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Udhampur News: डोडा-किश्तवाड़ हाईवे पर भूस्खलन, 10 घंटे के लंबे ऑपरेशन के बाद सिर्फ एक लेन बहाल
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डोडा। डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर शनिवार को सुबह करीब पांच बजे पुल डोडा के पास गत्सू में भूस्खलन हुआ। यहां पहाड़ से भारी पत्थर सड़क पर आ गिरे। सड़क को आंशिक रूप से खोलने में विभागीय कर्मचारियों को करीब 10 घंटे लग गए। इसके बावजूद सिर्फ एक लेन ही खोली जा सकी। यहां भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। ऐसे में यात्रियों से वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है।
जम्मू-कश्मीर यातायात पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार भूस्खलन सुबह करीब पांच बजे हुआ। इससे डोडा और किश्तवाड़ के बीच सड़क संपर्क अवरुद्ध हो गया। सूचना मिलते ही प्रशासन के अधिकारियों, कर्मचारियों और मशीनों को काम पर लगा दिया गया। घटना स्थल पर बड़े-बड़े पत्थर गिरे हैं। कुछ पत्थर इतने बड़े थे कि उन्हें जेसीबी से तोड़कर हटाना पड़ा। करीब 10 घंटे लंबे ऑपरेशन के बाद दोपहर करीब तीन बजे एक लेन को ट्रैफिक के लिए खोल लिया गया। देर रात तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं थी।
अधिकारी ने बताया कि जिला प्रशासन और राहत टीमों लगातार काम करके मलबे को हटा रही हैं। वाहनों की आवाजाही धीरे-धीरे शुरू हो गई है। ट्रैफिक को दोनों दिशाओं से बारी-बारी से (वन-वे) छोड़ा जा रहा है ताकि बचा हुआ मलबा भी साफ किया जा सके। ट्रैफिक क्लियरेंस में हो रही देरी की वजह से गाड़ियों की लंबी कतारें लग रही हैं। भूस्खलन में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
पहाड़ी पर अटका एक विशाल पत्थर बड़ी चुनाैती
मौके पर मौजूद अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था पर पैनी नजर रखे हुए हैं। सबसे बड़ी चुनौती पहाड़ी पर अटका एक विशाल पत्थर (बोल्डर) है। यदि यह बोल्डर नीचे गिरता है तो सड़क फिर से दो दिनों के लिए बंद हो सकती है। इसके अलावा रुक-रुक कर गिरते छोटे पत्थरों के कारण भी खतरा बना हुआ है।
इन वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करें वाहन चालक
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे डोडा -किश्तवाड़ मार्ग पर गैर-जरूरी यात्रा करने से बचें। यदि यात्रा बहुत आवश्यक है तो वैकल्पिक रास्तों जैसे प्राणो रोड या जोधपुर से शिव पुल और करारा जाने वाले मार्ग से सफर कर सकते हैं। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
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जम्मू-कश्मीर यातायात पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार भूस्खलन सुबह करीब पांच बजे हुआ। इससे डोडा और किश्तवाड़ के बीच सड़क संपर्क अवरुद्ध हो गया। सूचना मिलते ही प्रशासन के अधिकारियों, कर्मचारियों और मशीनों को काम पर लगा दिया गया। घटना स्थल पर बड़े-बड़े पत्थर गिरे हैं। कुछ पत्थर इतने बड़े थे कि उन्हें जेसीबी से तोड़कर हटाना पड़ा। करीब 10 घंटे लंबे ऑपरेशन के बाद दोपहर करीब तीन बजे एक लेन को ट्रैफिक के लिए खोल लिया गया। देर रात तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं थी।
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अधिकारी ने बताया कि जिला प्रशासन और राहत टीमों लगातार काम करके मलबे को हटा रही हैं। वाहनों की आवाजाही धीरे-धीरे शुरू हो गई है। ट्रैफिक को दोनों दिशाओं से बारी-बारी से (वन-वे) छोड़ा जा रहा है ताकि बचा हुआ मलबा भी साफ किया जा सके। ट्रैफिक क्लियरेंस में हो रही देरी की वजह से गाड़ियों की लंबी कतारें लग रही हैं। भूस्खलन में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
पहाड़ी पर अटका एक विशाल पत्थर बड़ी चुनाैती
मौके पर मौजूद अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था पर पैनी नजर रखे हुए हैं। सबसे बड़ी चुनौती पहाड़ी पर अटका एक विशाल पत्थर (बोल्डर) है। यदि यह बोल्डर नीचे गिरता है तो सड़क फिर से दो दिनों के लिए बंद हो सकती है। इसके अलावा रुक-रुक कर गिरते छोटे पत्थरों के कारण भी खतरा बना हुआ है।
इन वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करें वाहन चालक
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे डोडा -किश्तवाड़ मार्ग पर गैर-जरूरी यात्रा करने से बचें। यदि यात्रा बहुत आवश्यक है तो वैकल्पिक रास्तों जैसे प्राणो रोड या जोधपुर से शिव पुल और करारा जाने वाले मार्ग से सफर कर सकते हैं। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।