लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Sun, 06 Sep 2020 05:22 PM IST
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कोरोना की वैक्सीन पर जोरों-शोरों से काम चल रहा है। रूस और चीन तो पहले से ही अपने लोगों को वैक्सीन दे रहे हैं और अब अमेरिका और ब्रिटेन भी इसपर विचार कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अक्तूबर या फिर नवंबर तक अमेरिका में वैक्सीन तैयार हो सकती है। ऐसे में यह सवाल बहुत पहले से उठ रहा है कि क्या अमीर और ताकतवर देशों को वैक्सीन पहले मिल जाएगी और गरीब यानी कम आय वाले देश पीछे जाएंगे। इसी असमंजस की स्थिति को खत्म करने के लिए 'कोवाक्स प्लान' बनाया गया है, जिसका संचालन गावी (GAVI), विश्व स्वास्थ्य संगठन और सीईपीआई नामक संस्था मिलकर कर रहे हैं। गावी वैक्सीन एलायंस के एक वरिष्ठ अधिकारी सेथ बर्कले का कहना है कि कोवाक्स प्लान में अब तक 70 समृद्ध देशों ने हस्ताक्षर किए हैं और इस योजना में शामिल होने की मंजूरी दी है, जिसमें जापान, जर्मनी और नॉर्वे जैसे देश शामिल हैं।
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समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में सेथ बर्कले ने कहा, 'अभी तक मध्यम और अधिक आय वाले कुल 76 देशों ने 'कोवाक्स प्लान' में शामिल होने की इच्छा जाहिर की है। यह एक अच्छी खबर है। इससे स्पष्ट होता है कि कोवाक्स योजना दुनियाभर के देशों को आकर्षित कर रही है। चीन प्रशासन ने भी इसमें शामिल होने की बात पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।'
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दरअसल, गावी, विश्व स्वास्थ्य संगठन और सीईपीआई का समन्वित समूह कोवाक्स में शामिल सभी देशों को इस विचार पर सहमत करने की कोशिश कर रहा है कि कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा खतरे में समझे जाने वाले लोगों को पहले वैक्सीन दी जाए। इस समूह का ये भी कहना है कि सभी लोगों को वैक्सीन मिलनी चाहिए और उचित कीमत पर मिलनी चाहिए।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जितने भी समृद्ध देश कोवाक्स प्लान में शामिल हुए हैं, वो अपने बजट से करीब 90 देशों को कोरोना की वैक्सीन खरीदने में मदद करेंगे। सेथ बर्कले का कहना है कि इस समूह का सबसे बड़ा मकसद यही है कि जो वैक्सीन नहीं खरीद सकते, उन तक भी इसे पहुंचाया जाए।
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हालांकि अमेरिका इस कोवाक्स प्लान में शामिल नहीं होगा, क्योंकि उसे इस योजना में विश्व स्वास्थ्य संगठन के होने से आपत्ति है। इस योजना में शामिल होने की समयसीमा 18 सितंबर तय की गई है। बताया जा रहा है कि कोवाक्स प्लान के जरिए साल 2021 के अंत तक कोरोना वैक्सीन की करीब दो अरब डोज मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया है।
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