Jharkhand: बाबा बैद्यनाथ धाम तैयार... अब कांवरियों की बारी! AI, ड्रोन और नो-VIP सिस्टम की होगी असली टेस्टिंग
देवघर में राजकीय श्रावणी मेला-2026 का विधिवत शुभारंभ हो गया है। इस बार मेले में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए AI आधारित निगरानी, फेस रिकॉग्निशन कैमरे, ANPR सिस्टम, हेड काउंट कैमरे और QR Code आधारित शिकायत प्रणाली लागू की गई है।
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झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में आस्था के सबसे बड़े महापर्व राजकीय श्रावणी मेला-2026 का बुधवार को विधिवत शुभारंभ हो गया। झारखंड सीमा स्थित दुम्मा कांवरिया पथ पर वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ मेले का उद्घाटन किया गया। अब अगले एक महीने तक लाखों-करोड़ों श्रद्धालु जलार्पण के लिए बाबाधाम पहुंचेंगे। ऐसे में सरकार और प्रशासन की हाईटेक तैयारियां भी परीक्षा के दौर से गुजरेंगी।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ मेले का उद्घाटन
राजकीय श्रावणी मेला-2026 का शुभारंभ झारखंड सीमा स्थित दुम्मा कांवरिया पथ पर 11 वैदिक पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ किया। उद्घाटन समारोह में मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
अब शुरू होगी प्रशासन की असली परीक्षा
मेले का उद्घाटन होने के साथ ही अब प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शुरू हो गई है। अगले एक महीने तक देश के अलग-अलग राज्यों से लाखों-करोड़ों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ पर जल चढ़ाने के लिए देवघर पहुंचेंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार की आधुनिक और हाईटेक तैयारियां जमीन पर कितनी सफल साबित होती हैं।
AI से होगी पूरे मेले की निगरानी
इस बार श्रावणी मेले की व्यवस्था में आधुनिक तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया गया है। पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि पूरे मेला क्षेत्र में AI आधारित निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। फेस रिकॉग्निशन कैमरे, ANPR सिस्टम, हेड काउंट कैमरे और डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए पूरे मेले पर लगातार नजर रखी जाएगी। सरकार का दावा है कि किसी भी असामान्य स्थिति की पहचान पहले की तुलना में अधिक तेजी से हो सकेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी। हालांकि इन तकनीकों की असली परीक्षा तब होगी, जब कांवरियों की भारी भीड़ बाबाधाम पहुंचेगी। अब यह देखना होगा कि AI और हाईटेक कैमरे भीड़ के सबसे ज्यादा दबाव के दौरान भी उतने ही प्रभावी साबित होते हैं या नहीं।
QR Code से दर्ज होगी शिकायत, 15 मिनट में समाधान का दावा
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस बार QR Code आधारित डिजिटल शिकायत प्रणाली भी शुरू की गई है। पेयजल, सफाई, बिजली, स्वास्थ्य या अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी शिकायत श्रद्धालु QR Code स्कैन कर फोटो के साथ दर्ज करा सकेंगे।प्रशासन का दावा है कि शिकायत मिलने के 15 मिनट के भीतर उसका समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। व्यवस्था सुनने में प्रभावी है, लेकिन भीड़ बढ़ने के साथ यह प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती भी होगी। अगर हजारों शिकायतों के बीच भी 15 मिनट में समाधान हो जाता है तो यह श्रावणी मेले की बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। वहीं, यदि शिकायतों के निस्तारण में देरी हुई तो प्रशासन के दावों पर सवाल उठना तय है।
VIP और VVIP दर्शन पर पूरी तरह रोक
इस बार प्रशासन ने VIP, VVIP और आउट ऑफ टर्न दर्शन की व्यवस्था पूरी तरह खत्म करने का फैसला लिया है। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार पूरे मेले के दौरान किसी भी श्रद्धालु को विशेष दर्शन की सुविधा नहीं दी जाएगी। यह फैसला आम श्रद्धालुओं के लिए समान व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। हालांकि अब यह देखना होगा कि पूरे मेले के दौरान इस नियम का कितनी सख्ती से पालन किया जाता है।
'हर कांवरिया देवतुल्य है'
पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि श्रावण मास में देवघर आने वाला हर कांवरिया देवतुल्य है और उसकी सेवा करना भगवान शिव की सेवा के समान है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल मेला आयोजित करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है कि वे सुखद अनुभव लेकर अपने घर लौटें।
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भी कहा कि देवघर बाबा के भक्तों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने अधिकारियों, स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों से मिलकर काम करने की अपील की, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिल सके।
आस्था के साथ आधुनिक अनुभव का भी मिलेगा संगम
इस बार श्रद्धालुओं के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए शिवलोक परिसर में विशेष प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और ड्रोन शो का भी आयोजन किया जाएगा। यानी बाबा बैद्यनाथ धाम में धार्मिक आस्था के साथ आधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक प्रस्तुति का भी अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
30 जुलाई से शुरू होगी असली चुनौती
उद्घाटन के साथ ही तैयारियों का दौर पूरा हो चुका है और अब परीक्षा की घड़ी शुरू होने वाली है। 30 जुलाई से जब कांवरियों का विशाल सैलाब बाबाधाम की ओर बढ़ेगा, तब यह साफ होगा कि AI आधारित निगरानी, डिजिटल शिकायत प्रणाली, VIP दर्शन पर रोक और प्रशासन की अन्य व्यवस्थाएं वास्तव में कितनी प्रभावी साबित होती हैं।