Jharkhand News: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने लौटाई पूरी सुरक्षा, DGP से नाराजगी की चर्चा तेज
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार में वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता राधाकृष्ण किशोर ने अपनी सुरक्षा में तैनात सभी सुरक्षा कर्मियों और एस्कॉर्ट को वापस कर दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने यह फैसला डीजीपी के रवैये से नाराज होकर लिया।
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झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार में वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता राधाकृष्ण किशोर की नाराजगी अब खुलकर सामने आ गई है। उन्होंने अपनी सुरक्षा में तैनात सभी सुरक्षा कर्मियों और एस्कॉर्ट को वापस कर दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने यह कदम झारखंड के डीजीपी के रवैये से असंतुष्ट होकर उठाया है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और इसे महागठबंधन के भीतर चल रही असहजता से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
अतिरिक्त वाहन नहीं मिलने पर बढ़ी नाराजगी
सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्री ने अपने कारकेड के लिए एक अतिरिक्त वाहन उपलब्ध कराने का अनुरोध डीजीपी से किया था। आरोप है कि इस मांग पर पुलिस मुख्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। इससे नाराज होकर उन्होंने अपनी सुरक्षा में तैनात सभी गार्ड और एस्कॉर्ट वापस करने का फैसला लिया।
बताया जा रहा है कि इस संबंध में उन्होंने डीजीपी को एक पत्र भी भेजा है, जिसमें अपनी नाराजगी दर्ज कराई है।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा
वित्त मंत्री के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हाल ही में राज्यसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन के भीतर मतभेद की खबरें भी सामने आई थीं। ऐसे में राधाकृष्ण किशोर की नाराजगी को गठबंधन के भीतर बढ़ती असहजता से जोड़कर देखा जा रहा है।
पहले भी कई मुद्दों पर जता चुके हैं नाराजगी
गौरतलब है कि इससे पहले भी राधाकृष्ण किशोर अनुसूचित जाति राज्य आयोग के गठन में देरी सहित कई अन्य मुद्दों पर सरकार को पत्र लिख चुके हैं। इससे साफ है कि यह पहला मौका नहीं है, जब उन्होंने किसी प्रशासनिक या सरकारी विषय पर अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से जताई हो।
सरकार और पुलिस मुख्यालय की प्रतिक्रिया पर नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मामला केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी हो सकते हैं। अब सबकी नजर राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय की अगली कार्रवाई पर है कि वित्त मंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे क्या फैसला लिया जाता है। हालांकि, वित्त मंत्री के इस फैसले के बाद अब तक किसी भी राजनीतिक दल या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।