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Lucknow News: सिविल अस्पताल में शुरू हुई चार बेड की स्ट्रोक यूनिट
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लखनऊ। राजधानी के मरीजों के लिए राहत की खबर है। जिले के दूसरे सरकारी अस्पताल सिविल अस्पताल में चार बेड की अत्याधुनिक स्ट्रोक यूनिट शुरू कर दी गई है। इससे स्ट्रोक के मरीजों को इलाज के लिए दूसरे बड़े संस्थानों में रेफर करने की जरूरत कम होगी। यूनिट में मरीजों को एक ही छत के नीचे जरूरी उपचार और निगरानी की सुविधा मिलेगी। अस्पताल निदेशक का कहना है कि मरीजों की संख्या के हिसाब से यूनिट की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी।
400 बेड क्षमता वाले सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में रोजाना 100 से अधिक मरीज भर्ती होते हैं। अस्पताल में न्यूरो सर्जन की तैनाती के बाद स्ट्रोक यूनिट शुरू की गई है। इससे पहले राजधानी में बलरामपुर अस्पताल में स्ट्रोक यूनिट संचालित थी। विशेषज्ञ की सुविधा नहीं होने के कारण सिविल अस्पताल में स्ट्रोक के मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता था। बड़े संस्थानों में मरीजों का दबाव अधिक होने से कई बार इलाज मिलने में देरी होती थी। नई यूनिट से इस समस्या का समाधान होगा।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, स्ट्रोक यूनिट के चारों बेड ऑक्सीजन सपोर्ट से लैस होंगे। अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा पहले से उपलब्ध है, जिससे मरीज के स्ट्रोक की स्थिति का तत्काल आकलन किया जा सकेगा। जरूरत के अनुसार उपचार शुरू करने में भी आसानी होगी।
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सिविल अस्पताल के निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने बताया कि स्ट्रोक के मरीजों के लिए गोल्डन आवर बेहद महत्वपूर्ण होता है। समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचाने के साथ उसे स्थायी अपंगता से भी बचाया जा सकता है।
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400 बेड क्षमता वाले सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में रोजाना 100 से अधिक मरीज भर्ती होते हैं। अस्पताल में न्यूरो सर्जन की तैनाती के बाद स्ट्रोक यूनिट शुरू की गई है। इससे पहले राजधानी में बलरामपुर अस्पताल में स्ट्रोक यूनिट संचालित थी। विशेषज्ञ की सुविधा नहीं होने के कारण सिविल अस्पताल में स्ट्रोक के मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता था। बड़े संस्थानों में मरीजों का दबाव अधिक होने से कई बार इलाज मिलने में देरी होती थी। नई यूनिट से इस समस्या का समाधान होगा।
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अस्पताल प्रशासन के अनुसार, स्ट्रोक यूनिट के चारों बेड ऑक्सीजन सपोर्ट से लैस होंगे। अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा पहले से उपलब्ध है, जिससे मरीज के स्ट्रोक की स्थिति का तत्काल आकलन किया जा सकेगा। जरूरत के अनुसार उपचार शुरू करने में भी आसानी होगी।
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सिविल अस्पताल के निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने बताया कि स्ट्रोक के मरीजों के लिए गोल्डन आवर बेहद महत्वपूर्ण होता है। समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचाने के साथ उसे स्थायी अपंगता से भी बचाया जा सकता है।