सुना है क्या: दोस्ती निभाने के चक्कर में फंस गए डॉक्टर साहब की कहानी, पूर्व मुखिया का सज रहा दरबार के किस्से
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
विस्तार
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'दोस्ती निभाने के चक्कर में फंस गए डॉक्टर साहब' की कहानी। इसके अलावा 'पूर्व मुखिया का सज रहा दरबार' और 'इस बार नहीं माफी'के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
दोस्ती निभाने के चक्कर में फंस गए डॉक्टर साहब
आयुर्वेद विभाग सुर्खियों में है। पहले मुखिया सुर्खियों में रहे। अब उनके मातहत के कारनामे सामने आए। इस विभाग के डॉक्टर साहब दोस्ती निभाने के चक्कर में फंस गए हैं। उन्हें सपना दिखाया गया कि घर वापसी का रास्ता यह दोस्त ही दिखा सकता है। फिर क्या था नई दोस्ती को हकीकत में बदलने के लिए वह अपनी ड्यूटी छोड़कर पड़ोसी जिले में चले गए।
वह दोस्त को पड़ोसी जिले में कार्यभार ग्रहण कराएं। यहां उनकी एक पुरानी दोस्त भी थीं। पुरानी दोस्त को नई दोस्ती रास नहीं आई। फिर क्या था, उन्होंने फोटो वायरल कर दिया। अब विभाग इस माथापच्ची में पड़ा है कि अपनी ड्यूटी छोड़कर दूसरे को कार्यभार ग्रहण कराने के आरोपी डॉक्टर के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए?
पूर्व मुखिया का सज रहा दरबार
प्रदेश के एक पुराने व प्रमुख विश्वविद्यालय के पूर्व मुखिया का राजधानी प्रेम काफी चर्चा में है। वे राजधानी से दूर दूसरे प्रदेश में फिलहाल तैनात हैं लेकिन उनका राजधानी से प्रेम समाप्त नहीं हो रहा है। वे अक्सर राजधानी पहुंच रहे हैं और खास यह कि यहां पर उनका पूरा दरबार भी सज रहा है। उनके खैरख्वाह के साथ-साथ वर्तमान शासन-प्रशासन से थोड़ा खिन्न लोग भी पहुंच रहे हैं। पूर्व मुखिया से अपना गिला-शिकवा कह रहे हैं। वहीं पूर्व मुखिया भी यहां से जाने के बाद पूरा अपडेट रख रहे हैं।
इस बार नहीं माफी
शहरों को जाम से मुक्त कराने के लिए बॉस अड़ गए हैं। मीटिंग में साफ कह दिया कि किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। इस बार निलंबन से कम सजा नहीं मिलेगी। बॉस के तेवर देख मातहतों की घिग्गी बंध गई है। आनन-फानन में जिलों में कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है।
संदेश नीचे तक गया है, इसलिए अतिक्रमण करने वालों से वसूली बंद होना तय है। खैर, पुलिस तो हाईकमान का हुक्म पूरा कर लेगी लेकिन बाकी विभागों को सही रास्ता कौन दिखाएगा। जिनका जिम्मा सड़कों की कमियों को दुरस्त करने का है, उन पर तो किसी का जोर चलता नहीं।