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जम्मू-कश्मीर में किसान सेवा केंद्र और भेड़ उत्पादन इकाई स्थापित करे इफ्को : एलजी

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Srinagar, Women Farmers Conference, LG Manoj Sinha
एसकेआईसीसी में आयोजित इफ्फ्को के कार्यक्रम में उपराज्यपाल व अन्य। संवाद - फोटो : संवाद
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- उपराज्यपाल ने श्रीनगर में इफ्को के महिला किसान सम्मेलन में हिस्सा लिया
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-एलजी ने कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में महिला किसानों के योगदान पर प्रकाश डाला

- उपराज्यपाल ने प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तकों से आग्रह किया कि वे महिला किसानों के लिए तकनीकी उपकरणों को प्राथमिकता दें।
- वैश्विक खाद्य प्रणाली महिलाओं की मेहनत पर टिकी है, फिर भी यह उन्हें समृद्धि से वंचित रखती है।
- हर योजना में महिला किसानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने वीरवार को श्रीनगर में महिला किसान सम्मेलन में हिस्सा लिया। उन्होंने महिला किसानों के लिए तकनीकी उपकरणों को और हर योजना में उन्हें प्राथमिकता देने को कहा। इफ्को के अधिकारियों से उन्होंने जम्मू-कश्मीर में किसान सेवा केंद्र और भेड़ उत्पादन इकाई स्थापित करने का निर्देश दिया।
इस मौके पर इफ्को के अध्यक्ष दिलीप संघानी, कृषि मंत्री जाविद डार भी मौजूद थे। उपराज्यपाल ने इफ्को के अधिकारियों से कहा कि वह जम्मू-कश्मीर में किसानों के लिए प्रशिक्षण केंद्र, कई सुविधाओं वाला किसान सेवा केंद्र और भेड़ उत्पादन इकाई स्थापित करें। साथ ही स्थानीय किसानों की मदद के लिए मोबाइल मिट्टी परीक्षण मशीन भी उपलब्ध कराएं। इसके बाद उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद महिला किसानों से हाथ खड़े कराकर उनकी आवश्यकता भी बताई। इफ्को के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने वादा किया कि कितना भी बजट खर्च हो जाए वह उनकी मांग जरूर पूरी करेंगे।
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अपने संबोधन में उपराज्यपाल ने कहा कि महिला किसान दुनिया को चलाती हैं। अपने पुरुष साथियों की तुलना में अधिक मेहनत करती हैं और उनकी ताकत खाद्य सुरक्षा को मजबूती देती है हर क्षेत्र में परिवारों और समाज के लिए समृद्धि के बीज बोती है। एलजी ने कहा कि महिला किसानों के बिना हर थाली खाली रह जाएगी जिससे मानवता भूखी रह जाएगी।

उन्होंने हर सहकारी संस्था और सरकारी हितधारक से आग्रह किया कि वे यह सवाल पूछें कि महिला किसानों के जीवन में ऐसी कौन सी चुनौती या बाधा है जिसे तत्काल दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक-एक करके इन बाधाओं को हटाकर, हम उनके नेतृत्व का सम्मान कर सकते हैं और सीधे बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करके समाज और राष्ट्र को समृद्ध बना सकते हैं।
सम्मेलन में महिला किसान और कृषि-उद्यमी, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्य और महिला प्रतिनिधि शामिल हुईं। कार्यक्रम में चेनानी से विधानसभा सदस्य बलवंत सिंह मनकोटिया, उपायुक्त अक्षय लाबरू, एसएसपी डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती आदि भी मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत में उपराज्यपाल ने महिला कृषि-उद्यमियों को सम्मानित किया। उन्होंने इफ्को और विभिन्न कृषि-उद्यमियों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी दौरा किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित करके एक उचित कदम उठाया है, जो एक लंबे समय से प्रतीक्षित था।
उपराज्यपाल ने प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तकों से आह्वान किया कि वे महिला किसानों के लिए तकनीकी उपकरणों को प्राथमिकता दें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन और डेयरी विभागों को महिला किसानों के लिए संसाधन आवंटित करने चाहिए जबकि वित्तीय संस्थानों को ऐसे ऋण उत्पाद तैयार करने चाहिए जो भूमिहीन महिला किसानों को अपने नाम पर ऋण प्राप्त करने में सक्षम बना सकें।

उपराज्यपाल ने सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे महिला किसानों और उद्यमियों को मान्यता, संसाधन और अपनी शर्तों पर काम करने की स्वायत्तता प्रदान करें। उन्होंने कहा, सशक्त महिला किसान जलवायु-अनुकूलन की वाहक होती हैं, वे गुणवत्तापूर्ण बीजों, डिजिटल उपकरणों और सहकारी समितियों के माध्यम से बाज़ार से जुड़ाव स्थापित करते हुए एक सुदृढ़ कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करती हैं।


एचएडीपी में अब तक 14,782 महिला किसानों का पंजीकरण
उपराज्यपाल ने कहा कि समग्र कृषि विकास कार्यक्रम (एचएडीपी) के माध्यम से जम्मू-कश्मीर उच्च उत्पादन, बेहतर आय और सतत कृषि के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु एक समग्र, प्रौद्योगिकी-संचालित और किसान-केंद्रित रूपांतरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस कार्यक्रम के तहत अब तक 14,782 महिला किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। पीएम किसान सम्मान निधि में 90,000 से ज्यादा महिला लाभार्थी हैं। प्राकृतिक खेती और केंद्र की योजनाओं में 8,000 से ज्यादा महिला किसान रजिस्टर्ड हैं। बागवानी में 4,472, रेशम उत्पादन में 128, स्कॉस्ट की योजनाओं में 144,000 से ज्यादा, डेयरी में 27,500 और भेड़ पालन व मछली पालन में 16,000 से ज्यादा महिलाएं रजिस्टर्ड हैं। कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में कुल मिलाकर लगभग 3,11,000 महिलाएं रजिस्टर्ड हैं।

केंद्र की योजनाओं से जुड़ें महिला किसान

उपराज्यपाल ने कहा, मैं लाखों और ऐसी महिला किसानों को पहचानता हूं जो अभी पंजीकृत नहीं हैं। मैं उनसे आग्रह करता हूं कि वे केंद्र की योजनाओं से जुड़ें। मुझे जम्मू-कश्मीर के स्वयं सहायता समूहों, महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे एफपीओ, और मशरूम, बागवानी, मधुमक्खी पालन, खाद्य प्रसंस्करण और डेयरी जैसे क्षेत्रों में चलाए जा रहे कौशल विकास कार्यक्रमों पर गर्व है जो ग्रामीण महिलाओं को किसान, कृषि-उद्यमी और निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में सशक्त बना रहे हैं।
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