्यादा पारदर्शी और रेवेन्यू बढ़ाने वाले प्रशासनिक कदमों में से एक है।
अधिकारियों के मुताबिक यह आरोप कि बाग को बिना किसी विज्ञापन या टेंडर के गुपचुप तरीके से पट्टे पर दिया गया था पूरी तरह से गलत और गुमराह करने वाला है। सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी स्तर पर की गई जांच से पता चलता है कि बोर्ड ने दस्तावेजों पर आधारित और सार्वजनिक रूप से जांची जा सकने वाली प्रक्रिया का पालन किया है। अखबारों के जरिए विज्ञापन जारी किए गए थे। ये वही माध्यम थे जिनका इस्तेमाल सरकारी सूचनाओं के लिए किया जाता है। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए यह सूचना बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट (www.jkwaqfboard.com) पर भी अपलोड की गई थी।
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श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के वरिष्ठ नेता और विधानपरिषद के पूर्व सदस्य (एमएलसी) यासिर रेशी ने बांदीपोरा जिले के सुंबल के अशम इलाके में लगभग 150 कनाल वक्फ बोर्ड की जमीन की कथित चौंकाने वाली और गुपचुप पट्टे पर देने की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है।
एक्स पर अपनी पोस्ट के बाद जारी एक बयान में रेशी ने उस बात को उठाया जिसे उन्होंने इस प्रमुख वक्फ संपत्ति के आवंटन में सार्वजनिक सूचना, प्रतिस्पर्धी बोली और पारदर्शिता की पूरी तरह से अनुपस्थिति बताया। उन्होंने इसे धार्मिक बंदोबस्त को नियंत्रित करने वाले स्थापित कानूनी और प्रशासनिक मानदंडों का गंभीर उल्लंघन करार दिया।
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रेशी ने कहा कि वक्फ एक सार्वजनिक ट्रस्ट है जिसका उद्देश्य समुदाय के कल्याण के लिए काम करना है। सार्वजनिक टेंडर या खुली नीलामी जैसी उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना जमीन का किया गया कोई भी आवंटन न केवल एक प्रशासनिक चूक है बल्कि कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी का उल्लंघन भी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह आवंटन गुपचुप तरीके से किया गया और उन अनिवार्य प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिया गया जो यह सुनिश्चित करती हैं कि सामुदायिक संपत्तियों का उपयोग पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से हो। उन्होंने आगे सवाल उठाया कि जमीन का इतना बड़ा टुकड़ा स्थानीय हितधारकों की जानकारी के बिना या व्यापक सार्वजनिक जांच के बिना कैसे पट्टे पर दिया जा सकता है।
रेशी ने मांग की कि जम्मू और कश्मीर वक्फ बोर्ड तुरंत पट्टे का विवरण सार्वजनिक करे जिसमें लाभार्थियों की पहचान और आवंटन के लिए उपयोग किए गए मानदंड शामिल हों। लोगों को यह जानने का अधिकार है कि यह जमीन किसे और किस आधार पर दी गई है। जब तक एक पारदर्शी समीक्षा नहीं हो जाती तब तक जमीन पर चल रही किसी भी गतिविधि को रोक दिया जाए। अधिकारियों से आग्रह है कि वे आवंटन को निलंबित करें। सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक करें और यदि कोई गलत काम साबित होता है तो जिम्मेदारी तय करने के लिए एक समय-सीमा के भीतर जांच शुरू करें।
वक्फ बोर्ड ने आरोपों को सिरे से किया खारिज
जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बोर्ड ने इन दावों को गलत जानकारी पर आधारित और बिना किसी ठोस आधार के बताया है। बोर्ड ने जोर देकर कहा कि इस मामले में अपनाई गई प्रक्रिया हाल के सालों में सबसे ज्यादा पारदर्शी और रेवेन्यू बढ़ाने वाले प्रशासनिक कदमों में से एक है।
अधिकारियों के मुताबिक यह आरोप कि बाग को बिना किसी विज्ञापन या टेंडर के गुपचुप तरीके से पट्टे पर दिया गया था पूरी तरह से गलत और गुमराह करने वाला है। सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी स्तर पर की गई जांच से पता चलता है कि बोर्ड ने दस्तावेजों पर आधारित और सार्वजनिक रूप से जांची जा सकने वाली प्रक्रिया का पालन किया है। अखबारों के जरिए विज्ञापन जारी किए गए थे। ये वही माध्यम थे जिनका इस्तेमाल सरकारी सूचनाओं के लिए किया जाता है। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए यह सूचना बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट (www.jkwaqfboard.com) पर भी अपलोड की गई थी।