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Lucknow News: टैक्स चोरी के लिए डिलीवर वैन को सरकारी वाहन के रूप में कर रहे थे पंजीकृत, बाबुओं ने पकड़ा, वसूला टैक्स
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टैक्स चोरी के लिए डिलीवर वैन को सरकारी वाहन के रूप में कर रहे थे पंजीकृत, बाबुओं ने पकड़ा, वसूल
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टैक्स बचाने के लिए की गई कारस्तानी, आरटीओ कर्मियों ने पकड़ा
ऑटो अप्रवूल व्यवस्था में ऐसी गड़बड़ियों पर अंकुश लगाना होगा मुश्किल
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। आरटीओ की फेसलेस सेवाएं मुसीबत का सबब बन रही हैं। डिलीवरी वैन का पंजीकरण सरकारी वाहन के रूप में दर्ज किया जा रहा था, लेकिन ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ कार्यालय ने यह गलती पकड़ी। इसके बाद वाहन का दोबारा पंजीकरण करवाकर टैक्स वसूला गया।
ऑटो अप्रवूल व्यवस्था लागू होने की स्थिति में वाहन के पंजीकरण के बाद अप्रूलव के लिए आवेदक को आरटीओ नहीं आना होता। इससे राजस्व को चूना लग जाता। लेकिन व्यवस्था अभी लागू नहीं है, इसलिए आवेदक की कारस्तानी आरटीओ ने पकड़ ली। ऐसे में डीलर की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है, लिहाजा मामले को जांच के लिए परिवहन विभाग मुख्यालय भी भेजा गया है। दरअसल, मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज मॉर्थ ने परिवहन विभाग की 100 सेवाओं को फेसलेस कर दिया है। इससे आवेदकों को आरटीओ आने की आवश्यकता से मुक्त कर दिया गया है। इसमें वाहनों के पंजीकरण को फेसलेस कर ऑटो अप्रवूल की जिम्मेदारी डीलरों को दी जा रही है। जिसका विरोध इन दिनों परिवहनकर्मी व अधिकारी कर रहे हैं। इसी बीच ट्रांसपोर्टनगर स्थित आरटीओ में अस्थायी पंजीकरण पर एक डिलीवरी वैन का आवेदन आया। यह आवेदन ग्रीन सोलरटेक की ओर से किया गया था। टाटा एस की डिलीवरी वैन का चेसिस नंबर एमएटी559068टीजेडई13194 था। इसमें ऑनरशिप टाइप में 'सेंट्रल गर्वनमेंट' भरा गया था। टाटा एस की गाड़ी को सेंट्रल गवर्नमेंट के रूप आवेदन देखकर आरटीओ कर्मियों का माथा ठनक गया। तत्काल इसकी जानकारी मुख्यालय को भेजी गई। साथ ही आवेदन के अप्रवूल को भी रोक दिया गया। अब वाहन को नए सिरे से व्यावसायिक वाहन के रूप में दर्ज टैक्स जमा करने की कार्रवाई की जा रही है।
ऑटो अप्रवूल लागू होने पर बढ़ेंगे फ्राॅड
मॉर्थ ने अभी सिर्फ आवेदन प्रक्रिया को ही फेसलेस किया है, लेकिन परिवहन विभाग की ओर से सेवाओं के साथ ही ऑटो अप्रवूल का ड्राफ्ट भी तैयार किया है। इससे आवेदक या डीलर खुद अप्रूव कर लेगा, जिससे आरटीओ की भूमिका ही खत्म हो जाएगी। एनआईसी का पोर्टल कागजी जांच के बाद इसको अप्रूव करेगा। इसके बाद स्मार्ट आरसी वाहन मालिक के घर पहुंच जाएगी। इसके लागू होने पर फ्राॅड बढ़ेंगे, ऐसी आशंका जताई जा रही है। चूंकि स्मार्ट आरसी कार्ड पहली अगस्त से बनने शुरू होंगे, इसलिए ऑटो अप्रवूल को अभी लागू नहीं किया जा सका है।
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सवाल: आखिर मोटरयान अधिनियम की अनदेखी क्यों
परिवहनकर्मी फेसलेस व्यवस्था का विरोध नहीं कर रहे हैं, उन्हें ऑटो अप्रूवल से नाराजगी है। इससे विभाग के अस्तित्व पर संकट पैदा हो जाएगा। यह मोटरयान अधिनियम की खुलेआम अनदेखी है। अफसरों के अधिकारों का हनन क्यों किया जा रहा है, यह बड़ा सवाल है। आरटीओ के बाबुओं की क्या भूमिका रह जाएगी, इस सवाल का जवाब भी शासन के पास नहीं है। इतना ही नहीं फ्राॅड होने की स्थिति में कानूनी दांवपेंच व कोर्ट-कचहरी से काैन जूझेगा, यह भी नहीं बताया जा रहा है। ऑटो अप्रवूल व्यवस्था डीलरों की मनमानी का जरिया बनेगी।
राजस्व को भी लगेगी चपत
एक व्यावसायिक वाहन से पंद्रह वर्ष के अनुसार रोड टैक्स जमा किया जाता है। सरकारी वाहन के रूप में दर्ज वाहन टैक्स से मुक्त होते हैं। ऐसे में अगर कोई फर्म या डीलर द्वारा किसी गाड़ी को सरकारी वाहन के रूप में दर्ज किया जाएगा तो इससे राजस्व को चपत लगेगी। साथ ही सरकारी वाहन का दर्जा होने से गाड़ी के बेजा इस्तेमाल के मामले भी बढ़ेंगे।
