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Udhampur News: मवेशियों के अवैध परिवहन में जब्त वाहन को शर्तों पर छोड़ने के आदेश
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उधमपुर। अतिरिक्त विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट की अदालत ने थाना रैहम्बल में दर्ज मामले में जब्त वाहन को सुपुर्दनामा पर रिलीज करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने वाहन की रिहाई के लिए कई शर्तें भी तय की हैं।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार वाहन को 29 जुलाई 2026 को जब्त किया गया था। वाहन में 15 मवेशी ले जाए जा रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार मवेशियों को ले जाने के लिए पर्याप्त जगह, हवा, भोजन और पानी की व्यवस्था नहीं थी। पुलिस ने यह भी कहा कि मवेशियों के परिवहन के लिए आवश्यक अनुमति और पशु चिकित्सा प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया था। अभियोजन की ओर से वाहन के पूर्व में दो अन्य मामलों में शामिल होने का भी उल्लेख किया गया।
वाहन की अंतरिम रिहाई के लिए अदालत में आवेदन दिया गया था। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने विभिन्न न्यायिक निर्णयों का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि जब्त वाहन को लंबे समय तक पुलिस परिसर में रखने से उसके खराब होने और मूल्य में कमी आने की संभावना रहती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए अदालत ने वाहन को कुछ शर्तों के साथ आवेदक के सुपुर्द करने का आदेश दिया।
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अदालत ने निर्देश दिया कि आवेदक वाहन को बिना पुलिस या अदालत की अनुमति के बेच, हस्तांतरित या उसमें किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकेगा। जरूरत पड़ने पर वाहन को पुलिस या अदालत के सामने पेश करना होगा। वाहन की तस्वीरें लेने और उसके जरूरी दस्तावेज पुलिस के पास रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने वाहन मालिक या उसके प्रतिनिधि को 15 मवेशियों की 29 जुलाई से 8 अगस्त तक 11 दिनों की देखभाल के लिए 43,725 रुपये जमा कराने का निर्देश दिया है। आदेश के अनुसार यह राशि 265 रुपये प्रति मवेशी प्रतिदिन के हिसाब से तय की गई है। इसके अलावा 8 अगस्त 2026 के बाद मवेशियों की देखभाल और इलाज पर होने वाले खर्च के भुगतान के लिए वाहन या मवेशियों के मालिक को अदालत के समक्ष बांड पत्र भी देना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित राशि जमा होने की पुष्टि के बाद ही थाना रैहम्बल वाहन को रिलीज करेगा। अदालत ने आवेदन का निस्तारण निर्धारित शर्तों के साथ कर दिया।
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पुलिस रिपोर्ट के अनुसार वाहन को 29 जुलाई 2026 को जब्त किया गया था। वाहन में 15 मवेशी ले जाए जा रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार मवेशियों को ले जाने के लिए पर्याप्त जगह, हवा, भोजन और पानी की व्यवस्था नहीं थी। पुलिस ने यह भी कहा कि मवेशियों के परिवहन के लिए आवश्यक अनुमति और पशु चिकित्सा प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया था। अभियोजन की ओर से वाहन के पूर्व में दो अन्य मामलों में शामिल होने का भी उल्लेख किया गया।
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वाहन की अंतरिम रिहाई के लिए अदालत में आवेदन दिया गया था। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने विभिन्न न्यायिक निर्णयों का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि जब्त वाहन को लंबे समय तक पुलिस परिसर में रखने से उसके खराब होने और मूल्य में कमी आने की संभावना रहती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए अदालत ने वाहन को कुछ शर्तों के साथ आवेदक के सुपुर्द करने का आदेश दिया।
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अदालत ने निर्देश दिया कि आवेदक वाहन को बिना पुलिस या अदालत की अनुमति के बेच, हस्तांतरित या उसमें किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकेगा। जरूरत पड़ने पर वाहन को पुलिस या अदालत के सामने पेश करना होगा। वाहन की तस्वीरें लेने और उसके जरूरी दस्तावेज पुलिस के पास रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने वाहन मालिक या उसके प्रतिनिधि को 15 मवेशियों की 29 जुलाई से 8 अगस्त तक 11 दिनों की देखभाल के लिए 43,725 रुपये जमा कराने का निर्देश दिया है। आदेश के अनुसार यह राशि 265 रुपये प्रति मवेशी प्रतिदिन के हिसाब से तय की गई है। इसके अलावा 8 अगस्त 2026 के बाद मवेशियों की देखभाल और इलाज पर होने वाले खर्च के भुगतान के लिए वाहन या मवेशियों के मालिक को अदालत के समक्ष बांड पत्र भी देना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित राशि जमा होने की पुष्टि के बाद ही थाना रैहम्बल वाहन को रिलीज करेगा। अदालत ने आवेदन का निस्तारण निर्धारित शर्तों के साथ कर दिया।