Jharkhand: सरकारी नौकरी मिली, लेकिन स्कूल नहीं... हाजिरी लगाकर लौट रही शिक्षिका की सड़क हादसे में मौत
झारखंड की नव नियुक्त सहायक शिक्षिका सुलेखा महतो की सड़क हादसे में मौत हो गई। उन्हें तीन महीने पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नियुक्ति पत्र मिला था, लेकिन परिजनों के अनुसार अब तक किसी स्कूल में पदस्थापना नहीं हुई थी।
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रांची में एक दर्दनाक घटना ने सभी को झकझोर दिया है। तीन महीने पहले सरकारी शिक्षिका बनीं सुलेखा महतो की सड़क हादसे में मौत हो गई। नियुक्ति मिलने के बाद भी उन्हें किसी स्कूल में पदस्थापित नहीं किया गया था। परिजनों का आरोप है कि वह रोज जिला शिक्षा कार्यालय में हाजिरी लगाने जाती थीं।
मुख्यमंत्री से मिला था नियुक्ति पत्र
पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुवा प्रखंड के भालुरूंगी गांव की रहने वाली सुलेखा महतो को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथों सहायक शिक्षिका के पद का नियुक्ति पत्र मिला था। वर्षों की मेहनत, बी.एड. की पढ़ाई, झारखंड टीईटी परीक्षा में सफलता और चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें सरकारी नौकरी मिली थी।
तीन महीने तक नहीं मिली पदस्थापना
परिजनों का आरोप है कि नियुक्ति मिलने के बावजूद तीन महीने तक उन्हें किसी विद्यालय में योगदान देने का मौका नहीं मिला। उन्हें प्रतिदिन सरायकेला जिला शिक्षा कार्यालय में हाजिरी लगाने के लिए बुलाया जाता था। दो छोटे बच्चों को घर पर छोड़कर वह रोज इस उम्मीद में कार्यालय जाती थीं कि शायद आज उनकी किसी स्कूल में पदस्थापना हो जाएगी।
घर लौटते समय हुआ हादसा
24 जून की सुबह भी सुलेखा महतो रोज की तरह जिला शिक्षा कार्यालय पहुंचीं और हाजिरी दर्ज कराई। इसके बाद वह अपने देवर के साथ स्कूटी से घर लौट रही थीं। इसी दौरान पीछे से आ रहे तेज रफ्तार हाईवा ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी।
मौके पर हुई मौत
हादसे में सुलेखा महतो सड़क पर गिर गईं और हाईवा की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस दुर्घटना में उनके देवर की जान बच गई, लेकिन परिवार ने अपनी बेटी, पत्नी और दो मासूम बच्चों ने अपनी मां को हमेशा के लिए खो दिया।
शिक्षा विभाग पर उठे सवाल
इस घटना के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। यदि नियुक्ति के बाद भी उनकी पदस्थापना नहीं हुई थी, तो इसकी वजह क्या थी? क्या प्रशासनिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हुई? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।