Jharkhand: झारखंड की मौत की घाटी का डर! आखिर चुट्टूपालू में बार-बार क्यों होती हैं दर्दनाक सड़क दुर्घटनाएं?
झारखंड के रामगढ़ जिले की चुट्टूपालू घाटी में हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद एक बार फिर इस मार्ग की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। मुहर्रम जुलूस से लौट रही ताशा पार्टी की पिकअप और ट्रक की टक्कर में सात लोगों की मौत हो गई।
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झारखंड के रामगढ़ जिले की चुट्टूपालू घाटी एक बार फिर दर्दनाक सड़क हादसे की वजह से चर्चा में है। मुहर्रम जुलूस से लौट रही ताशा पार्टी की पिकअप वैन और ट्रक की टक्कर में सात लोगों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इस घाटी में बार-बार सड़क हादसे क्यों होते हैं।
35 किलोमीटर दूर है हादसों की यह घाटी
झारखंड में कई सड़कें पहाड़ों और घने जंगलों के बीच से होकर गुजरती हैं। प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर ये रास्ते कई बार जानलेवा भी साबित होते हैं। राजधानी रांची से करीब 35 किलोमीटर दूर रामगढ़ जिले की चुट्टूपालू घाटी (बारलोंग) ऐसी ही एक जगह है, जहां आए दिन सड़क हादसे होते रहते हैं।
ट्रक और पिकअप की टक्कर में सात लोगों की मौत
बीते गुरुवार की रात इसी घाटी में भीषण हादसा हुआ। मुहर्रम जुलूस से लौट रही ताशा पार्टी की पिकअप वैन सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई। घटनास्थल पर बिखरे ढोल, खून से सने कपड़े और लोगों की चीख-पुकार देर रात तक दर्दनाक मंजर की गवाही देते रहे।
तीखे मोड़ और ढलान बनते हैं हादसों की वजह
चुट्टूपालू घाटी का यह हिस्सा तीखे मोड़ों, खड़ी ढलान और सीमित दृश्यता के कारण पहले से ही दुर्घटना संभावित माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खासकर रात के समय कई वाहन चालक यहां नियंत्रण खो बैठते हैं, जिससे हादसे हो जाते हैं।
घाटी से जुड़ी हैं कई रहस्यमयी मान्यताएं
इस इलाके को लेकर कई लोककथाएं और रहस्यमयी मान्यताएं भी प्रचलित हैं। स्थानीय निवासी मनोज कुमार झा, दीपक महतो और मार्गी तिर्की का कहना है कि कई वाहन चालकों ने दावा किया है कि इस रास्ते से गुजरते समय उन्हें ऐसा महसूस हुआ, जैसे कोई अदृश्य शक्ति वाहन को अपनी ओर खींच रही हो।
श्मशान और भटकती आत्माओं की भी होती है चर्चा
स्थानीय लोग पास में मौजूद श्मशान घाट और दो भटकती आत्माओं की कहानियों का भी जिक्र करते हैं। इन मान्यताओं के कारण कई लोग रात के समय इस मार्ग से सफर करने से बचते हैं।
विशेषज्ञों ने बताए हादसों के असली कारण
हालांकि इन दावों की कोई वैज्ञानिक या आधिकारिक पुष्टि नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क की भौगोलिक बनावट, तीखे मोड़, तेज रफ्तार, भारी वाहनों की आवाजाही, चालक की थकान और रात में कम दृश्यता जैसी वजहें इन हादसों के लिए ज्यादा जिम्मेदार हैं।
दनुवा घाटी भी बनी हुई है हादसों का केंद्र
ऐसी ही स्थिति हजारीबाग की दनुवा घाटी में भी देखने को मिलती है। लगातार हो रहे सड़क हादसों के कारण स्थानीय लोग इसे "मौत की घाटी" तक कहने लगे हैं।
स्थानीय लोगों ने की सुरक्षा बढ़ाने की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन संवेदनशील मार्गों पर बेहतर प्रकाश व्यवस्था, चेतावनी संकेत, स्पीड कंट्रोल, क्रैश बैरियर और नियमित पुलिस गश्त जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं बढ़ाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि इससे भविष्य में इस तरह के दर्दनाक सड़क हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।