JEE Main: लखनऊ के होनहारों का फिर बजा डंका, 50 अभ्यर्थी 99 पर्सेंटाइल तो 200 से ज्यादा को 95 पर्सेंटाइल मिले
राजधानी में करीब पांच सौ छात्रों ने जेईई एडवांस के लिए सफलता हासिल किया। इनमें 50 ऐसे अभ्यर्थी रहे जिन्होंने 99 पर्सेंटाइल से ज्यादा अंक हासिल किए। वहीं 200 से ज्यादा अभ्यर्थियों को 95 पर्सेंटाइल से ज्यादा अंक मिले।
विस्तार
आईआईटी में दाखिले के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की ओर से आयोजित देश की प्रतिष्ठित जेईई मेन 2026 (जनवरी सत्र) का परिणाम सोमवार रात घोषित कर दिया गया। राजधानी लखनऊ के होनहारों ने एक बार फिर सफलता का परचम लहराया है। करीब 500 विद्यार्थियों ने शानदार पसेंटाइल हासिल कर जेईई एडवांस के लिए अपनी जगह पक्की की है। इनमें 50 ऐसे अभ्यर्थी रहे जिन्होंने 99 पसेंटाइल से ज्यादा अंक हासिल किए। 200 से ज्यादा अभ्यर्थियों को 95 पर्सेटाइल से ज्यादा अंक मिले।
इन सफल विद्यार्थियों की कहानियां सिर्फ अंकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अनुशासन, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प की मिसाल हैं। किसी ने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया, तो किसी ने रोजाना 10 से 13 घंटे की मेहनत से अपने लक्ष्य को हासिल किया। कई छात्रों के लिए यह सफलता दूसरी या तीसरी कोशिश के बाद मिली, जो यह दिखाती है कि असफलता के बाद भी हार न मानना ही असली जीत की कुंजी है। अब इन सभी मेधावियों की नजर जेईई एडवांस पर टिकी है, जहां वे देश के शीर्ष आईआईटी में प्रवेश पाने का सपना साकार करना चाहते हैं।
ये भी हैं धुरंधर:
भानु प्रकाश वर्मा (99.66), अर्जुन अग्रवाल (99.63), आशुतोष प्रताप सिंह (99.58), आदित्य राजपूत (99.57), अर्णव सिंह (99.47), अभिनव सिंह (99.45), मो. सायम सुल्तान (99.39), सिद्धिमा शुक्ला (99.39), शिखर कुमार सिंह (99.36), आरूष कुमार (99.32), ईसाम साजिद अंसारी (99.30), उत्सव यादव (99.27), आदित्य सिंह (99.27), दिव्य श्रीवास्तव (99.26), संदर्भ मिश्रा (99.24), भव्या गुप्ता (99.17), मो. अली उमर (99.11), संकल्प मिश्रा (99.11), अथर्व सिंह भदौरिया (99.09) व निश्छल दुबे (99.06) आदि शामिल हैं।
भाई से मिली प्रेरणा, मम्मी ने दिया साथ
इंजीनियरिंग क्षेत्र में जाने की प्रेरणा बड़े भाई यथार्थ से मिली। इस सफलता में मम्मी सारिका श्रीवास्तव का साथ रहा। पिता विकास श्रीवास्तव के देहांत होने के बाद मम्मी ने हम सभी को संभाला। हर दिन नौ से 10 घंटे की पढ़ाई से ही यहां तक का रास्ता पूरा हुआ। पिछले साल भी परीक्षा दिए थे, लेकिन उस दौरान सफलता नहीं मिल सकी। हिम्मत नहीं हारा। मुझे इंजीनियरिंग क्षेत्र में ही जाना है यह प्रण लिया था। -साक्ष्य, उदयगंज (99.716 पर्सेंटाइल)
दिमाग को आराम देने के लिए सुनते थे गाना
जब 10वीं कक्षा में पढ़ते थे उसी समय से ही इंजीनियरिंग क्षेत्र में जाने का मन बना लिया। कोचिंग के साथ ही हर दिन 13 घंटे की पढ़ाई करते थे। दिमाग को आराम देने के लिए गाना सुनते थे। कोचिंग के माध्यम से नोट्स तैयार करते थे और उसी को हर दिन रिवीजन करते थे। मद्रास या बांबे आईआईटी में प्रवेश हो यही इच्छा है मेरी। पिता रत्नेश कुमार जैन और माता आलिका जैन का सहयोग मिला। -अनुज जैन, यहियागंज (99.68 पर्सेंटाइल)सोशल मीडिया से दूरी से मिली सफलता
11वीं कक्षा में जब पढ़ाई कर रहे थे तभी से जेईई की तैयारी करने लगे। इससे पहले एक और बार परीक्षा दी थी। लेकिन, इस बार सफलता हाथ लगी। पिता दिनेश त्रिपाठी और माता कल्पना त्रिपाठी का सहयोग रहा। पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाए थे। हर दिन 10 से 12 घंटे की नियमित पढ़ाई से ही यह सफलता हासिल हुई है। बेहतर इंजीनियरिंग संस्थान मिले यही उम्मीद है। -नितांत त्रिपाठी, विकास नगर (99.49 पर्सेंटाइल)अब जेई एडवांस की करेंगे तैयारी पहले सेशन में मेरे 99.51 परसेंटाइल अंक थे। इस बार दूसरे सेशन में 99.63 परसेंटाइल अंक है। मेरा सपना आईआईटी में प्रवेश पाकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना है। मैं सीएमएस गोमती नगर एक्सटेंशन का छात्र हूं। मैने स्कूल के अलावा घर पर रोजाना छह घंटे पढ़ाई की है। मेरे पिता डॉ. राजर्षि कुमार गौड़ उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ एग्र्रीकल्चर रिसर्च में डिप्टी डायरेक्टर हैं। मां ऋचा रायजादा गृहिणी हैं। मेरे पिता की इच्छा है कि मैं एक इंजीनियर बनकर देश की सेवा करूं। मेरी इस सफलता के पीछे मेरे अध्यापकों और माता पिता का श्रेय है। -ऋषिथ राज रायजादा

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