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Lucknow News: 150 गांवों में पहुंचेगा वंदे मातरम का जयघोष, ग्रामीण करेंगे मंचन
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रति शंकर त्रिपाठीअध्यक्ष बीएनए
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अभिषेक सहज
लखनऊ। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतेंदु नाट्य अकादमी की ओर से एक अनूठा आयोजन 2026 में शुरू होने जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के 150 गांवों में वंदे मातरम से जुड़ी कहानी का मंचन किया जाएगा। खास बात यह है कि इस मंचन में अभिनय कोई नामी कलाकार नहीं करेंगे बल्कि उस गांव के ग्रामीण ही करेंगे। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
भारतेंदु नाट्य अकादमी अपना स्वर्ण जयंती वर्ष मना रही है। बीएनए के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वंदे मातरम गीत को जन-जन से जोड़ने और उनमें देशभक्ति की भावना प्रस्फुटित करने के उद्देश्य से इस गीत के पीछे की कहानी से ग्रामीणों को जोड़ा जाएगा। अमर उजाला के साथ मंगलवार को खास बातचीत में बीएनए के अध्यक्ष रतिशंकर त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश के 150 गांवों का चयन जल्द ही कर लिया जाएगा। इसके बाद शहर के रंगकर्मियों की एक टीम तैयार कर 20 मिनट का मंचन तैयार किया जाएगा।
यह टीम गांवों में जाकर ग्रामीणों को वंदे मातरम गीत के बारे में बताएगी और मंचन के लिए ग्रामीणों को प्रशिक्षण देगी। यही ग्रामीण इस कहानी को मंच पर उतारेंगे। जो ग्रामीण प्रशिक्षण प्राप्त कर लेंगे, वे ही आसपास के गांवों में जाकर वहां के भी ग्रामीणों को प्रशिक्षित करेंगे। मंचन का यह सिलसिला अनवरत पूरे वर्ष चलेगा और प्रदेश के 150 गांवों में मंचन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया मेें खर्च का वहन भी भारतेंदु नाट्य अकादमी ही अन्य स्रोतों से करेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान जन गण मन के बारे में देशवासियों को जितनी जानकारी है, उतनी जानकारी वंदे मातरम के बारे में नहीं है। इस गीत ने किस तरह से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को प्रभावित किया और क्रांतिकारियों को उत्साहित किया, इसकी कहानी कम लोगों को ही पता है। ऐसे में ग्रामीण अंचलों के लोग भी देशप्रेम की इस अनूठी कहानी को जान सकें, इसके लिए यह अनूठा प्रयास किया जा रहा है। यह एक तरह का नवाचार है जिसमें वंदे मातरम की उत्पत्ति, भूमिका और इसमें छिपी राष्ट्रीय भावना को प्रसारित किया जाएगा।
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लखनऊ। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतेंदु नाट्य अकादमी की ओर से एक अनूठा आयोजन 2026 में शुरू होने जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के 150 गांवों में वंदे मातरम से जुड़ी कहानी का मंचन किया जाएगा। खास बात यह है कि इस मंचन में अभिनय कोई नामी कलाकार नहीं करेंगे बल्कि उस गांव के ग्रामीण ही करेंगे। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
भारतेंदु नाट्य अकादमी अपना स्वर्ण जयंती वर्ष मना रही है। बीएनए के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वंदे मातरम गीत को जन-जन से जोड़ने और उनमें देशभक्ति की भावना प्रस्फुटित करने के उद्देश्य से इस गीत के पीछे की कहानी से ग्रामीणों को जोड़ा जाएगा। अमर उजाला के साथ मंगलवार को खास बातचीत में बीएनए के अध्यक्ष रतिशंकर त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश के 150 गांवों का चयन जल्द ही कर लिया जाएगा। इसके बाद शहर के रंगकर्मियों की एक टीम तैयार कर 20 मिनट का मंचन तैयार किया जाएगा।
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यह टीम गांवों में जाकर ग्रामीणों को वंदे मातरम गीत के बारे में बताएगी और मंचन के लिए ग्रामीणों को प्रशिक्षण देगी। यही ग्रामीण इस कहानी को मंच पर उतारेंगे। जो ग्रामीण प्रशिक्षण प्राप्त कर लेंगे, वे ही आसपास के गांवों में जाकर वहां के भी ग्रामीणों को प्रशिक्षित करेंगे। मंचन का यह सिलसिला अनवरत पूरे वर्ष चलेगा और प्रदेश के 150 गांवों में मंचन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया मेें खर्च का वहन भी भारतेंदु नाट्य अकादमी ही अन्य स्रोतों से करेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान जन गण मन के बारे में देशवासियों को जितनी जानकारी है, उतनी जानकारी वंदे मातरम के बारे में नहीं है। इस गीत ने किस तरह से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को प्रभावित किया और क्रांतिकारियों को उत्साहित किया, इसकी कहानी कम लोगों को ही पता है। ऐसे में ग्रामीण अंचलों के लोग भी देशप्रेम की इस अनूठी कहानी को जान सकें, इसके लिए यह अनूठा प्रयास किया जा रहा है। यह एक तरह का नवाचार है जिसमें वंदे मातरम की उत्पत्ति, भूमिका और इसमें छिपी राष्ट्रीय भावना को प्रसारित किया जाएगा।
