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Lucknow News: कस्टडी विवाद में बच्चे को सीधे बोर्डिंग स्कूल नहीं भेजा जा सकता
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लखनऊ। सात साल के बच्चे को पास रखने के लिए माता-पिता के बीच चल रहे कस्टडी विवाद में हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अहम फैसला दिया है। अदालत ने कहा कि बच्चे को सीधे बोर्डिंग स्कूल नहीं भेजा जा सकता है। इसके लिए उसका मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी है, जिससे पता लगाया जा सके कि क्या वह माता-पिता से अलगाव सहन कर सकता है?
मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला कस्टडी विवाद में बच्चे के पिता की ओर से दाखिल विशेष अपील और सात वर्षीय बच्चे की ओर से माता की विशेष अपील पर एक साथ सुनवाई करके दिया।
दंपती का विवाह वर्ष 2017 में हुआ था। अगले वर्ष उन्हें यह बच्चा हुआ। आपसी संबंधों में तल्खी से बच्चे के माता-पिता अलग रहने लगे और एक-दूसरे के खिलाफ कानूनी कार्यवाहियां शुरू कर दीं। इस बीच मां बच्चे के साथ धनबाद से लखनऊ आ गई। उसका आरोप है कि लखनऊ आकर पिता बच्चे को घुमाने के बहाने लेकर धनबाद ले गया।
मामले में दो विशेष अपीलें हाईकोर्ट में दाखिल हुई थीं। कोर्ट ने आदेश देकर इन्हें निस्तारित कर दिया। बच्चे को अपने पास रखने के लिए दंपती में कानूनी विवाद चल रहा है। बच्चे को कस्टडी विवाद के चलते बोर्डिंग स्कूल भेजने के मामले पर कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा, फैमिली कोर्ट लखनऊ को तय करने के लिए खुला है, अगर विशेषज्ञों की राय इसके समक्ष पेश की जाएं।
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मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला कस्टडी विवाद में बच्चे के पिता की ओर से दाखिल विशेष अपील और सात वर्षीय बच्चे की ओर से माता की विशेष अपील पर एक साथ सुनवाई करके दिया।
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दंपती का विवाह वर्ष 2017 में हुआ था। अगले वर्ष उन्हें यह बच्चा हुआ। आपसी संबंधों में तल्खी से बच्चे के माता-पिता अलग रहने लगे और एक-दूसरे के खिलाफ कानूनी कार्यवाहियां शुरू कर दीं। इस बीच मां बच्चे के साथ धनबाद से लखनऊ आ गई। उसका आरोप है कि लखनऊ आकर पिता बच्चे को घुमाने के बहाने लेकर धनबाद ले गया।
मामले में दो विशेष अपीलें हाईकोर्ट में दाखिल हुई थीं। कोर्ट ने आदेश देकर इन्हें निस्तारित कर दिया। बच्चे को अपने पास रखने के लिए दंपती में कानूनी विवाद चल रहा है। बच्चे को कस्टडी विवाद के चलते बोर्डिंग स्कूल भेजने के मामले पर कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा, फैमिली कोर्ट लखनऊ को तय करने के लिए खुला है, अगर विशेषज्ञों की राय इसके समक्ष पेश की जाएं।
