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Coronavirus test: पीसीआर और एंटीजन टेस्ट में से कौन सा है ज्यादा कारगर? जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Sun, 09 Aug 2020 05:05 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sun, 09 Aug 2020 05:05 PM IST
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Coronavirus testing Which Covid 19 test is more effective PCR test or antigen test know the Experts opinion
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले कुछ हफ्तों में 10 लाख टेस्ट प्रतिदिन करने का टारगेट रखा है ताकि कोरोना वायरस से सबसे बुरी तरह से प्रभावित देशों में शामिल हो चुके भारत को इस महामारी से उबारा जा सके। लेकिन, क्या वे यह टारगेट हासिल कर सकते हैं और जो टेस्ट किए जा रहे हैं क्या वह विश्वसनीय हैं?



फिलहाल भारत में कितनी टेस्टिंग हो रही है?

अगस्त की शुरुआत में एक हफ्ते के औसत के हिसाब से भारत में करीब 5 लाख टेस्ट रोजाना हो रहे थे। अंतरराष्ट्रीय कंपैरिजन साइट आवर वर्ल्ड इन डेटा ने यह आंकड़ा दिया है। भारत सरकार के रोजाना जारी किए जाने वाले आंकड़े इससे थोड़ा-सा ज्यादा हैं। यह एक बड़ा आंकड़ा है, लेकिन इसे भारत की आबादी के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। भारत में हर दिन हर एक लाख लोगों पर करीब 36 टेस्ट हो रहे हैं। इसके मुकाबले दक्षिण अफ्रीका में यह आंकड़ा 69, पाकिस्तान में 8 और युनाइटेड किंगडम के लिए यह आंकड़ा 192 है। प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षा इस आंकड़े को दोगुना करने की है ताकि हर दिन 10 लाख टेस्ट हो सकें। भारत की आबादी 1.3 अरब से ज्यादा है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

भारत में किस तरह के टेस्ट किट इस्तेमाल हो रहे हैं? 

कोरोना वायरस से जंग में टेस्टिंग को बढ़ाना एक अहम कड़ी है, लेकिन जिस तरह की टेस्टिंग हो रही है उसे लेकर एक्सपर्ट्स चिंता जता रहे हैं। पूरी दुनिया में सबसे आम पीसीआर (पॉलीमेरास चेन रिएक्शन) टेस्ट है। इसमें जेनेटिक मैटेरियल को एक स्वॉब सैंपल से अलग किया जाता है। केमिकल्स का इस्तेमाल प्रोटीन और फैट को जेनेटिक मैटेरियल से हटाने में होता है और सैंपल को मशीन एनालिसिस के लिए रखा जाता है। 

इन्हें टेस्टिंग के गोल्ड स्टैंडर्ड के तौर पर देखा जाता है, लेकिन भारत में ये सबसे महंगे हैं और इसमें टेस्टिंग को प्रोसेस करने में आठ घंटे तक का वक्त लगता है। रिजल्ट आने में एक दिन तक का वक्त लग सकता है। यह सैंपल्स को लैब्स तक पहुंचाने में लगने वाले वक्त पर भी निर्भर करता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

अपनी टेस्टिंग कैपेसिटी को बढ़ाने के लिए भारतीय अधिकारियों ने सस्ते और जल्दी नतीजे देने वाले तरीकों का इस्तेमाल करने पर जोर दिया। इन्हें रैपिड एंटीजन टेस्ट कहा जाता है। इन्हें दुनियाभर में डायग्नोस्टिक या रैपिड टेस्ट कहा जाता है। ये टेस्ट प्रोटीन को, जिन्हें एंटीजन कहा जाता है, अलग करते हैं। इनमें 15 से 20 मिनट में नतीजा मिल सकता है। लेकिन, ये टेस्ट कम विश्वसनीय होते हैं। कुछ मामलों में तो इनका एक्युरेसी रेट 50 फीसदी होता है। इनका मूल रूप से वायरस हॉटस्पॉट्स और हेल्थकेयर सेटिंग्स में इस्तेमाल होता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

यह जानना जरूरी है कि ये टेस्ट केवल यह बताते हैं कि क्या आप फिलहाल संक्रमित हैं या नहीं। ये एंटीबॉडी टेस्ट से अलग होते हैं, जिनमें ये पता चलता है कि आप पहले तो संक्रमित नहीं थे। भारत की मेडिकल रिसर्च संस्था इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने दक्षिण कोरिया, भारत और बेल्जियम में विकसित हुए तीन एंटीजन टेस्ट को मंजूरी दी है। लेकिन, इनमें से एक को स्वतंत्र रूप से आईसीएमआर और एम्स ने परखा है। इस पड़ताल में सामने आया कि सही नेगेटिव रिजल्ट देने की इनकी एक्युरेसी 50 से 84 फीसदी के बीच है। पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रोफेसर के श्रीनाथ रेड्डी कहते हैं, 'एंटीजन टेस्ट से वाकई में संक्रमित आधे से ज्यादा केस का पता ही नहीं चल पाएगा।' 

इसकी कई वजहें हो सकती हैं। इनमें स्वॉब सैंपल का ठीक न होना, व्यक्ति का वायरल लोड और टेस्टिंग किट की क्वॉलिटी जैसी वजहें शामिल हैं। आईसीएमआर ने इस संबंध में गाइडलाइंस जारी की थीं, जिसमें कहा गया था कि किसी के एंटीजन टेस्ट का रिजल्ट नेगेटिव आता है और अगर उसमें लक्षण दिख रहे हैं तो उसे एक पीसीआर टेस्ट भी कराना चाहिए ताकि गलत नेगेटिव रिजल्ट की संभावना को खारिज किया जा सके।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

क्या रैपिड टेस्ट की पूरी दुनिया में सिफारिश की जाती है?

रैपिड या डायग्नोस्टिक टेस्ट में वायरस का पता लगाने के लिए एंटीजेन्स का इस्तेमाल हो भी सकता है और नहीं भी। यूके में सबसे आम रूप से इस्तेमाल होने वाले रैपिड टेस्ट में गलती का मार्जिन 20 फीसदी है। लेकिन, ऑक्सफोर्ड नैनोपोर की विकसित की गई टेस्ट किट के बारे में माना जाता है कि यह 98 फीसदी तक पॉजिटिव केसों को पकड़ लेती है। हालांकि, इसे भी स्वतंत्र रूप से रिसर्चरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स द्वारा चेक किया जाना है।

ये दोनों रैपिड टेस्ट एंटीजन की बजाय जेनेटिक मैटेरियल का इस्तेमाल करते हैं इसलिए ये ज्यादा विश्वसनीय हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और यूएस फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (यूएसएफडीए) ने भी सलाह दी है कि अगर किसी रैपिड टेस्ट में नतीजा नेगेटिव आता है तो आपको पीसीआर टेस्ट कराना चाहिए। 

अमेरिका इस तरह की डायग्नोस्टिक किट्स डेवलप करने की सोच रहा है जिन्हें आप दुकान से खरीद सकेंगे। आप नाक या थूक से स्वॉब ले सकेंगे और प्रेग्नेंसी टेस्ट किट की तरह से मिनटों में रिजल्ट भी हासिल कर पाएंगे। लेकिन, यूएसएफडीए की गाइडलाइंस के मुताबिक, इन किट्स को तभी मंजूरी मिल सकेगी जबकि इनका प्रदर्शन लैब टेस्ट्स जितना अच्छा हो। 

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