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Udhampur News: स्वास्थ्य के लिए संजीवनी है उपवास, शरीर होता है डिटॉक्स, दिल और दिमाग को मिलता है सुकून
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- बीमार बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए दो वक्त की अरदास उपवास के समान
उधमपुर। नवरात्र और रमजान पर रखे जाने वाले उपवास न केवल आस्था का प्रतीक हैं बल्कि आधुनिक विज्ञान के नजरिए से भी ये शरीर के लिए वरदान से कम नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सही तरीके से रखा गया व्रत शरीर को डिटॉक्स (विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना) करने और पाचन तंत्र को पुनर्जीवित करने में सहायक होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उपवास के दौरान शरीर में जमा अतिरिक्त फैट धीरे-धीरे कम होता है, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा घट जाता है। संतुलित खान-पान और नियंत्रित कैलोरी के कारण रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी सुधरता है जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियों से बचाव करता है। गंभीर बीमारी से ग्रसित बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं या बच्चों को उपवास नहीं रखना चाहिए। स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए आस्था को भी बरकरार रखने के लिए दो वक्त पूजा कर लेना ही उपवास के समान है।
नवरात्र में फल, साबूदाना और नारियल पानी जैसे हल्के आहार पाचन को दुरुस्त रखते हैं, वहीं रमजान में संयमित भोजन मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है। उपवास न केवल शरीर बल्कि मन को भी शांत करता है। इससे तनाव कम होता है और मानसिक एकाग्रता में सुधार आता है। आधुनिक जीवनशैली में खराब खान-पान की आदतों के बीच उपवास रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने का कार्य करता है।
आधुनिक जीवनशैली में अधिक खाने व गैर पौष्टिक आहार की आदत बढ़ गई है, जिससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। उपवास से इम्यून सिस्टम मजबूत होने के साथ ही पाचन तंत्र संतुलित रहता है। हालांकि गंभीर रोग से ग्रसित मरीजों को उपवास नहीं रखना चाहिए।
- डॉ. सुदेश रैना, बाल रोग, विशेषज्ञ।
बच्चों, गर्भवती और बीमार बुजुर्गों को उपवास नहीं रखना चाहिए। वे सुबह-शाम श्रद्धा से पूजा करें, वही उपवास के समान है। यदि किसी को व्रत रखना है तो एक या दो उपवास ही रखे और फलाहार खाए।
- महंत वासुदेव शास्त्री,
राधा कृष्ण मंदिर
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उधमपुर। नवरात्र और रमजान पर रखे जाने वाले उपवास न केवल आस्था का प्रतीक हैं बल्कि आधुनिक विज्ञान के नजरिए से भी ये शरीर के लिए वरदान से कम नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सही तरीके से रखा गया व्रत शरीर को डिटॉक्स (विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना) करने और पाचन तंत्र को पुनर्जीवित करने में सहायक होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उपवास के दौरान शरीर में जमा अतिरिक्त फैट धीरे-धीरे कम होता है, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा घट जाता है। संतुलित खान-पान और नियंत्रित कैलोरी के कारण रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी सुधरता है जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियों से बचाव करता है। गंभीर बीमारी से ग्रसित बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं या बच्चों को उपवास नहीं रखना चाहिए। स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए आस्था को भी बरकरार रखने के लिए दो वक्त पूजा कर लेना ही उपवास के समान है।
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नवरात्र में फल, साबूदाना और नारियल पानी जैसे हल्के आहार पाचन को दुरुस्त रखते हैं, वहीं रमजान में संयमित भोजन मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है। उपवास न केवल शरीर बल्कि मन को भी शांत करता है। इससे तनाव कम होता है और मानसिक एकाग्रता में सुधार आता है। आधुनिक जीवनशैली में खराब खान-पान की आदतों के बीच उपवास रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने का कार्य करता है।
आधुनिक जीवनशैली में अधिक खाने व गैर पौष्टिक आहार की आदत बढ़ गई है, जिससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। उपवास से इम्यून सिस्टम मजबूत होने के साथ ही पाचन तंत्र संतुलित रहता है। हालांकि गंभीर रोग से ग्रसित मरीजों को उपवास नहीं रखना चाहिए।
- डॉ. सुदेश रैना, बाल रोग, विशेषज्ञ।
बच्चों, गर्भवती और बीमार बुजुर्गों को उपवास नहीं रखना चाहिए। वे सुबह-शाम श्रद्धा से पूजा करें, वही उपवास के समान है। यदि किसी को व्रत रखना है तो एक या दो उपवास ही रखे और फलाहार खाए।
- महंत वासुदेव शास्त्री,
राधा कृष्ण मंदिर