{"_id":"5b5877794f1c1bbd298b5ed1","slug":"dark-chocolate-reduces-stress","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"डार्क चॉकलेट खाइए, स्ट्रेस को दूर भगाइए","category":{"title":"Stress Management ","title_hn":"रहिए कूल","slug":"stress-management"}}
डार्क चॉकलेट खाइए, स्ट्रेस को दूर भगाइए
ऊर्जा डेस्क, अमर उजाला
Updated Thu, 26 Jul 2018 08:56 AM IST
विज्ञापन
Chocolate
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डार्क चॉकलेट के प्रभाव की जांच करने वाले अध्ययनों से पता चला है कि कुछ प्रकार के डार्क चॉकलेट खाने से स्वास्थ्य लाभ होता है। सैन डिएगो में प्रायोगिक जीव विज्ञान 2018 की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत दो अध्ययनों के निष्कर्ष बताते हैं कि जो लोग डार्क चॉकलेट का उपभोग करते हैं, जिसमें न्यूनतम 70% कोको, 30% कार्बनिक चीनी की उच्च सांद्रता होती है, उनके तनाव स्तर, मनोदशा, स्मृति और प्रतिरक्षा प्रणाली पर इसका सकारात्मक असर पड़ता है। पहली बार इस तरह का अध्ययन किया गया है यह निर्धारित करने के लिए कि यह संज्ञानात्मक, अंतःस्रावी और हृदय संबंधी स्वास्थ्य का समर्थन कैसे कर सकता है।
chocolate
ये अध्ययन हमें बताते हैं कि कोको की सांद्रता जितनी अधिक होगी संज्ञान, स्मृति, मनोदशा और प्रतिरक्षा प्रणाली पर उतना अधिक सकारात्मक प्रभाव होगा। कोको में पाए जाने वाले फ्लेवोनॉयड बेहद शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लामेशन एजेंट होते हैं, जो मस्तिष्क और कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं। डार्क चॉकलेट (70% कोको) मानव जीन अभिव्यक्ति को प्रभावित करता है।
कोको कोशिकिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया, तंत्रिका सिग्नलिंग और संवेदी धारणा को नियंत्रित करता है। यह तीव्र और क्रोनिक ईईजी (इलेक्ट्रो इंस्फेलोग्राफी) पावर स्पेक्ट्रल बढ़ाता है। निष्कर्ष बताते हैं कि 70 प्रतिशत कोको वाले डार्क चॉकलेट व्यवहार और मस्तिष्क के स्वास्थ्य लाभों के लिए न्यूरोप्लास्टिकता को बढ़ाता है। बर्क ने कहा कि अध्ययनों के लिए आगे की जांच की आवश्यकता है, विशेष रूप से प्रतिरक्षा कोशिकाओं और मस्तिष्क के लिए इन प्रभावों के महत्व को निर्धारित करने के लिए।
कोको कोशिकिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया, तंत्रिका सिग्नलिंग और संवेदी धारणा को नियंत्रित करता है। यह तीव्र और क्रोनिक ईईजी (इलेक्ट्रो इंस्फेलोग्राफी) पावर स्पेक्ट्रल बढ़ाता है। निष्कर्ष बताते हैं कि 70 प्रतिशत कोको वाले डार्क चॉकलेट व्यवहार और मस्तिष्क के स्वास्थ्य लाभों के लिए न्यूरोप्लास्टिकता को बढ़ाता है। बर्क ने कहा कि अध्ययनों के लिए आगे की जांच की आवश्यकता है, विशेष रूप से प्रतिरक्षा कोशिकाओं और मस्तिष्क के लिए इन प्रभावों के महत्व को निर्धारित करने के लिए।
chocolate
विशेषज्ञ कहते हैं...
डार्क चॉकलेट खाने से मस्तिष्क की न्यूरो ट्रांसमीटर में बदलाव आता है। मस्तिष्क में न्यूरॉन, जो आपस में मैसेज को ट्रांसफर करते हैं, वह बहुत स्मॉल इलेक्ट्रिक क्रिया-कलाप के द्वारा करते हैं। न्यूरो ट्रांसमीटर में बदलाव इस क्रियाकलाप को प्रभावित करते हैं। साथ ही ईईजी (इलेक्ट्रो इंस्फेलोग्राफी) में सकारात्मक परिवर्तन होता है। हालांकि, माइग्रेन और मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति को चॉकलेट से परहेज करना चाहिए। - डॉ. राजीव रंजन न्यूरोलॉजिस्ट, सर गंगाराम हॉस्पिटल, नई दिल्ली।
डार्क चॉकलेट खाने से मस्तिष्क की न्यूरो ट्रांसमीटर में बदलाव आता है। मस्तिष्क में न्यूरॉन, जो आपस में मैसेज को ट्रांसफर करते हैं, वह बहुत स्मॉल इलेक्ट्रिक क्रिया-कलाप के द्वारा करते हैं। न्यूरो ट्रांसमीटर में बदलाव इस क्रियाकलाप को प्रभावित करते हैं। साथ ही ईईजी (इलेक्ट्रो इंस्फेलोग्राफी) में सकारात्मक परिवर्तन होता है। हालांकि, माइग्रेन और मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति को चॉकलेट से परहेज करना चाहिए। - डॉ. राजीव रंजन न्यूरोलॉजिस्ट, सर गंगाराम हॉस्पिटल, नई दिल्ली।