सुना है क्या: नेताओं की कैसे होगी पहचान, चचा की चर्चा चरम पर; 'थोड़ा सम्मान करें' के पढ़ें किस्से
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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विस्तार
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'ऊर्जा मिलने की उम्मीद को झटका' की कहानी। इसके अलावा 'मुखिया भाजपा के, स्वागत में जुटा विभाग' और 'और शुरू हो गई पदों की अदला-बदली' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
नेताओं की कैसे होगी पहचान
प्रदेश के एक प्रमुख और पुराने विश्वविद्यालय में छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। छात्र आंदोलन पर जहां विश्वविद्यालय ने सख्त कार्रवाई की। वहीं, छात्रों से जुड़ी एक अधिकारी ने घोषणा कर दी कि नए सत्र में नेताओं को छात्रावास ही आवंटित नहीं करेंगी। तपाक से किसी ने सवाल किया कि आप आम छात्रों में नेताओं की पहचान कैसे करेंगी? इस पर अधिकारी ने कहा कि हम चेहरा पढ़कर ही पहचान लेंगे कि कौन नेता है। इस पर खूब ठहाके लगे।
चचा की चर्चा चरम पर
प्रदेश के चिकित्सा संस्थान में भूरे बाल वाले चचा की चर्चा चरम पर है। वह एक कंपनी को एक्सटेंशन दिलाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। अचानक भेद खुल गया। ऊपर से फटकार मिली। संदेशा चचा तक पहुंचा और वह गायब हो गए। ऐसे में पूरे परिसर में एक ही चर्चा है कि चचा अचानक गायब क्यों हो गए हैं?
थोड़ा सम्मान करें
पिछले दिनों एक एआरटीओ के ठिकानों पर पड़े छापों में 35 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा वायरल है तो दूसरी तरफ ब्यूरोक्रेसी में भी ये मुद्दा चर्चा का विषय है। ऐसे ही एक गलियारे के कमरे में जब ये चर्चा छिड़ी तो एक साहब बोले, उनसे वरिष्ठ पदों पर बैठे अफसरों की छानबीन की जाए तो इतना ही माल मिलेगा।
तभी दूसरे बोले, सीनियरों की बेइज्जती न करें। उनके कद को छोटा न करें। गाजियाबाद, नोएडा, आगरा, कानपुर, मेरठ, मथुरा जैसे कई जिलों के नाम गिनाते हुए कहा कि यहां पर काबिज रहे कई अफसरों की हैसियत को करोड़ों में आंकना बड़ी भूल होगी।