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सुना है क्या: 'तो सियासी कर्ज उतारेंगे माननीय', 'अब तो अफसरों को भी खा रहा भेड़िया' के पढ़ें किस्से

अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Thu, 01 Jan 2026 11:44 AM IST
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सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

Have you heard these stories: "The honorable leaders will repay their political debts," and "Now the wolf is e
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'तो सियासी कर्ज उतारेंगे माननीय' की कहानी। इसके अलावा 'आसमान से गिरे, खजूर पर अटके' और 'अब तो अफसरों को भी खा रहा भेड़िया' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
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...तो सियासी कर्ज उतारेंगे माननीय

सियासी गलियारों में इन दिनों भगवा दल के नए दफ्तर के निर्माण की खूब बातें हो रही हैं। चर्चा है कि दफ्तर बनाने की जिम्मेदारी मैनेजमेंट गुरू नाम से विख्यात उच्च सदन वाले एक माननीय ने स्वेच्छा से ली है। वैसे भी माननीय को इस फील्ड में महारत है। कहा जा रहा है कि यह नया प्रोजेक्ट उन्होंने अपना सियासी भविष्य संवारने के लिए लिया है। उनकी खासियत रही है कि वह जिस दल से माननीय रहते हैं उसके लिए दिल खोलकर कुछ न कुछ बनाते जरूर हैं। इसी लिहाज से उन्होंने अब यह भवन बनाकर भगवा दल का कर्ज उतारने की ठान ली है।
 
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आसमान से गिरे, खजूर पर अटके

सूबे के एक माफिया आजकल सुर्खियों में हैं। कोडीन कांड में उनका नाम क्या उछला, घूम-घूमकर खुद को महात्मा बता रहे हैं। खुद को क्लीनचिट भी दे डाली लेकिन पुरानी फितरत ने पीछा नहीं छोड़ा। इस बार नाम उछला तो मामला आलाकमान तक पहुंच गया। सरेआम गुंडई का वीडियो देखने के बाद छांटने का आदेश दिया गया। 

सुना है कि राजधानी में उनकी सल्तनत पर भी गाज गिराने की तैयारी है। जहां कमजोरों को दबाकर काबिज हैं, उसका नक्शा निकालकर माफिया का नक्शा बिगाड़ने का हुक्म दिया जा चुका है। इस बार खाकी भी उन पर धुरंधर कार्रवाई करने जा रही है।
 

अब तो अफसरों को भी खा रहा भेड़िया

भेड़ियों का आतंक है। टीमें लगी हैं लेकिन हमलों और मौतों का सिलसिला जारी है। सरकार ने भी संदेश दे दिया है कि भेड़िये आम लोगों को खाएंगे तो अफसरों को भी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। 

इसका उदाहरण भी पेश कर दिया गया है। अधिकारियों के बीच भी खलबली है कि भेड़िये आम लोगों को ही नहीं, हमें भी खा जाएंगे। अहम तैनाती से साइड लाइन कर दिए जाएंगे। इसलिए इन्हें निपटाने में सक्रियता दिखाने में ही भलाई है।
 
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