भारत में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन इसके साथ कई तरह की अफवाहें भी फैल रही हैं जिसका असर टेस्टिंग पर पड़ रहा है। कोरोना वायरस के फैलने से जुड़ी अफवाहों के कारण, पंजाब में लोग कोरोना का टेस्ट करवाने से डर रहे हैं। पंजाब के संगरूर जिले की रहने वालीं सोनिया कौर कहती हैं, 'इंसानी अंगों की तस्करी की जा रही है। सिर्फ गांव के लोग ही नहीं पूरी दुनिया इससे डरी हुई है। सोशल मीडिया ऐसी खबरों से भरा पड़ा है।'
Coronavirus: क्या इलाज के बहाने निकाले जा रहे हैं इंसानी अंग? इस राज्य में कोरोना टेस्ट कराने से डर रहे हैं लोग
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स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले
लोगों के मन में डर बसा हुआ है और इंटरनेट की पहुंच और सोशल मीडिया खासकर व्हाट्सऐप पर लोगों की मौजूदगी इन अफवाहों को तेजी से फैलाने में मदद कर रही है। इसके कारण कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले किए गए। कई दूसरे गांवों की तरह सोनिया के गांव में सैंपल इकट्ठा करने आए स्वास्थ्यकर्मियों को घुसने नहीं दिया गया, लोगों ने स्वास्थ्यकर्मियों पर ईंट पत्थरों से हमला भी किया और 'वापस जाओ, हमें टेस्ट नहीं चाहिए' के नारे लगाकर उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर कर दिया। सरकार अपनी तरफ से जागरूकता फैलाने और डर कम करने के लिए कई वीडियो लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है, इन वीडियो को ध्यान में रखकर भी एक कैंपेन चलाने की तैयारी की जा रही है।
सरकार की कोशिशों पर बुरा असर
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने बताया, 'ये सभी अफवाह हैं, कोविड के कारण मरने वालों को कोई छू भी नहीं सकता है। लाश को बांध कर अंतिम क्रिया के लिए भेज दिया जाता है। अंगों के निकाले जाने का तो सवाल ही नहीं उठता।'
पंजाब में कोविड -19 को लेकर अफवाहों का फैलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन टेस्टिंग को लेकर हो रहे विरोध की घटनाएं पिछले कुछ समय में काफी फैल गई हैं। इसके कारण बीमारी से निपटने के लिए की जा रही सरकार की कोशिशों पर असर पड़ रहा है। पंजाब में पिछले कुछ हफ्तों में मामले लगातार बढ़े हैं। अधिकारियों का कहना है कि मौतों के बढ़ने की सबसे बड़ी वजह टेस्टिंग में होने वाली देरी है। बीमार पड़ने के बाद लोग काफी देर से अस्पताल पहुंच रहे हैं।
कोविड-19 से संबंधित सूचनाएं
साठ साल के सुच्चा सिंह की पत्नी कुलवंत कौर की मौत कोविड-19 से हो गई है, लेकिन उन्हें अभी भी लगता है कि कोरोना वायरस एक साजिश है। वे कहते हैं, 'यह सब बकवास है। कोरोना जैसा कुछ भी नहीं है। अगर ऐसा कुछ होता तो मेरी पत्नी की मां जो कि उम्र के 80 के दशक में हैं वो जिंदा नहीं होतीं।'
वे कहते हैं कि उन्हें पछतावा है कि वे अपनी पत्नी को डायबिटीज चेक कराने के लिए अस्पताल क्यों लेकर गए। सुच्चा सिंह कहते हैं, 'उन्होंने उनका डायबिटीज का इलाज ही नहीं किया बल्कि कोरोना, कोरोना चिल्लाते रहे। हमने सुना है कि डॉक्टरों और सरकारों को कोविड-19 की ज्यादा मौतें दिखाने के लिए पैसे मिल रहे हैं। हमने यह भी सुना है कि लोगों को घरों से निकाला जा रहा है और फिर उन्हें मार दिया जाता है।' कोविड-19 से संबंधित सूचनाओं में बदलाव और इसके अलग-अलग असर के चलते गलत सूचनाओं को हवा मिलती दिख रही है।
शवों की अदला-बदली के मामले
एक गांव प्रधान सतपाल सिंह ढिल्लों कहते हैं, 'पहले बूढ़े लोग मर रहे थे। अब युवा लोग भी मर रहे हैं। ऐसा कैसे हो सकता है कि अचानक से युवा लोग संक्रमित होने लगे हैं।' सतपाल के गांव की पंचायत ने कोविड-19 के लिए टेस्टिंग की इजाजत नहीं दी थी। 'हम आमतौर पर देखते हैं कि मौत किसी बूढ़े शख्स की हुई, लेकिन परिवार को किसी युवा महिला का शव सुपुर्द किया गया। ऐसे में लोग कैसे किसी पर भरोसा कर पाएंगे?'
इस तरह की अफवाहों की जड़ तक पहुंचना नामुमकिन है, लेकिन शवों की अदला-बदली जैसे मामले किसी गलती की वजह से हुए हो सकते हैं। जुलाई में दो भाइयों ने, जिनके पिता की कोविड-19 से मौत हो गई थी, आरोप लगाया कि वे जिंदा हैं और उन्हें एक महिला का शव दिया गया है।