{"_id":"69bb0fffa38efeeef601fd84","slug":"leporsy-awareness-udhampur-news-c-202-1-udh1011-133772-2026-03-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udhampur News: समय पर पहचान से संभव है कुष्ठ रोग का पूर्ण इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udhampur News: समय पर पहचान से संभव है कुष्ठ रोग का पूर्ण इलाज
विज्ञापन
विज्ञापन
उधमपुर। समय पर पहचान से कुष्ठ रोग का पूर्ण इलाज संभव है। कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के प्रति भ्रांतियों को दूर करने और इलाज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार माइकोबैक्टीरियम लेप्रे से होने वाली यह बीमारी का शुरुआती अवस्था में ही इलाज शुरू हो जाए तो स्थायी विकलांगता से बचा जा सकता है। शुरुआती लक्षणों जैसे त्वचा पर धब्बे, नसों का मोटा होना या मांसपेशियों में कमजोरी आदि हैं।
वरिष्ठ कुष्ठ रोग विशेषज्ञ डॉ. महिंद्र कुमार ने बताया कि कुष्ठ रोग दो प्रकार के होते हैं पासीबैसिलरी (6 माह का इलाज) और मल्टीबैसिलरी (12 माह का इलाज)। सरकार मल्टी ड्रग थेरेपी (एसडीटी) के माध्यम से मुफ्त दवाइयां उपलब्ध करा रही है। साथ ही मरीजों को सर्जरी के लिए 12 हजार रुपये की वित्तीय सहायता भी दी जाती है।
सरकार का लक्ष्य 2027 तक देश को कुष्ठ रोग मुक्त बनाना है। इसके तहत आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर संभावित मरीजों की पहचान कर रही हैं। बच्चों में संक्रमण रोकने के लिए बीसीजी और रिफैम्पिसिन टीकाकरण जैसे सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। 2025 में उधमपुर जिले में कुष्ठ रोग का केवल एक मरीज पंजीकृत हुआ है।
सामाजिक भेदभाव बड़ी बाधा
डॉ. कुमार ने स्पष्ट किया कि कुष्ठ रोग छूने से नहीं फैलता बल्कि लंबे समय तक संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने के संपर्क में रहने से होता है। समाज में मरीजों के साथ होने वाला भेदभाव इलाज में बड़ी बाधा है। हर साल 30 जनवरी से 13 फरवरी तक चलने वाले स्पर्श जागरूकता अभियान के जरिए लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
Trending Videos
वरिष्ठ कुष्ठ रोग विशेषज्ञ डॉ. महिंद्र कुमार ने बताया कि कुष्ठ रोग दो प्रकार के होते हैं पासीबैसिलरी (6 माह का इलाज) और मल्टीबैसिलरी (12 माह का इलाज)। सरकार मल्टी ड्रग थेरेपी (एसडीटी) के माध्यम से मुफ्त दवाइयां उपलब्ध करा रही है। साथ ही मरीजों को सर्जरी के लिए 12 हजार रुपये की वित्तीय सहायता भी दी जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सरकार का लक्ष्य 2027 तक देश को कुष्ठ रोग मुक्त बनाना है। इसके तहत आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर संभावित मरीजों की पहचान कर रही हैं। बच्चों में संक्रमण रोकने के लिए बीसीजी और रिफैम्पिसिन टीकाकरण जैसे सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। 2025 में उधमपुर जिले में कुष्ठ रोग का केवल एक मरीज पंजीकृत हुआ है।
सामाजिक भेदभाव बड़ी बाधा
डॉ. कुमार ने स्पष्ट किया कि कुष्ठ रोग छूने से नहीं फैलता बल्कि लंबे समय तक संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने के संपर्क में रहने से होता है। समाज में मरीजों के साथ होने वाला भेदभाव इलाज में बड़ी बाधा है। हर साल 30 जनवरी से 13 फरवरी तक चलने वाले स्पर्श जागरूकता अभियान के जरिए लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक किया जा रहा है।