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Jharkhand Politics: महिला आरक्षण पर कांग्रेस का हमला, बोली- सरकार ने शर्तें जोड़कर लागू करने में की देरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Wed, 22 Apr 2026 04:08 PM IST
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सार
Jharkhand News: रांची में कांग्रेस ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर देरी और शर्तें जोड़कर इसे टालने का आरोप लगाया। पार्टी ने 543 लोकसभा सीटों पर तत्काल आरक्षण लागू करने की मांग की और कहा कि इससे 2029 तक संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर बोला हमला
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
झारखंड की राजधानी रांची में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर महिलाओं को भ्रमित करने और उनकी राजनीतिक भागीदारी को सीमित करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि सरकार ने महिला आरक्षण के मुद्दे को गंभीरता से लागू करने के बजाय इसे अन्य प्रक्रियाओं से जोड़कर टालने की कोशिश की है।
सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रितु चौधरी ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि सरकार ने महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव लाने की कोशिश की, जिसे विपक्ष ने अस्वीकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता महिलाओं को सशक्त करना नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरण साधना है।
ओबीसी महिलाओं के अधिकारों को लेकर चिंता
प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी ओबीसी वर्ग की महिलाओं को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण देने से बच रही है। उनके मुताबिक, इससे सामाजिक न्याय की भावना प्रभावित हो रही है और बड़ी संख्या में महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
2023 में पारित हुआ था बिल
कांग्रेस का दावा है कि वर्ष 2023 में विपक्ष के सहयोग से महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ था, लेकिन इसके बावजूद इसे समय पर लागू नहीं किया गया। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि सरकार की नीयत स्पष्ट होती, तो 2024 के आम चुनाव में ही महिलाओं को इसका लाभ मिल सकता था।
परिसीमन और जनगणना की शर्तों पर विवाद
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तों से जोड़कर इसके क्रियान्वयन को अनावश्यक रूप से टाल दिया है। साथ ही, प्रधानमंत्री के हालिया संबोधन को भ्रामक बताते हुए कहा गया कि इसके जरिए विपक्ष की छवि खराब करने का प्रयास किया गया।
ये भी पढ़ें- रांची में गर्मी का डबल अटैक; 42 डिग्री की तपिश में 18 वार्ड प्यासे, पानी को तरसे लोग
543 सीटों पर तुरंत आरक्षण लागू करने की मांग
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि लोकसभा की सभी 543 सीटों पर जल्द से जल्द महिला आरक्षण लागू किया जाए, ताकि वर्ष 2029 तक संसद में महिलाओं की संख्या बढ़कर 181 तक पहुंच सके। प्रेस वार्ता में पार्टी के कई अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे और उन्होंने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट रोडमैप पेश करने की मांग की।
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सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रितु चौधरी ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि सरकार ने महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव लाने की कोशिश की, जिसे विपक्ष ने अस्वीकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता महिलाओं को सशक्त करना नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरण साधना है।
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ओबीसी महिलाओं के अधिकारों को लेकर चिंता
प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी ओबीसी वर्ग की महिलाओं को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण देने से बच रही है। उनके मुताबिक, इससे सामाजिक न्याय की भावना प्रभावित हो रही है और बड़ी संख्या में महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
2023 में पारित हुआ था बिल
कांग्रेस का दावा है कि वर्ष 2023 में विपक्ष के सहयोग से महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ था, लेकिन इसके बावजूद इसे समय पर लागू नहीं किया गया। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि सरकार की नीयत स्पष्ट होती, तो 2024 के आम चुनाव में ही महिलाओं को इसका लाभ मिल सकता था।
परिसीमन और जनगणना की शर्तों पर विवाद
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तों से जोड़कर इसके क्रियान्वयन को अनावश्यक रूप से टाल दिया है। साथ ही, प्रधानमंत्री के हालिया संबोधन को भ्रामक बताते हुए कहा गया कि इसके जरिए विपक्ष की छवि खराब करने का प्रयास किया गया।
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543 सीटों पर तुरंत आरक्षण लागू करने की मांग
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि लोकसभा की सभी 543 सीटों पर जल्द से जल्द महिला आरक्षण लागू किया जाए, ताकि वर्ष 2029 तक संसद में महिलाओं की संख्या बढ़कर 181 तक पहुंच सके। प्रेस वार्ता में पार्टी के कई अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे और उन्होंने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट रोडमैप पेश करने की मांग की।

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