Jammu: अमर महल म्यूजियम में अब जीवंत होंगी डोगरा राजवंश की महारानियों की कहानियां, जुड़ा नया अध्याय
अमर महल म्यूजियम जम्मू में अब डोगरा राजवंश की महारानियों की जीवनशैली और योगदान को दर्शाने के लिए विशेष कक्ष जोड़ा गया है, जहां उनकी कहानियां देखी और सुनी जा सकेंगी।
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अमर महल म्यूजियम में अब डोगरा राजवंश की महारानियों की कहानियां भी देख-सुन सकेंगे। कभी जम्मू-कश्मीर के महाराजाओं का निवास रहे इस म्यूजियम में अब डोगरा राजपरिवार की महारानियों के लिए अलग से कक्ष जोड़ा गया है। इसमें उनकी जीवनशैली, कलाओं के साथ ही उनके कृतित्व के बारे में प्रदर्शनी लगाई गई है। अमर महल का वास्तु फ्रांसीसी वास्तुकार करीब 164 साल पहले 1862 में डिजाइन किया था। 1890 के दशक में राजा अमर सिंह के शाही निवास के रूप में इसका निर्माण किया गया।
यह डोगरा राजाओं का अंतिम आधिकारिक निवास रहा। महारानी तारा देवी 1967 में निधन हो जाने तक यहीं रहीं। इसके बाद उनके पुत्र डॉ. करण सिंह और उनकी पत्नी ने यूरोपीय शैली के इस महल को क्षेत्र की दुर्लभ कला, साहित्य और डोगरा इतिहास को संरक्षित करने के लिए एक म्यूजियम और लाइब्रेरी में तब्दील कर दिया। 13 अप्रैल, 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसका उद्घाटन किया। इस वक्त हरि-तारा चैरिटेबल ट्रस्ट इसका प्रबंधन कर रहा है। 120 किलोग्राम शुद्ध सोने का सिंहासन इसका खास आकर्षण है। इसके अतिरिक्त पहाड़ी लघुचित्र, कांगड़ा लघुचित्र, 25 हजार से अधिक प्राचीन पुस्तकों और कई कलाकृतियों का संग्रह इस म्यूजियम में मौजूद है।
चंडीगढ़ और मध्य प्रदेश के कारीगरों ने किया नवीकरण
तवी किनारे स्थित अमर महल म्यूजियम की दीवारों पर ब्लैक फंगस जम गया था। लाखों की लागत से इसका नवीकरण किया गया है। स्थानीय कारीगरों के साथ ही चंडीगढ़ और मध्य प्रदेश के कारीगरों ने नवीकरण को अंजाम दिया है।
पिछले छह माह में बढ़ी स्थानीय दर्शकों की संख्या
जम्मू घूमने आने वाले दर्शकों की अच्छी-खासी संख्या अमर महल म्यूजियम देखने आती है लेकिन पिछले छह माह में स्थानीय दर्शकों की संख्या बढ़ी है। प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारी बताते हैं कि इस म्यूजियम का स्ट्रक्चर अपने आप में दर्शनीय है।
लोग समृद्ध डोगरा विरासत के बारे में जानें
अमर महल म्यूजियम को समृद्ध करने के लिए लगातार इसमें कुछ नई पेंटिंग, किताबें और अन्य धरोहरों को जोड़ने का सिलसिला जारी है। हम चाहते हैं कि सभी लोग समृद्ध डोगरा विरासत के बारे में जानें। -राजकुमार मार्तंड सिंह, हरि-तारा ट्रस्ट
ताड़ पर लिखे स्कंद पुराण, पर्सियन महाभारत के साथ ही दुर्लभ कलाकृतियों का नजारा
धरोहर व विरासत की अनोखी दुनिया आज आपका इंतजार करेगी। अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर डोगरा आर्ट म्यूजियम जम्मू और एसपीएस म्यूजियम श्रीनगर में दुर्लभ कलाकृतियों व पांडुलिपियों की प्रदर्शनी लगने जा रही है। म्यूजियम सुबह दस से शाम 4 बजे तक खुलेगा। इसमें प्रवेश मुफ्त रहेगा।
डोगरा आर्ट म्यूजियम में लगने वाली प्रदर्शनी में ताड़ के पत्ते पर लिखा गया स्कंद पुराण, अंबारा अखनूर से मिली टेराकोटा की मानव संरचना, विशेष डाक टिकट संग्रह, पुराने करेंसी नोट, बशोहली पेंटिंग आकर्षण का केंद्र रहेंगे। वहीं, श्रीनगर के एसपीएस म्यूजियम में पंच मार्क सिक्के, कुषाण कालीन सोने के सिक्के, गिलगिट पांडुलिपि, सुदामा सीरीज की पेंटिंग, टेराकोटा के अभिलेख, कांस्य पर उभरी बोधिसत्व की कहानी, अफगान सिख और डोगरा काल के शॉल, पर्सियन में लिखी महाभारत और श्रीनगर का कढ़ा हुआ नक्शा दर्शकों के लिए प्रदर्शन को रखा जाएगा।
म्यूजियम में तोशाखाना से लाए हथियारों व महाराजाओं के नित्य प्रति की इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को भी रखा गया है। कोशिश यही है कि यहां आने वाले दर्शक अपनी विरासत और धरोहरों से रूबरू हो सकें। -डॉ. संगीता शर्मा, डायरेक्टर, म्यूजियम एंड आर्काइव्स