Jharkhand: खनिज विधेयक पर झारखंड में सियासी संग्राम, महागठबंधन बोला- राज्यों के अधिकारों से नहीं होगा समझौता
केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के विरोध में रांची स्थित प्रदेश राजद कार्यालय में महागठबंधन ने संयुक्त प्रेस वार्ता की। नेताओं ने विधेयक को राज्यों के संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों पर हमला बताते हुए इसका विरोध किया।
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केंद्र सरकार द्वारा पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के विरोध में रांची स्थित प्रदेश राजद कार्यालय में महागठबंधन की संयुक्त प्रेस वार्ता हुई। महागठबंधन नेताओं ने विधेयक को राज्यों के संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों पर हमला बताते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल झारखंड के अधिकारों की नहीं, बल्कि देश के संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों की रक्षा की भी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर केंद्र पर साधा निशाना
महागठबंधन नेताओं ने कहा कि वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया था कि संविधान के तहत राज्यों को खनिज अधिकारों और खनिज वाली भूमि पर कर एवं उपकर लगाने की संवैधानिक शक्ति प्राप्त है। नेताओं का आरोप है कि अब केंद्र सरकार संशोधन विधेयक के जरिए राज्यों की इसी संवैधानिक शक्ति को सीमित करने का प्रयास कर रही है, जो संघीय व्यवस्था की भावना के विपरीत है।
खनिज राजस्व पर राज्य की जनता का अधिकार: महागठबंधन
नेताओं ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां के प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त राजस्व पर राज्य की जनता का अधिकार है। इस राजस्व का उपयोग गरीबों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और वंचित वर्गों के कल्याण के साथ-साथ राज्य के विकास में किया जाता है। महागठबंधन नेताओं ने कहा कि राज्य के राजस्व स्रोतों को कमजोर करने से मंईयां सम्मान योजना समेत विभिन्न सामाजिक और जनकल्याणकारी योजनाओं पर सीधा असर पड़ सकता है।
‘सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप राज्यों के अधिकारों का सम्मान करे केंद्र’
राजद उपाध्यक्ष अनीता यादव ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा राज्य की जनता की संपदा है। उन्होंने केंद्र सरकार से राज्यों के अधिकारों में कटौती करने के बजाय सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप राज्यों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करने की मांग की। सीपीआई नेता अजय कुमार ने कहा कि इस मुद्दे पर विपक्षी दल एकजुट हैं। उन्होंने बताया कि 22 अगस्त को इंडिया गठबंधन की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें विधेयक के खिलाफ आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि महागठबंधन इस लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाएगा।
‘राज्यों के अधिकार सीमित करने का प्रयास स्वीकार नहीं’
युवा राजद प्रदेश अध्यक्ष रंजन कुमार यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले ने राज्यों के खनिज संबंधी अधिकारों को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कानून के जरिए राज्यों के अधिकारों को सीमित करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। भाकपा माले नेता शुभेंदु सेन ने कहा कि यह केवल झारखंड का नहीं, बल्कि पूरे देश के संघीय ढांचे की रक्षा का सवाल है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर राज्यों के अधिकार को कमजोर करना संविधान की मूल भावना के विपरीत है।
जनकल्याणकारी योजनाओं पर असर पड़ने की जताई आशंका
भाकपा माले नेता अनंत प्रसाद गुप्ता ने कहा कि झारखंड के खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व का उपयोग गरीबों, मजदूरों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के हित में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य के राजस्व स्रोतों को कमजोर करने का सीधा असर जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ सकता है।
राष्ट्रपति के नाम राज्यपाल को सौंपेंगे ज्ञापन
महागठबंधन नेताओं ने निर्णय लिया कि राष्ट्रपति के नाम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर खान एवं खनिज संशोधन विधेयक, 2026 को रद्द करने की मांग की जाएगी। नेताओं ने कहा कि झारखंड के संवैधानिक, आर्थिक और वित्तीय अधिकारों की रक्षा के लिए महागठबंधन लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगा।
महागठबंधन नेताओं ने एक स्वर में कहा कि झारखंड की खनिज संपदा झारखंड की जनता की संपदा है और राज्य के संवैधानिक अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। प्रेस वार्ता में राजद प्रदेश महासचिव मनोज पाण्डेय, युवा राजद प्रदेश उपाध्यक्ष क्षितिज मिश्रा, युवा राजद प्रदेश उपाध्यक्ष मंतोष यादव, सीपीआई नेत्री किरण कुमारी, राजद जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र महतो, अभिराज राय और राम कुमार यादव मौजूद रहे।