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Lucknow News: रफ्तार पकड़ रहे एटीएस, 35 स्टेशनों से 2.80 लाख फिटनेस प्रमाणपत्र जारी
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परिवहन मंत्री ने जारी किए आंकड़े, गिनाई उपलिब्धयां
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। वाहनों की फिटनेस के लिए लखनऊ सहित प्रदेशभर में 35 स्वचालित परीक्षण स्टेशन (एटीएस) काम कर रहे हैं। यहां वाहन स्वामियों से फिटनेस के लिए वसूली की शिकायतें आम बात है। पर परिवहन मंत्री एटीएस से जारी प्रमाणपत्रों को विभागीय उपलिब्धयों में गिना रहे हैं।
शुक्रवार को परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने आंकड़े जारी करते हुए कहाकि एटीएस प्रदेश में रफ्तार पकड़ रहे हैं। प्रदेश में सड़क सुरक्षा और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई स्वचालित परीक्षण स्टेशन(एटीएस) प्रणाली तेजी से सफलता की ओर बढ़ रही है। वर्तमान में संचालित 35 स्वचालित परीक्षण स्टेशनों के माध्यम से अब तक रिकॉर्ड 2,80,779 व्यावसायिक वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि एटीएस का मुख्य उद्देश्य वाहन फिटनेस जांच की प्रक्रिया से मानवीय हस्तक्षेप को पूरी तरह समाप्त करना है। अब मशीनों व सेंसर आधारित आधुनिक तकनीक से वाहनों की जांच की जा रही है, जिससे वाहन मालिकों को तेज़, सटीक और समयबद्ध प्रमाण-पत्र मिल रहे हैं। डिजिटल रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी निगरानी और ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग के कारण इस व्यवस्था में लापरवाही, पक्षपात और भ्रष्टाचार की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई है। परिवहन मंत्री ने यह भी कहाकि सड़क सुरक्षा व पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इसके तहत केवल तकनीकी रूप से पूरी तरह फिट वाहनों को ही सड़क पर चलने की अनुमति दी जा रही है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं और बढ़ते प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिल रही है।
27 जिलों में चल रहे हैं 35 एटीएस
राज्य नीति के तहत स्वीकृत 79 प्रारंभिक रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र (पीआरसी) के सापेक्ष वर्तमान में उत्तर प्रदेश के 27 जिलों में 35 स्वचालित परीक्षण स्टेशन एएफएमएस पोर्टल पर पूरी तरह लाइव हो चुके हैं। इन केंद्रों के माध्यम से परिवहन वाहनों की पूरी फिटनेस जांच अब पूरी तरह मशीन आधारित और पारदर्शी हो गई है।
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। वाहनों की फिटनेस के लिए लखनऊ सहित प्रदेशभर में 35 स्वचालित परीक्षण स्टेशन (एटीएस) काम कर रहे हैं। यहां वाहन स्वामियों से फिटनेस के लिए वसूली की शिकायतें आम बात है। पर परिवहन मंत्री एटीएस से जारी प्रमाणपत्रों को विभागीय उपलिब्धयों में गिना रहे हैं।
शुक्रवार को परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने आंकड़े जारी करते हुए कहाकि एटीएस प्रदेश में रफ्तार पकड़ रहे हैं। प्रदेश में सड़क सुरक्षा और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई स्वचालित परीक्षण स्टेशन(एटीएस) प्रणाली तेजी से सफलता की ओर बढ़ रही है। वर्तमान में संचालित 35 स्वचालित परीक्षण स्टेशनों के माध्यम से अब तक रिकॉर्ड 2,80,779 व्यावसायिक वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि एटीएस का मुख्य उद्देश्य वाहन फिटनेस जांच की प्रक्रिया से मानवीय हस्तक्षेप को पूरी तरह समाप्त करना है। अब मशीनों व सेंसर आधारित आधुनिक तकनीक से वाहनों की जांच की जा रही है, जिससे वाहन मालिकों को तेज़, सटीक और समयबद्ध प्रमाण-पत्र मिल रहे हैं। डिजिटल रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी निगरानी और ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग के कारण इस व्यवस्था में लापरवाही, पक्षपात और भ्रष्टाचार की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई है। परिवहन मंत्री ने यह भी कहाकि सड़क सुरक्षा व पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इसके तहत केवल तकनीकी रूप से पूरी तरह फिट वाहनों को ही सड़क पर चलने की अनुमति दी जा रही है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं और बढ़ते प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिल रही है।
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27 जिलों में चल रहे हैं 35 एटीएस
राज्य नीति के तहत स्वीकृत 79 प्रारंभिक रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र (पीआरसी) के सापेक्ष वर्तमान में उत्तर प्रदेश के 27 जिलों में 35 स्वचालित परीक्षण स्टेशन एएफएमएस पोर्टल पर पूरी तरह लाइव हो चुके हैं। इन केंद्रों के माध्यम से परिवहन वाहनों की पूरी फिटनेस जांच अब पूरी तरह मशीन आधारित और पारदर्शी हो गई है।
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