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Lucknow: जन्म से नहीं, माइग्रेशन से बढ़ी लखनऊ की आबादी, 15 साल में बढ़ी करीब 16 लाख जनसंख्या
Sat, 11 Jul 2026 12:59 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
समीउद्दीन नीलू, अमर उजाला, लखनऊ
समीउद्दीन नीलू, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Sat, 11 Jul 2026 12:59 PM IST
सार
आसपास के जिलों से लोग रोजगार और शिक्षा की तलाश में पहुंच रहे हैं। 15 साल में शहर की जनसंख्या करीब 16 लाख बढ़ गई है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Adobestock
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विस्तार
राजधानी लखनऊ का चेहरा अब केवल जन्म दर से नहीं, बल्कि माइग्रेशन से भी बदल रहा है। डेढ़ दशक में लखनऊ उन शहरों में शामिल हो गया है, जहां आबादी बढ़ाने में दूसरे जिलों और राज्यों से आकर बसने वाले लोगों की बड़ी भूमिका रही है।
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2027 की जनगणना के लिए करीब 61.99 लाख लोगों की हाउस लिस्टिंग हुई है। वहीं, 2011 की जनगणना में जिले की आबादी 45.89 लाख थी। इससे करीब 16 लाख लोगों की बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल जन्म दर के आधार पर इतनी तेज वृद्धि संभव नहीं। राजधानी में रोजगार, उच्च शिक्षा, चिकित्सा सुविधाएं, सरकारी कार्यालय, आईटी और सेवा क्षेत्र के विस्तार ने लोगों को आकर्षित किया है।
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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार, उत्तर प्रदेश में प्रजनन दर लगातार घट रही है। ऐसे में लखनऊ जैसे बड़े शहरों की आबादी बढ़ने का प्रमुख कारण माइग्रेशन है।
माइग्रेशन के कारण और स्रोत : हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी, उन्नाव, रायबरेली, अयोध्या, सुल्तानपुर, गोंडा और पूर्वांचल के कई जिलों से लोग लखनऊ आए हैं। दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कारोबार और पढ़ाई के लिए यहां पहुंचे और स्थायी रूप से बस गए। राजधानी में आईटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, निर्माण और सेवा क्षेत्र के विस्तार ने इस रफ्तार को और तेज किया है।
आबादी का दबाव: शहरी क्षेत्र में जोन-6 में 8.60 लाख, जोन-3 में 7.26 लाख, जोन-8 में 6.46 लाख और जोन-7 में 5.48 लाख लोगों का कवरेज दर्ज हुआ है। ग्रामीण क्षेत्र में मोहनलालगंज (4.63 लाख) और मलिहाबाद (3.95 लाख) सबसे आगे हैं।
चुनौतियां भी बढ़ीं: आबादी के साथ चुनौतियां भी बढ़ी हैं। सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ रहा है। नए आवासीय क्षेत्रों में पानी, सीवर, पार्किंग और सार्वजनिक परिवहन की मांग तेजी से बढ़ी है।