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Udhampur News: बांत-तोलडी पुल बहने के बाद आवाजाही का संकट, रस्सी के सहारे उफनती नदी को पार कर रहे लोग
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उधमपुर। एक तरफ जहां प्रशासन ने भारी बारिश के मौसमी पूर्वानुमान के मद्देनजर नदी नालों से दूर रहने का अलर्ट जारी किया है। दूसरी तरफ पुलों के अभाव में उफनते नदी-नालों के बीच आवाजाही के संकट से जूझते ग्रामीण जीवन के संघर्ष की कई रोंगटे खड़ी कर देने वाली तस्वीरें सामने आ रहीं हैं। ऐसी ही एक संघर्षपूर्ण तस्वीर समरोली के बांत-तोलडी पुल क्षेत्र से सामने आई है। जहां उफनती तवी नदी के दोनों किनारों पर बचे हुए पुल के खंभों के सहारे रस्सी बंधी है। इस रस्सी को पकड़कर लोग नदी में उतरते हैं और फिर कड़ा संघर्ष करते हुए आर-पार जाते हैं।
हंसराज, सृष्टा देवी, निखिल कुमार, सोहन लाल व अन्य स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले साल बरसात के दौरान आई तेज बाढ़ में बांत-तोलडी पुल का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह बह गया था। बाढ़ के बाद केवल पुल के पिलर ही शेष रह गए थे। पुल बहने के बाद से क्षेत्र का सड़क संपर्क प्रभावित है और आसपास के ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किलों में घिर गई है। यह पुल स्थानीय लोगों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग था, जिसके टूटने से दैनिक जीवन की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। बांत, तोलडी और आसपास के लगभग दर्जन भर से अधिक गांवों की लगभग 40 हजार अधिक आबादी प्रभावित है।
बारिश बढ़ते ही बढ़ गया संकट
इस समय बरसात का मौसम चल रहा है। इसके चलते ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। उनका कहना है कि नदी कई बार उफान पर आ जाती है। ऐसे में रस्सी के सहारे नदी पार करना खतरे से खाली नहीं है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और रोजमर्रा के काम के लिए बाहर जाने वाले लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर यह रास्ता पार करना पड़ता है। बीते 4 जुलाई को गांव में आई एक बरात को भी नदी के बीच से होकर गुजरना पड़ा था। इसमें दुल्हें को पालकी में बिठाकर नदी पार करवानी पड़ी थी। वहीं, अब जलस्तर बढ़ने के बाद आवाजाही का संकट और भी अधिक गहरा गया है। हालांकि नए पुल को मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही काम शुरू होने का आश्वासन दिया गया है लेकिन जब तक नया पुल तैयार नहीं होता, तब तक लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी के इस जोखिम को दूर करने के लिए कोई वैकल्पिक प्रबंध कर राहत प्रदान की जानी चाहिए।
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कोट
तोलडी नाला पुल के निर्माण कार्य को मंजूरी मिल चुकी है और इसका टेंडर भी हो चुका है, बारिश का सिलसिला थमने के बाद तेज गति से नए पुल को बनाने का काम पूरा किया जाएगा।
-शम्मी गुप्ता, एईई लोक निर्माण विभाग
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हंसराज, सृष्टा देवी, निखिल कुमार, सोहन लाल व अन्य स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले साल बरसात के दौरान आई तेज बाढ़ में बांत-तोलडी पुल का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह बह गया था। बाढ़ के बाद केवल पुल के पिलर ही शेष रह गए थे। पुल बहने के बाद से क्षेत्र का सड़क संपर्क प्रभावित है और आसपास के ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किलों में घिर गई है। यह पुल स्थानीय लोगों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग था, जिसके टूटने से दैनिक जीवन की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। बांत, तोलडी और आसपास के लगभग दर्जन भर से अधिक गांवों की लगभग 40 हजार अधिक आबादी प्रभावित है।
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बारिश बढ़ते ही बढ़ गया संकट
इस समय बरसात का मौसम चल रहा है। इसके चलते ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। उनका कहना है कि नदी कई बार उफान पर आ जाती है। ऐसे में रस्सी के सहारे नदी पार करना खतरे से खाली नहीं है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और रोजमर्रा के काम के लिए बाहर जाने वाले लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर यह रास्ता पार करना पड़ता है। बीते 4 जुलाई को गांव में आई एक बरात को भी नदी के बीच से होकर गुजरना पड़ा था। इसमें दुल्हें को पालकी में बिठाकर नदी पार करवानी पड़ी थी। वहीं, अब जलस्तर बढ़ने के बाद आवाजाही का संकट और भी अधिक गहरा गया है। हालांकि नए पुल को मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही काम शुरू होने का आश्वासन दिया गया है लेकिन जब तक नया पुल तैयार नहीं होता, तब तक लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी के इस जोखिम को दूर करने के लिए कोई वैकल्पिक प्रबंध कर राहत प्रदान की जानी चाहिए।
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तोलडी नाला पुल के निर्माण कार्य को मंजूरी मिल चुकी है और इसका टेंडर भी हो चुका है, बारिश का सिलसिला थमने के बाद तेज गति से नए पुल को बनाने का काम पूरा किया जाएगा।
-शम्मी गुप्ता, एईई लोक निर्माण विभाग