{"_id":"6adccbf70e132233350d018f","slug":"cyber-crime-lucknow-news-c-13-1-lko1068-1980948-2026-10-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"साइबर अपराधों पर नियंत्रण में एआई और फॉरेंसिक की भूमिका निर्णायक : डॉ. राजेश्वर सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साइबर अपराधों पर नियंत्रण में एआई और फॉरेंसिक की भूमिका निर्णायक : डॉ. राजेश्वर सिंह
विज्ञापन
साइबर अपराधों पर नियंत्रण में एआई और फॉरेंसिक की भूमिका निर्णायक : डॉ. राजेश्वर सिंह
लखनऊ। सरोजनीनगर स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टेक संगम 2026’ में कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई), साइबर फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों के भविष्य पर मंथन हुआ। सम्मेलन में पुस्तक विमोचन के साथ ‘लेक्स क्यू लैब’ की आधारशिला रखी गई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डीपफेक और पहचान चोरी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत वैज्ञानिक जांच प्रणाली पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 2017 में मात्र एक फॉरेंसिक लैब थी, जबकि आज 12 क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं तैयार हैं और 6 अन्य अंतिम चरण में हैं।
सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि सरोजनीनगर में इस स्तर का आयोजन गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि एआई और आधुनिक तकनीक का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को सुलभ बनाना और नागरिक अधिकारों की रक्षा होना चाहिए।
विज्ञापन
I4सी के आंकड़ों का हवाला देते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतें 2021 में 2.63 लाख से बढ़कर 2025 में 24.03 लाख हो गईं, वहीं धोखाधड़ी की राशि 551 करोड़ से बढ़कर 22,495 करोड़ रुपये पहुंच गई। ऐसे में साइबर फॉरेंसिक जांच एजेंसियों को सशक्त बनाने में अहम साबित होगी। कार्यक्रम में देश-विदेश के कई शीर्ष विशेषज्ञ व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
विज्ञापन
लखनऊ। सरोजनीनगर स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टेक संगम 2026’ में कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई), साइबर फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों के भविष्य पर मंथन हुआ। सम्मेलन में पुस्तक विमोचन के साथ ‘लेक्स क्यू लैब’ की आधारशिला रखी गई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डीपफेक और पहचान चोरी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत वैज्ञानिक जांच प्रणाली पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 2017 में मात्र एक फॉरेंसिक लैब थी, जबकि आज 12 क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं तैयार हैं और 6 अन्य अंतिम चरण में हैं।
विज्ञापन
सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि सरोजनीनगर में इस स्तर का आयोजन गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि एआई और आधुनिक तकनीक का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को सुलभ बनाना और नागरिक अधिकारों की रक्षा होना चाहिए।
विज्ञापन
I4सी के आंकड़ों का हवाला देते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतें 2021 में 2.63 लाख से बढ़कर 2025 में 24.03 लाख हो गईं, वहीं धोखाधड़ी की राशि 551 करोड़ से बढ़कर 22,495 करोड़ रुपये पहुंच गई। ऐसे में साइबर फॉरेंसिक जांच एजेंसियों को सशक्त बनाने में अहम साबित होगी। कार्यक्रम में देश-विदेश के कई शीर्ष विशेषज्ञ व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।