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Udhampur News: जीएमसी की जांच में क्रिएटिनिन का स्तर गंभीर, निजी लैब की रिपोर्ट आई सामान्य
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उधमपुर। सरकारी मेडिकल कालेज जीएमसी अस्पताल की लैब रिपोर्ट को लेकर एक मरीज और उसके परिजनों ने गंभीर सवाल उठाए। आरोप लगाया है कि अस्पताल की रिपोर्ट में उसका क्रिएटिनिन स्तर गंभीर रूप से बढ़ा हुआ बताया गया जबकि उसी दिन निजी लैब में कराई गई जांच में रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य आई। रिपोर्ट में सामने आए इस बड़े अंतर के बाद परिजनों ने मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अस्पताल में उपचार के लिए पहुंची सुनाषी शर्मा ने बताया कि कुछ दिन पहले स्कूल में उन्हें अचानक चक्कर आने के बाद उपचार के लिए जीएमसी अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों ने विभिन्न टेस्ट करवाए और बाद में अस्पताल से फोन कर कहा गया कि उनकी रिपोर्ट गंभीर है और तुरंत इलाज शुरू कराना होगा। सुनाषी शर्मा के अनुसार उन्हें रिपोर्ट पर संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने एक निजी लैब में दोबारा जांच करवाई तो वहां रिपोर्ट सामान्य आई। परिजनों का आरोप है कि दोनों रिपोर्टों में इतना बड़ा अंतर बेहद चिंताजनक है। उनका कहना है कि यदि उन्होंने दोबारा जांच नहीं करवाई होती तो गलत रिपोर्ट के आधार पर अनावश्यक और गलत इलाज शुरू हो सकता था।
परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाए कि रिपोर्ट में इतना बड़ा अंतर क्यों आया। यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
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कोट
तकनीकी समस्या के कारण मरीज की रिपोर्ट गलत आई थी और तकनीशियन से रिपोर्ट में मार्किंग करने में गलती हो गई थी। इसके कारण मरीज को गलत रिपोर्ट जारी हो गई। स्पष्ट करते हुए कहा कि अस्पताल की ओर से मरीज को इलाज के लिए नहीं बुलाया गया था।
- डाॅ. संजीव गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमसी
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अस्पताल में उपचार के लिए पहुंची सुनाषी शर्मा ने बताया कि कुछ दिन पहले स्कूल में उन्हें अचानक चक्कर आने के बाद उपचार के लिए जीएमसी अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों ने विभिन्न टेस्ट करवाए और बाद में अस्पताल से फोन कर कहा गया कि उनकी रिपोर्ट गंभीर है और तुरंत इलाज शुरू कराना होगा। सुनाषी शर्मा के अनुसार उन्हें रिपोर्ट पर संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने एक निजी लैब में दोबारा जांच करवाई तो वहां रिपोर्ट सामान्य आई। परिजनों का आरोप है कि दोनों रिपोर्टों में इतना बड़ा अंतर बेहद चिंताजनक है। उनका कहना है कि यदि उन्होंने दोबारा जांच नहीं करवाई होती तो गलत रिपोर्ट के आधार पर अनावश्यक और गलत इलाज शुरू हो सकता था।
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परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाए कि रिपोर्ट में इतना बड़ा अंतर क्यों आया। यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
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तकनीकी समस्या के कारण मरीज की रिपोर्ट गलत आई थी और तकनीशियन से रिपोर्ट में मार्किंग करने में गलती हो गई थी। इसके कारण मरीज को गलत रिपोर्ट जारी हो गई। स्पष्ट करते हुए कहा कि अस्पताल की ओर से मरीज को इलाज के लिए नहीं बुलाया गया था।
- डाॅ. संजीव गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमसी