Satyapal malik Death: जम्मू कश्मीर, मेघालय और बिहार के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का आज (मंगलवार, 5 अगस्त) दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल में निधन हो गया। वह 79 वर्ष के थे। सत्यपाल मलिक लंबे समय से मूत्र पथ के संक्रमण (यूटीआई) और इसके कारण हुई किडनी की गंभीर बीमारी का शिकार थे। मई 2025 से वह अस्पताल में भर्ती थे, जहां कई बार उनकी सेहत बहुत खराब हो गई थी। मंगलवार को उन्होंने आखिरी सांस ली।
खबर लिखे जाने तक अस्पताल की तरफ से उनकी मेडिकल रिपोर्ट साझा नहीं की गई है, हालांकि मीडिया रिपोर्टस का मानना है कि किडनी की बीमारी के कारण ही उनकी मौत हुई।
कई बार सोशल मीडिया पर पोस्ट के माध्यम से वह अपनी सेहत की जानकारी साझा करते रहते थे। 22 मई 2025 को एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा, अभी मेरी हालत बहुत खराब है मैं किसी से भी बात करने की हालत में नहीं हूं। 11 मई से राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती हूं। संक्रमण की शिकायत के चलते अस्पताल में भर्ती किया गया था। अब स्थिति बहुत गंभीर है और पिछले तीन दिनों से किडनी डायलिसिस की जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, मूत्र पथ के संक्रमण की स्थिति पर अगर ध्यान न दिया जाए और समय रहते इसका इलाज न हो पाए तो इसके कारण किडनी पर गंभीर असर हो सकता है। कई मामलों में ये ऐसी स्थितियों का कारण बनता है जिससे किडनी फेलियर हो सकती है।
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यूटीआई और इसका बढ़ता खतरा
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पहले मूत्र पथ के संक्रमण (यूटीआई) के बारे में जान लीजिए
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) एक आम समस्या है जो मूत्रमार्ग को प्रभावित करता है। महिलाओं में यूटीआई की दिक्कत अधिक देखी जाती रही है। कुछ पुरुष भी यूटीआई का शिकार हो सकते हैं।
यूटीआई तब होता है जब बैक्टीरिया मूत्रमार्ग के माध्यम से मूत्र पथ में प्रवेश कर जाता है और बढ़ना शुरू कर देता है। एस्चेरिचिया कोलाई नामक बैक्टीरिया को इस संक्रामक रोग का प्रमुख कारण माना जाता रहा है। पुरुषों में यूटीआई के मामले आमतौर पर यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) के कारण होते हैं।
चूंकि पुरुषों का मूत्रमार्ग महिलाओं की तुलना में लंबा होता है, इसलिए उन्हें यूटीआई होने का खतरा कम होता है। यूटीआई पुरुषों की तुलना में महिलाओं में चार गुना अधिक आम है। अगर आपको पहले से कुछ स्वास्थ्य समस्याएं जैसे डायबिटीज, किडनी की बीमारी, प्रोस्टेट की समस्या हो या फिर आप कम पानी पीते हैं तो ये स्थितियां आपमें यूटीआई के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। एक बार यूटीआई हो जाने के बाद अगली बार फिर से इस संक्रमण के होने का खतरा अधिक रहता है।
(गंभीर किडनी रोग से जूझ रहे थे पूर्व राज्यपाल; जानिए क्यों बढ़ती जा रही है ये बीमारी?)
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किडनी की बीमारियों का खतरा
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यूटीआई और किडनी की बीमारियों का खतरा
नेशनल किडनी फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर मामलों में यूटीआई का इलाज किडनी को नुकसान पहुंचाए बिना सफलतापूर्वक किया जा सकता है। पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने या गुर्दे की पथरी जैसी समस्याओं के कारण होने वाले यूटीआई का जोखिम हो सकता है जिसका किडनी पर भी असर होने का जोखिम रहता है। अगर समस्या का समाधान न किया जाए और संक्रमण जारी रहे, तो किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
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किडनी फेलियर का जोखिम
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क्या इससे किडनी फेलियर भी हो सकता है?
किडनी रोग विशेषज्ञों की मानें तो मूत्र मार्ग संक्रमण (यूटीआई) सीधे तौर पर किडनी फेलियर का कारण नहीं बनती, लेकिन इससे किडनी में संक्रमण (पायलोनेफ्राइटिस) का जोखिम जरूर रहता है जिसका अगर इलाज न किया जाए तो किडनी की गंभीर बीमारी और यहां तक कि किडनी फेलियर तक की समस्या हो सकती है।
यूटीआई आमतौर पर मूत्राशय में शुरू होता है और कभी-कभी गुर्दे तक फैल जाता है, जिससे पायलोनेफ्राइटिस हो सकता है। किडनी में संक्रमण पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर इसका इलाज न हो पाए तो इससे भी किडनी की गंभीर बीमारी हो सकती है। बार-बार होने वाले गुर्दे के संक्रमण, किडनी फेलियर का कारण बन सकता है।
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किडनी को स्वस्थ रखने के लिए करें उपाय (सांकेतिक तस्वीर)
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यूटीआई हो जाए तो क्या करें और इससे कैसे बचें?
यूटीआई के इलाज का लक्ष्य संक्रमण को नियंत्रित करना और इसे किडनी या ऊपरी मूत्र पथ में फैलने से रोकना है। आमतौर पर बैक्टीरिया को मारने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं।
आप दैनिक जीवन में कुछ बातों का ध्यान रखकर भी इस संक्रमण से बचाव कर सकते हैं।
- खूब सारा पानी और पदार्थ पीते रहें।
- जननांगों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- सुरक्षित यौन संबंध बनाना जरूरी है।
- अगर आपको डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है तो इसे कंट्रोल में रखना भी संक्रमण से बचाव के लिए बहुत जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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