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रांची एयरपोर्ट से उड़ान और जंगल में अंत: चतरा हादसे की भयावह कहानी, दिल्ली तक नहीं पहुंच पाई सात जिंदगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 24 Feb 2026 10:53 AM IST
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सार

Jharkhand Air Ambulance Crash:  झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया के पास सोमवार शाम एक एयर एम्बुलेंस क्रैश हो गया। इसमें विमान में सवार सभी सात लोग मारे गए।  सभी मृतकों का चतरा अस्पताल में पोस्टमॉर्टम कराया गया है।

All occupants died in air ambulance crash post-mortem conducted at Chatra Hospital
हादसे के बाद बिखरा विमान का मलबा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया के पास एक एयर एम्बुलेंस के क्रैश होने से उस पर सवार सभी सात लोग मारे गए। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि सभी मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल लाए गए हैं। बता दें कि रेडबर्ड एयरवेज प्रा. लि. द्वारा संचालित बीचक्राफ्ट C90 एयर एम्बुलेंस रांची से दिल्ली जा रही थी, जो सोमवार शाम सिमरिया के जंगलों में क्रैश हो गई। इस दर्दनाक हादसे में दो पायलट समेत सभी सात लोगों की मौत हो गई।

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20 मिनट बाद विमान का टूट गया था संपर्क
घटना के बारे में जानकारी  देते हुए रांची एयरपोर्ट के निदेशक विनोद कुमार ने बताया कि सभी सात शवों को चतरा के सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए लाया गया है। दुर्घटना की जांच की जा रही है। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने बताया कि विमान रांची एयरपोर्ट से शाम 7.11 बजे उड़ा और लगभग 20 मिनट की उड़ान के बाद 7.30 बजे एयर ट्रैफिक कंट्रोल से उसका संपर्क टूट गया। रांची एयरपोर्ट के निदेशक विनोद कुमार ने कहा कि खराब मौसम इस दुर्घटना का एक संभावित कारण हो सकता है, हालांकि विस्तृत जांच के बाद ही सही कारण स्पष्ट होगा।
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चतरा अस्पताल में हुआ पोस्टमार्टम
चतरा के उपायुक्त कीरतीश्री जी बताया कि सभी सात मृतकों के शव क्रैश स्थल से बरामद कर चतरा अस्पताल लाया गया है। जहां उनका पोस्टमार्टम किया गया।
 



डीजीसीए का बयान
वहीं, सिविल एविएशन महानिदेशालय (DGCA) ने अपने बयान में कहा कि बीचक्राफ्ट C90 विमान (VT-AJV) रांची-Delhi मार्ग पर मेडिकल इवैक्यूएशन फ्लाइट ऑपरेट कर रहा था, जब यह चतरा जिले के कासरिया पंचायत में क्रैश हो गया। बयान में कहा गया कि विमान 19:11 IST पर रांची से उड़ान भर चुका था। 19:34 IST पर कोलकाता से संपर्क स्थापित किया गया, लेकिन लगभग 100 नौटिकल मील दक्षिण-पूर्व वाराणसी में विमान का संपर्क और राडार से संपर्क टूट गया। इसमें सात लोग सवार थे, जिनमें दो क्रू सदस्य भी शामिल थे। क्रैश स्थल पर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की टीम भेजी गई है। DGCA की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली स्थित नॉन-शेड्यूल ऑपरेटर रेडबर्ड के बेड़े में छह विमान हैं, जिनमें से एक दुर्घटना में खतरनाक स्थिति में था।

रांची अस्पताल से  4.30 बजे रवाना हुए थे सभी लोग
रांची के देवकमल अस्पताल के सीईओ अनंत सिन्हा ने बताया कि एयर एम्बुलेंस उनके एक मरीज के लिए आयोजित की गई थी। 'मरीज संजय कुमार, जो लेटहार जिले के चांदवा निवासी थे, 16 फरवरी को 65% जलन की चोटों के साथ अस्पताल लाए गए थे। उन्हें अस्पताल में इलाज मिल रहा था। परिवार ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली ले जाने का निर्णय लिया। इसके बाद सोमवार को एयर एम्बुलेंस का प्रबंध किया। मरीज लगभग 4.30 बजे अस्पताल से दिल्ली के लिए रवाना हुआ। 

'मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा'
वहीं, इस घटना पर शोक जताते हुए झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य सरकार इस बात की जांच करेगी कि खराब मौसम में विमान को उड़ान की अनुमति कैसे दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इस हादसे को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अप्रिय मौसम एक संभावित कारण हो सकता है, जिसे जांच के बाद स्पष्ट किया जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह इस घटना से गहरी दुखी हैं।

मृतक की पहचान
इस दर्दनाक हादसे में मारे गए व्यक्तियों की पहचान कर ली गई है। मरने वालों में विमान के कैप्टन विवेक विकास भगत, कप्तान सवराजदीप सिंह, संजय कुमार, डॉ. विकास कुमार गुप्ता, सचिन कुमार मिश्रा, अर्चना देवी और धुरु कुमार का नाम शामि है।

 'बेटे के सपने के लिए बेच दी थी सारी जमीन'
डॉ. विकास कुमार गुप्ता के पिता बजरंगी प्रसाद ने कहा कि उन्होंने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपनी सारी जमीन बेच दी थी। मृत डॉक्टर का सात साल का बेटा है। पिता ने अपने बेटे के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि डॉक्टर मेधावी थे और ओडिशा के कटक से एमबीबीएस पूरा किया था। प्रसाद बिहार के औरंगाबाद जिले के निवासी हैं।

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मृतक के परिजनों ने क्या कहा? 
वहीं, हादसे में जान गंवाने वाले संजय कुमार (41) के परिवार के सदस्यों ने हादसे के पीछे खराब स्वास्थ्य व्यवस्था को दोषी ठहराया। मृतक के चाचा ने कहा कि अगर रांची में मेरे भतीजे संजय का उचित इलाज किया गया होता, तो कीमती जानें बच सकती थीं। इस घटना में मैंने संजय और मेरी बहन अर्चना देवी दोनों को खो दिया। 

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