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Lucknow News: खतरनाक बताकर सील कीं इमारतें शपथ पत्र लेकर खोली जा रहीं
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लखनऊ। अलीगंज में 22 जून को हुए अग्निकांड के बाद एलडीए ने तेजी दिखाते हुए शहर में करीब 150 इमारतों को खतरनाक बताकर सील किया था। फायर सेफ्टी न होना और अवैध निर्माण को कार्रवाई की वजह बताया गया था। हालांकि, विरोध होने पर प्राधिकरण ने फायर सेफ्टी के उपाय किए जाने का शपथ पत्र लेकर इमारतों को खोलना शुरू कर दिया है। एक सप्ताह में करीब 50 बिल्डिंगों की सील खोली जा चुकी है।
अग्निकांड के दो दिन बाद एलडीए और अग्निशमन विभाग ने बड़े पैमाने पर सीलिंग की। इस पर होटल संचालकों और कोचिंग वालों के साथ बैठक की गई। इसमें फायर सुरक्षा के उपाय पूरे करने पर जोर दिया गया और ऐसा न करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
होटल संचालकों ने तो विरोध नहीं जताया, लेकिन कोचिंग वालों ने कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि कार्रवाई मनमाने तरीके से की जा रही है। जिस इमारत में आग लगी वह एनिमेशन सेंटर था और पेट शॉप सहित कई दुकानें चल रही थीं, जबकि कोचिंग में सिर्फ पढ़ाई होती है। यह आरोप भी लगाया था कि सुरक्षा मानकों के लिए विभागों से एनओसी मिलने में बहुत परेशानी होती है।
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इस विरोध को देखते हुए एलडीए अधिकारियों ने कोचिंग संचालकों से कहा था कि उनके लिए हेल्पडेस्क बनाई जाएगी, जहां वे अपनी समस्याएं बता सकते हैं। जो इमारतें गलत सील हुई होंगी, उन्हें जांच के बाद खोल दिया जाएगा। इसके बाद एलडीए में हेल्प डेस्क बनाई गई और शपथ पत्र लेकर अब तक करीब 50 इमारतों की सील खोली जा चुकी है।
कोचिंगों की आड़ में कई को दी राहत
अलीगंज में मानचित्र के विपरीत बिना फायर सेफ्टी वाले कई भवनों को एक सप्ताह पहले एलडीए ने सील किया था। इनमें केंद्रीय भवन के सामने मकान तोड़कर बनाए गए कॉम्प्लेक्स के बेसमेंट में चल रहा नॉनवेज रेस्टोरेंट, सेक्टर-के में पप्पू स्टोर वाली इमारत में चल रही कोचिंग प्रमुख है। यहां पार्किंग के नाम पर एक गाड़ी खड़ी करने की जगह नहीं है, पर एलडीए ने मेहरबानी दिखाते हुए सील हटा दी है। ऐसी कई और इमारतों की सील खोल दी गई है, जहां शपथ पत्र के बाद भी भवन निर्माण के मानक पूरे नहीं हुए हैं।
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वादों की जारी रहेगी सुनवाई
एलडीए प्रशासन का कहना है कि जिन भवनों के खिलाफ उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धाराओं के तहत वाद लंबित हैं, उनकी सुनवाई और कार्रवाई जारी रहेगी। विहित प्राधिकारी संबंधित वादों में नियमानुसार निर्णय लेने और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे। शपथ पत्र देने से लंबित कानूनी प्रक्रिया पर प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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कोट
उन इमारतों की ही सील खोली जा रही है, जिनके मालिकों ने सुरक्षा मानक तय समय में पूरा करने का शपथ पत्र दिया है। यदि वे इन्हें पूरा नहीं करेंगे तो फिर कार्रवाई की जाएगी।
- प्रथमेश कुमार, वीसी एलडीए
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अग्निकांड के दो दिन बाद एलडीए और अग्निशमन विभाग ने बड़े पैमाने पर सीलिंग की। इस पर होटल संचालकों और कोचिंग वालों के साथ बैठक की गई। इसमें फायर सुरक्षा के उपाय पूरे करने पर जोर दिया गया और ऐसा न करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
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होटल संचालकों ने तो विरोध नहीं जताया, लेकिन कोचिंग वालों ने कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि कार्रवाई मनमाने तरीके से की जा रही है। जिस इमारत में आग लगी वह एनिमेशन सेंटर था और पेट शॉप सहित कई दुकानें चल रही थीं, जबकि कोचिंग में सिर्फ पढ़ाई होती है। यह आरोप भी लगाया था कि सुरक्षा मानकों के लिए विभागों से एनओसी मिलने में बहुत परेशानी होती है।
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इस विरोध को देखते हुए एलडीए अधिकारियों ने कोचिंग संचालकों से कहा था कि उनके लिए हेल्पडेस्क बनाई जाएगी, जहां वे अपनी समस्याएं बता सकते हैं। जो इमारतें गलत सील हुई होंगी, उन्हें जांच के बाद खोल दिया जाएगा। इसके बाद एलडीए में हेल्प डेस्क बनाई गई और शपथ पत्र लेकर अब तक करीब 50 इमारतों की सील खोली जा चुकी है।
कोचिंगों की आड़ में कई को दी राहत
अलीगंज में मानचित्र के विपरीत बिना फायर सेफ्टी वाले कई भवनों को एक सप्ताह पहले एलडीए ने सील किया था। इनमें केंद्रीय भवन के सामने मकान तोड़कर बनाए गए कॉम्प्लेक्स के बेसमेंट में चल रहा नॉनवेज रेस्टोरेंट, सेक्टर-के में पप्पू स्टोर वाली इमारत में चल रही कोचिंग प्रमुख है। यहां पार्किंग के नाम पर एक गाड़ी खड़ी करने की जगह नहीं है, पर एलडीए ने मेहरबानी दिखाते हुए सील हटा दी है। ऐसी कई और इमारतों की सील खोल दी गई है, जहां शपथ पत्र के बाद भी भवन निर्माण के मानक पूरे नहीं हुए हैं।
वादों की जारी रहेगी सुनवाई
एलडीए प्रशासन का कहना है कि जिन भवनों के खिलाफ उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धाराओं के तहत वाद लंबित हैं, उनकी सुनवाई और कार्रवाई जारी रहेगी। विहित प्राधिकारी संबंधित वादों में नियमानुसार निर्णय लेने और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे। शपथ पत्र देने से लंबित कानूनी प्रक्रिया पर प्रभाव नहीं पड़ेगा।
कोट
उन इमारतों की ही सील खोली जा रही है, जिनके मालिकों ने सुरक्षा मानक तय समय में पूरा करने का शपथ पत्र दिया है। यदि वे इन्हें पूरा नहीं करेंगे तो फिर कार्रवाई की जाएगी।
- प्रथमेश कुमार, वीसी एलडीए