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जम्मू में दिखा नया ट्रेंड: मोदी की ईंधन बचाओ अपील का असर, आरएस पुरा में बढ़ी तांगा सवारी की लोकप्रियता

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Mon, 18 May 2026 11:53 AM IST
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सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील के बाद जम्मू के आर एस पुरा बॉर्डर क्षेत्र में पारंपरिक तांगों की लोकप्रियता फिर बढ़ने लगी है। स्थानीय लोग और पर्यटक इसे पर्यावरण-अनुकूल, सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा और ईंधन बचाने वाला बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
 

Traditional 'tongas gather popularity in Jammu border belt amid PM's appeal to save fuel
Petrol Pump - फोटो : AdobeStock
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विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील का असर अब जम्मू के सीमावर्ती इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। आरएस पुरा सेक्टर में पारंपरिक घोड़ा-गाड़ी यानी तांगों की लोकप्रियता एक बार फिर बढ़ रही है। स्थानीय लोग और पर्यटक अब छोटे सफर के लिए इन पर्यावरण-अनुकूल टांगों का इस्तेमाल कर रहे हैं।



आजादी से पहले जम्मू और सियालकोट के बीच लोगों की आवाजाही का प्रमुख साधन रहे टांगे पिछले कई दशकों से सीमावर्ती गांवों में किसी तरह अपनी पहचान बनाए हुए थे। हालांकि आधुनिक वाहनों के बढ़ते चलन के कारण इनका उपयोग कम हो गया था लेकिन अब ईंधन संरक्षण के संदेश के बाद लोगों का रुझान फिर से इनकी ओर बढ़ने लगा है।
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पारंपरिक तांगा चालक तेजा सिंह ने बताया कि वे कई वर्षों से इस काम से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि पहले लोग सियालकोट से जम्मू तक तांगों में सफर करते थे, लेकिन समय के साथ यह परंपरा कमजोर पड़ गई। अब प्रधानमंत्री की अपील के बाद गांवों में छोटी दूरी तय करने के लिए लोग फिर से टांगों का इस्तेमाल करने लगे हैं। उन्होंने बताया कि इस परंपरा को जीवित रखने के लिए हर शनिवार और रविवार को तांगा चालक एकत्रित होते हैं।
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एक अन्य तांगा चालक रतन सिंह ने कहा कि देशभर में ईंधन बचाने पर जोर दिए जाने के कारण लोगों ने दोबारा टांगों को अपनाना शुरू किया है। उन्होंने कहा कि जीरो लाइन से आरएस पुरा तक लोग टांगों से सफर कर रहे हैं क्योंकि इसमें पेट्रोल या डीजल की जरूरत नहीं पड़ती।

सीमावर्ती क्षेत्र घूमने आए पर्यटकों ने भी इस पहल की सराहना की। पर्यटकों के एक समूह ने कहा कि तांगा सवारी न केवल ईंधन बचाने में मदद करती है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण जीवनशैली की झलक भी दिखाती है। पर्यटक राही ने कहा कि ऐसे पारंपरिक साधनों को पर्यटन और सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ावा दिया जाना चाहिए क्योंकि यह पर्यावरण के लिए बेहतर होने के साथ-साथ हमारी संस्कृति को भी जीवित रखते हैं।

पर्यटकों ने कहा कि तांगा की सवारी लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती है और इंसान तथा पशुओं के बीच पुराने रिश्ते की याद दिलाती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

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