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नेपाल में चुनावी रंग: होली के बीच मित्र देश में लोकतंत्र का उल्लास, भारत के प्रति विद्वेष बस ध्रुवीकरण के लिए

अभिषेक राज, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Mon, 02 Mar 2026 02:32 PM IST
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सार

होली के बीच नेपाल में आम चुनाव को लेकर उत्साह है। युवा और महिलाएं स्थिर व बेहतर सरकार चाहती हैं। प्रमुख दलों के नेता विकास, स्थिरता और सुधार के मुद्दों पर चुनाव मैदान में हैं। भारत-चीन संबंध भी चर्चा में हैं, लेकिन मतदाता मुख्य रूप से नेपाल की तरक्की पर केंद्रित हैं।

Election fever in Nepal: Amid Holi, a friendly nation celebrates democracy, while hostility towards India serv
नेपाल में चुनावी रंग - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

होली के बीच मित्र देश नेपाल में लोकतंत्र का उल्लास है। चुनावी रंग है, राजनीति की रंगत भी। जेन-जी आंदोलन से आगे निकलकर युवा नए और बेहतर नेपाल की उम्मीद में पांच मार्च को मतदान के लिए तैयार हैं। चुनाव में अहम हिस्सेदारी निभाने वाली महिलाएं भी इस बार बेहतर और स्थिर सरकार चाहती हैं।

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नेपाल चुनाव में इस बार चल क्या रहा है, मतदाता चाहते क्या हैं, मुद्दे क्या हैं, मतदान के प्रति रुझान क्या है और इन सब के बीच भारत के प्रति आम नेपाली का नजरिया क्या है? यह सब जानने शनिवार को हम बहराइच जिले के रुपईडीहा बॉर्डर से नेपाल के लुंबिनी प्रदेश के सीमावर्ती जिला बांके पहुंचे। झंडा, बैनर और रैली से इतर माहौल शांत दिखा। अलबत्ता, सेना की गश्त करती टुकड़ी और निर्वाचन प्रहरी (म्यादी पुलिस) की टुकड़ी बता रही थी कि नेपाल में चुनाव होने वाला है।
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शनिवार को अवकाश के कारण यूं तो बांके जिले का प्रमुख केंद्र नेपालगंज शांत रहा। अलबत्ता, चार प्रमुख पार्टियों राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी), नेपाली कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के साथ ही राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के चुनाव कार्यालयों में रंगत दिखी।

झंडे-बैनर से पटे इन कार्यालयों में बैठे समर्थक हमें देखते ही उत्सुकता से पूछ पड़े...तिमी भारतबाट आएका हौ...(आप भारत से आए हैं...)। इस बीच उनके चेहरे पर अपनापन का भाव हमें तसल्ली देने वाला रहा। यहीं से नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों सुर्खेत व जुमला के लिए बसें और हवाई सेवाएं उपलब्ध होती हैं। ऐसे में इस समृद्ध बाजार से हमें मधेश के तराई और पहाड़ी क्षेत्रों की चुनावी नब्ज टटोलने में भी मदद मिली।
 

यहां से हम इंदर गांव पहुंचे, जहां मुस्लिम आबादी के बीच हिंदू सम्मेलन हो रहा था। हिंदू राष्ट्र नेपाल के झंडे-बैनर हर तरफ दिखे। हिंदू स्वयंसेवक संघ (एचएसएस) की कृष्णा देवी कार्यक्रम में मौजूद रहीं। उन्होंने हमसे बस इतना कहा...हामी राम्रो नेपाल चाहन्छौं। स्थिर नेपाल चाहन्छौं। हामीलाई पनि विकास चाहिन्छ। देशका युवा र महिलाहरूले यसलाई राम्रोसंग बुझिसकेका छन (हम बेहतर नेपाल चाहते हैं।

स्थिर नेपाल चाहते हैं। हमें भी विकास चाहिए। देश के युवा व महिलाएं इसे अच्छी तरह से समझ चुकी हैं।) कृष्णा देवी जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर चिंतित दिखीं। उन्होंने बेबाकी से कहा, इन बाहर से आने वाले लोगों के कारण हमारी सभ्यता, संस्कृति और रीति-रिवाज पर खतरा मंडरा रहा है।

यही लोग हमारे रोटी-बेटी के रिश्तों के लिए भी घातक हैं। तुष्टीकरण के कारण इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हम इसके विरोध में हैं। नेपाल में इसके लिए जनजागरण जरूरी है। यहीं की सलमा, मकदुम शाह व नूरूल ने स्थानीय प्रत्याशी के इतर हमसे बस प्रधानमंत्री के चेहरे पर बात की।

यहां से हम बलरामपुर से लगे दांग जिले में पहुंचे। यहां चुनाव का उत्साह था। लोग चुनावी चर्चा में बेबाकी से बोले भी। यहां के विधुन गुरुंग से हमने नेपाल के भारत व चीन से रिश्ते पर बात करनी चाही। उन्होंने इन्कार कर दिया। कहा, हम सिर्फ नेपाल और नेपाल की तरक्की की चर्चा चाहते हैं। वैसे नेपाल के लिए जितना भारत अहम है, उतना ही चीन भी। अलबत्ता, नूरूल का मत कुछ अलग रहा। वह भारत को संदेह की दृष्टी से देखते हैं। विस्तारवाद का आरोप लगाकर चीन व बांग्लादेश के लिए ज्यादा अहम मानते हैं।
 

मधेश के साथ इन पर है पूरे नेपाल की नजर

  1. बालेन शाह : राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की ओर से प्रधानमंत्री का चेहरा हैं। काठमांडू के मेयर रह चुके हैं। रैपर व इंजीनियर के रूप में युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं। बालेन भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे पर चुनाव लड़ रहे हैं। इनका प्रभाग हिमाल से लेकर मधेश तक है।
  2. गगन थापा : नेपाली कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री चेहरा हैं। थापा ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की जगह ली है। चुनाव में शासन में जवाबदेही और सुधार का वादा कर रहे हैं।
  3. केपी शर्मा ओली : कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री हैं। पिछले साल (सितंबर 2025) जेन जी आंदोलन के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। अब वह नेपाल में स्थिरता के नाम पर सत्ता में वापसी का प्रयास कर रहे हैं।
  4. राजेंद्र प्रसाद लिंगडेन : राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) के अध्यक्ष हैं। पार्टी ने इन्हें ही प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया है। इनके मुख्य मुद्दे नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने, राजशाही की पुनर्स्थापना और प्रांतीय संरचना को समाप्त करना है।
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