ऑटो अप्रवूल व्यवस्था में ऐसी गड़बड़ियों पर अंकुश लगाना होगा मुश्किल
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। आरटीओ की फेसलेस सेवाएं मुसीबत का सबब बन रही हैं। डिलीवरी वैन का पंजीकरण सरकारी वाहन के रूप में दर्ज किया जा रहा था, लेकिन ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ कार्यालय ने यह गलती पकड़ी। इसके बाद वाहन का दोबारा पंजीकरण करवाकर टैक्स वसूला गया।
ऑटो अप्रवूल व्यवस्था लागू होने की स्थिति में वाहन के पंजीकरण के बाद अप्रूलव के लिए आवेदक को आरटीओ नहीं आना होता। इससे राजस्व को चूना लग जाता। लेकिन व्यवस्था अभी लागू नहीं है, इसलिए आवेदक की कारस्तानी आरटीओ ने पकड़ ली। ऐसे में डीलर की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है, लिहाजा मामले को जांच के लिए परिवहन विभाग मुख्यालय भी भेजा गया है। दरअसल, मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज मॉर्थ ने परिवहन विभाग की 100 सेवाओं को फेसलेस कर दिया है। इससे आवेदकों को आरटीओ आने की आवश्यकता से मुक्त कर दिया गया है। इसमें वाहनों के पंजीकरण को फेसलेस कर ऑटो अप्रवूल की जिम्मेदारी डीलरों को दी जा रही है। जिसका विरोध इन दिनों परिवहनकर्मी व अधिकारी कर रहे हैं। इसी बीच ट्रांसपोर्टनगर स्थित आरटीओ में अस्थायी पंजीकरण पर एक डिलीवरी वैन का आवेदन आया। यह आवेदन ग्रीन सोलरटेक की ओर से किया गया था। टाटा एस की डिलीवरी वैन का चेसिस नंबर एमएटी559068टीजेडई13194 था। इसमें ऑनरशिप टाइप में 'सेंट्रल गर्वनमेंट' भरा गया था। टाटा एस की गाड़ी को सेंट्रल गवर्नमेंट के रूप आवेदन देखकर आरटीओ कर्मियों का माथा ठनक गया। तत्काल इसकी जानकारी मुख्यालय को भेजी गई। साथ ही आवेदन के अप्रवूल को भी रोक दिया गया। अब वाहन को नए सिरे से व्यावसायिक वाहन के रूप में दर्ज टैक्स जमा करने की कार्रवाई की जा रही है।
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ऑटो अप्रवूल लागू होने पर बढ़ेंगे फ्राॅड
मॉर्थ ने अभी सिर्फ आवेदन प्रक्रिया को ही फेसलेस किया है, लेकिन परिवहन विभाग की ओर से सेवाओं के साथ ही ऑटो अप्रवूल का ड्राफ्ट भी तैयार किया है। इससे आवेदक या डीलर खुद अप्रूव कर लेगा, जिससे आरटीओ की भूमिका ही खत्म हो जाएगी। एनआईसी का पोर्टल कागजी जांच के बाद इसको अप्रूव करेगा। इसके बाद स्मार्ट आरसी वाहन मालिक के घर पहुंच जाएगी। इसके लागू होने पर फ्राॅड बढ़ेंगे, ऐसी आशंका जताई जा रही है। चूंकि स्मार्ट आरसी कार्ड पहली अगस्त से बनने शुरू होंगे, इसलिए ऑटो अप्रवूल को अभी लागू नहीं किया जा सका है।
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सवाल: आखिर मोटरयान अधिनियम की अनदेखी क्यों
परिवहनकर्मी फेसलेस व्यवस्था का विरोध नहीं कर रहे हैं, उन्हें ऑटो अप्रूवल से नाराजगी है। इससे विभाग के अस्तित्व पर संकट पैदा हो जाएगा। यह मोटरयान अधिनियम की खुलेआम अनदेखी है। अफसरों के अधिकारों का हनन क्यों किया जा रहा है, यह बड़ा सवाल है। आरटीओ के बाबुओं की क्या भूमिका रह जाएगी, इस सवाल का जवाब भी शासन के पास नहीं है। इतना ही नहीं फ्राॅड होने की स्थिति में कानूनी दांवपेंच व कोर्ट-कचहरी से काैन जूझेगा, यह भी नहीं बताया जा रहा है। ऑटो अप्रवूल व्यवस्था डीलरों की मनमानी का जरिया बनेगी।
राजस्व को भी लगेगी चपत
एक व्यावसायिक वाहन से पंद्रह वर्ष के अनुसार रोड टैक्स जमा किया जाता है। सरकारी वाहन के रूप में दर्ज वाहन टैक्स से मुक्त होते हैं। ऐसे में अगर कोई फर्म या डीलर द्वारा किसी गाड़ी को सरकारी वाहन के रूप में दर्ज किया जाएगा तो इससे राजस्व को चपत लगेगी। साथ ही सरकारी वाहन का दर्जा होने से गाड़ी के बेजा इस्तेमाल के मामले भी बढ़ेंगे।

टैक्स चोरी के लिए डिलीवर वैन को सरकारी वाहन के रूप में कर रहे थे पंजीकृत, बाबुओं ने पकड़ा, वसूल