19 अक्टूबर को रिलीज हुई फिल्म 'बधाई हो' में 59 साल की नीना गुप्ता ने एक प्रेग्नेंट महिला का किरदार निभाया है। इस फिल्म में नीना एक ऐसी महिला की भूमिका में हैं जिसके पहले से ही दो जवान बेटे हैं। इतनी बड़ी उम्र में दोबारा गर्भवती होने की वजह से वो समाज में माजाक का कारण बन जाती है। इस फिल्म की कहानी हर किसी के दिमाग में एक अहम सवाल को जन्म दती हुई नजर आती है और वो सवाल यह है कि आखिर मां बनने की सही उम्र क्या है।
'बधाई हो' में 59 साल की नीना गुप्ता दिखीं प्रेग्नेंट, जानें मां बनने की क्या है सही उम्र
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मां बनने की सही उम्र
बच्चे की प्लानिंग करने से पहले सबसे पहले आपको अपने करियर, फ्यूचर प्लानिंग, समय और सबसे जरूरी अपनी उम्र और हेल्थ जैसी बातों का ध्यान रखना चाहिए।ज्यादातर लोगों को लगता है कि महिलाओं के लिए 20 से 30 साल की उम्र मां बनने के लिए सबसे अच्छी होती है। सच्चाई लेकिन इससे ठीक उल्टी है। हकीकत यह है कि आजकल कोई भी महिला इस उम्र में मां बनने के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं होती है।ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर प्रेग्नेंट होने की सही उम्र क्या है तो इसका जवाब है उम्र का एक पड़ाव ऐसा होता है जो दूसरे से बेहतर होता है।
अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशन और गाइनेकॉलजिस्ट्स के अनुसार महिला जन्म के समय 10 से 20 लाख अंडों के साथ पैदा होती है, लेकिन जैसे-जैसे उसकी उम्र बढ़ती है इन अंडों की संख्या कम होती जाती है।ऐसा खासतौर पर तब होता है जब उसे पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। वैसे तो महिलाओं को जब तक पीरियड्स होते हैं वो तब तक प्रेग्नेंट हो सकती हैं। लेकिन 32 साल की उम्र आते-आते महिलाओं की फर्टिलिटी कम होने लगती है और 37 साल आते-आते फर्टिलिटी रेट में कमी आना और तेज हो जाता है।स्टडी की मानें तो बड़ी उम्र में प्रेग्नेंट होने वाली महिलाओं में भी प्रीक्लैम्पसिया, डायबीटीज और प्रीटर्म बर्थ जैसी समस्याएं भी झेलनी पड़ सकती है।
40 के बाद प्रेग्नेंसी के फायदे
-इस उम्र में महिलाएं ज्यादा अनुभवी, वित्तीय रूप से अधिक सुरक्षित और अपने करियर में ज्यादा कंफर्टेबल हो जाती हैं।
-आप बुद्धिमान और शिक्षित होने के नाते पेरेंटिंग के अच्छे निर्णय भी ले पाती हैं।
-40 से ज्यादा उम्र की मां ब्रेस्टफीडिंग कराने और बच्चों के लिए हेल्दी पोषण लेने की अधिक संभावना होती है।
-गर्भ धारण करने में आप जितना लेट करती हैं आपको प्रेग्नेंसी के दौरान उतनी ही मुश्किलें आती हैं। उम्र बढ़ने के साथ गर्भपात और जन्म दोषों का खतरा काफी अधिक रहता है। आईवीएफ ट्रीटमेंट की आवश्यकता और डोनर एग ट्रीटमेंट का उपयोग करके प्रेग्नेंसी की अधिक संभावना होती है।
-गर्भावस्था में होने वाली इन जटिलताओं जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसी संभावना अधिक बनी होती है।
-40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में कम वजन के शिशु होने की अधिक संभावना होती हैं।
-बढ़ी उम्र की महिलाओं से पैदा हुए बच्चे टाइप-1 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम ज्यादा हो सकता है।