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75 साल के बुजुर्ग ने दी कोरोना को मात, 11 दिन वेंटिलेटर पर रहे ...पर नहीं हारी हिम्मत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 25 Jul 2020 04:07 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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एसजीपीजीआई में वेंटिलेटर पर 11 दिन रहने के बाद प्रेम प्रकाश (75) ने कोरोना से जंग जीत ली। वेंटिलेटर पर जाने के बावजूद ठीक होने वाले ये दूसरे मरीज हैं। मरीज के ठीक होने से टीम उत्साहित है। पीजीआई के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर एवं कोरोना आईसीयू-1 के प्रभारी प्रो. जिया हाशिम ने बताया कि प्रेम प्रकाश को कोरोना के कारण गंभीर निमोनिया हो गया।
इसके कारण श्वसन तंत्र ने काम करना बंद कर दिया था। वह एक्यूट रेस्पीरेटरी ड्रिस्ट्रेस सिंड्रोम के शिकार थे। इन्हें नौ जुलाई को लाया गया था। वेंटिलेटर पर रखा गया। सामान्य दवाओं के साथ संक्रमणरोधी दवाएं और शुगर को नियंत्रित रखने को लेकर मैनेजमेंट किया गया। मरीज को रेमडेसिवर की खुराक दी गई।
साथ ही विशेष क्लीनिकल मैनेजमेंट किया गया। धीरे-धीरे फेफड़े में सुधार हुआ। करीब 11 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद मरीज की रिकवरी बढ़ती गई। कोरोना की रिपोर्ट भी निगेटिव आ गई। मरीज को 14 दिन होम क्वारंटीन रहने की सलाह देकर डिस्चार्ज कर दिया गया। प्रो. जिया का कहना है कि इतनी अधिक उम्र के मरीज को वेंटिलेटर से निकालना नामुमकिन था, लेकिन पूरी टीम की सक्रियता से उनकी जान बचाने में कामयाबी मिली।
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इसके कारण श्वसन तंत्र ने काम करना बंद कर दिया था। वह एक्यूट रेस्पीरेटरी ड्रिस्ट्रेस सिंड्रोम के शिकार थे। इन्हें नौ जुलाई को लाया गया था। वेंटिलेटर पर रखा गया। सामान्य दवाओं के साथ संक्रमणरोधी दवाएं और शुगर को नियंत्रित रखने को लेकर मैनेजमेंट किया गया। मरीज को रेमडेसिवर की खुराक दी गई।
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साथ ही विशेष क्लीनिकल मैनेजमेंट किया गया। धीरे-धीरे फेफड़े में सुधार हुआ। करीब 11 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद मरीज की रिकवरी बढ़ती गई। कोरोना की रिपोर्ट भी निगेटिव आ गई। मरीज को 14 दिन होम क्वारंटीन रहने की सलाह देकर डिस्चार्ज कर दिया गया। प्रो. जिया का कहना है कि इतनी अधिक उम्र के मरीज को वेंटिलेटर से निकालना नामुमकिन था, लेकिन पूरी टीम की सक्रियता से उनकी जान बचाने में कामयाबी मिली।
आईसीयू में भर्ती 22 अत्यंत गंभीर मरीज
प्रो. जिया हाशिम
- फोटो : amar ujala
एसजीपीजीआई के आईसीयू में इन दिनों 22 अत्यंत गंभीर मरीज भर्ती हैं। इसमें दो वेंटिलेटर पर हैं। अन्य सामान्य ऑक्सीजन अथवा पोटेबल वेंटिलेटर पर हैं। यहां दो माह के अंदर आठ मरीजों को वेंटिलेटर पर ले जाना पड़ा, जो अति गंभीर थे। इसमें छह को बचाया नहीं जा सका, जबकि दो वेंटिलेटर से बाहर आ गए। इसमें एक 23 साल की युवती थी तो दूसरा 75 वर्षीय वृद्ध।

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