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Joint Family Tips: शादी के बाद ससुराल में बढ़ रहा है तनाव? एक्सपर्ट की इस सलाह से मिलेगा खुशहाल परिवार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shivani Awasthi
Updated Wed, 04 Mar 2026 01:01 PM IST
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सार
Joint Family Tips: संयुक्त परिवार में रहना एक खूबसूरत अनुभव है, लेकिन इसके लिए सोच और आदतों में थोड़ा बदलाव बहुत जरूरी है।
संयुक्त परिवार के साथ कैसे रहें
- फोटो : adobe
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विस्तार
अंजलि की शादी एक बड़े संयुक्त परिवार में हुई, जहां सास-ससुर, चचेरे सास-ससुर, ननद, जेठ और बच्चे थे। शुरू में उसे ये सब रोमांचक लगा, लेकिन जल्द ही उसकी आदतों और परिवार की रोजमर्रा की चुनौतियों से तनाव बढ़ने लगा और उसका चिड़चिड़ापन भी। अगर अंजलि की तरह आप भी संयुक्त परिवार का हिस्सा बनने जा रही हैं तो अपनी कुछ आदतों में बदलाव लाना होगा।
समझना जरूरी
शादी के बाद संयुक्त परिवार में रहना एक नए सफर की तरह है। यहां रिश्ते सिर्फ नाम के नहीं, बल्कि भावनाओं, जिम्मेदारियों और समझ से जुड़े होते हैं। ऐसे में आपको समझना होगा कि हर सदस्य की सोच अलग है, इसलिए बार-बार टोकना या दखल देना रिश्तों में कड़वाहट लाता है। रिश्तों को निभाने के लिए कभी-कभी चुप रहना, सुनना और समझना बेहतर होता है।
धीरे-धीरे लाएं बदलाव
नई बहुएं अक्सर घर की व्यवस्थाओं में तुरंत बदलाव लाना चाहती हैं, लेकिन बिना किसी से बात किए ऐसा करना परिवार को नाराज कर सकता है। बेहतर है कि आप पहले परिवार से चर्चा करें, अपने सुझाव साझा करें और धीरे-धीरे बदलाव लाएं। इस तरह आप उनकी पसंद को भी सही से समझ सकेंगी।
मन की बात कहें
कई महिलाएं घर की शांति बनाए रखने के लिए सामने आने वाली परेशानियों को खुद तक ही सीमित रखती हैं, लेकिन दिल में बातें दबाकर रखना आगे चलकर नाराजगी और रिश्तों में दूरी की वजह बन जाता है। ऐसे में सही समय देखकर, शांत तरीके से अपनी बात कहना जरूरी है, ताकि गलतफहमियां कम हों।
सहनशीलता पर ध्यान
नए घर में हर चीज पसंद आए, यह जरूरी नहीं। लेकिन छोटी-छोटी बातों पर शिकायत करना रिश्तों में तनाव बढ़ता है। जो बात सच में परेशान करे, उसका समाधान शांति से खोजें, बाकी बातों को नजरअंदाज करें। अब आप उस घर का हिस्सा हैं, ऐसे में आपकी समझदारी और सहनशीलता से घर प्रेम, विश्वास और सुकून का खूबसूरत ठिकाना बन सकता है।
परिवार में सक्रियता
नई जगह और नए लोगों के बीच खुद को अलग कर लेना आसान लगता है, लेकिन इससे रिश्तों में दूरी आ जाती है। घर के कामों में सहयोग, त्योहारों में भागीदारी और रोजमर्रा की बातचीत अपनापन बढ़ाती है। जब आप परिवार का सक्रिय हिस्सा बनती हैं, तो सुकून अपने आप महसूस होता है और घर सच में अपना लगने लगता है।
सही शब्द, शांत तरीका और सहयोग की भावना
रिलेशनशिप काउंसलर डॉ. मोहिनी मित्तल बताती हैं, नए परिवार में सामंजस्य बनाने के लिए सबसे पहले उनकी आदतों और मूल्यों को समझें। विरोध करने के बजाय खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालना रिश्तों को मजबूत बनाता है। परिवार की सांस्कृतिक परंपराओं में रुचि लें। इससे बुजुर्गों का विश्वास और स्नेह दोनों मिलता है। यदि किसी बात से ठेस पहुंचे, तो सही शब्दों और शांत तरीके से खुलकर संवाद करें। सहयोग की भावना विकसित करें और जरूरत पड़ने पर मदद मांगने में संकोच न करें। नए रिश्तों के साथ पुराने संबंधों को भी समय दें। साथ ही अपनी सेहत, भावनाओं और आत्मसम्मान को प्राथमिकता देना न भूलें।
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समझना जरूरी
शादी के बाद संयुक्त परिवार में रहना एक नए सफर की तरह है। यहां रिश्ते सिर्फ नाम के नहीं, बल्कि भावनाओं, जिम्मेदारियों और समझ से जुड़े होते हैं। ऐसे में आपको समझना होगा कि हर सदस्य की सोच अलग है, इसलिए बार-बार टोकना या दखल देना रिश्तों में कड़वाहट लाता है। रिश्तों को निभाने के लिए कभी-कभी चुप रहना, सुनना और समझना बेहतर होता है।
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धीरे-धीरे लाएं बदलाव
नई बहुएं अक्सर घर की व्यवस्थाओं में तुरंत बदलाव लाना चाहती हैं, लेकिन बिना किसी से बात किए ऐसा करना परिवार को नाराज कर सकता है। बेहतर है कि आप पहले परिवार से चर्चा करें, अपने सुझाव साझा करें और धीरे-धीरे बदलाव लाएं। इस तरह आप उनकी पसंद को भी सही से समझ सकेंगी।
मन की बात कहें
कई महिलाएं घर की शांति बनाए रखने के लिए सामने आने वाली परेशानियों को खुद तक ही सीमित रखती हैं, लेकिन दिल में बातें दबाकर रखना आगे चलकर नाराजगी और रिश्तों में दूरी की वजह बन जाता है। ऐसे में सही समय देखकर, शांत तरीके से अपनी बात कहना जरूरी है, ताकि गलतफहमियां कम हों।
सहनशीलता पर ध्यान
नए घर में हर चीज पसंद आए, यह जरूरी नहीं। लेकिन छोटी-छोटी बातों पर शिकायत करना रिश्तों में तनाव बढ़ता है। जो बात सच में परेशान करे, उसका समाधान शांति से खोजें, बाकी बातों को नजरअंदाज करें। अब आप उस घर का हिस्सा हैं, ऐसे में आपकी समझदारी और सहनशीलता से घर प्रेम, विश्वास और सुकून का खूबसूरत ठिकाना बन सकता है।
परिवार में सक्रियता
नई जगह और नए लोगों के बीच खुद को अलग कर लेना आसान लगता है, लेकिन इससे रिश्तों में दूरी आ जाती है। घर के कामों में सहयोग, त्योहारों में भागीदारी और रोजमर्रा की बातचीत अपनापन बढ़ाती है। जब आप परिवार का सक्रिय हिस्सा बनती हैं, तो सुकून अपने आप महसूस होता है और घर सच में अपना लगने लगता है।
सही शब्द, शांत तरीका और सहयोग की भावना
रिलेशनशिप काउंसलर डॉ. मोहिनी मित्तल बताती हैं, नए परिवार में सामंजस्य बनाने के लिए सबसे पहले उनकी आदतों और मूल्यों को समझें। विरोध करने के बजाय खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालना रिश्तों को मजबूत बनाता है। परिवार की सांस्कृतिक परंपराओं में रुचि लें। इससे बुजुर्गों का विश्वास और स्नेह दोनों मिलता है। यदि किसी बात से ठेस पहुंचे, तो सही शब्दों और शांत तरीके से खुलकर संवाद करें। सहयोग की भावना विकसित करें और जरूरत पड़ने पर मदद मांगने में संकोच न करें। नए रिश्तों के साथ पुराने संबंधों को भी समय दें। साथ ही अपनी सेहत, भावनाओं और आत्मसम्मान को प्राथमिकता देना न भूलें।