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Lucknow News: 27 को ही रामनवमी मनाना श्रेयस्कर

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 25 Mar 2026 02:48 AM IST
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It is preferable to celebrate Ram Navami on the 27th itself
एआई तस्वीर
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लखनऊ। भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल की नवमी पर पुनर्वसु नक्षत्र, कर्क लग्न और मध्याह्न को हुआ था। रामनवमी को लेकर इस बार काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है क्योंकि 26 मार्च को मध्याह्न में नवमी मिल रही है जबकि 27 मार्च को उदया तिथि में नवमी तिथि मिल रही है। ज्यादातर ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, 27 मार्च को ही रामनवमी मनाना श्रेयस्कर होगा।
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ज्योतिषाचार्य पुनीत वार्ष्णेय के अनुसार, इस वर्ष नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11:49 बजे से प्रारंभ होकर 27 मार्च को सुबह 10:07 बजे तक रहेगी। 26 मार्च को मध्याह्न काल के प्रारंभ में अष्टमी तिथि, मिथुन लग्न और समाप्त होने तक नवमी तिथि, कर्क लग्न मिल रहा है। शास्त्रों के अनुसार (निर्णय सिंधु पृष्ठ संख्या 151 व धर्म सिंधु पृष्ठ संख्या 80) अष्टमी युक्त नवमी का निषेध है जिसे विष्णु परायण भक्तों को छोड़ देना चाहिए। मध्याह्न काल को महत्व देने वाले 26 मार्च को पूजन प्रारंभ कर सकते हैं।
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27 मार्च को सर्वार्थ सिद्धि योग 06:03 से 15:24 बजे तक और अमृत योग 06:03 से 10:07 बजे तक है। उदया में नवमी तिथि, शुक्रवार, पुनर्वसु नक्षत्र, अतिगंड योग तथा कौलव करण है। 27 मार्च को सूर्योदय के समय पुनर्वसु नक्षत्र और तीन मुहूर्त से अधिक उदया व्यापिनी नवमी तिथि प्राप्त हो रही है। (मध्याह्न काल में पुनर्वसु नक्षत्र व कर्क लग्न मिल रहा है)।

शास्त्रों के अनुसार, यह संपूर्ण कामनाओं को प्रदान करने वाला और अत्यधिक फलदायक है। इसलिए ऐसी स्थिति में 27 मार्च दिन शुक्रवार को रामनवमी का पर्व मनाया जाना शास्त्रानुसार और अधिक व्यावहारिक है जिसमें कर्क लग्न, पुनर्वसु नक्षत्र, लाभ, अमृत, शुभ की चौघड़िया से युक्त बेला में उद्योग व्यापार का शुभारंभ व पूरे संवत्सर के लिए खाता-बसना पूजन करना भी लाभदायक होगा। चैत्र शुक्ल नवमी में स्वर्ण, रजत, ताम्र या भोजपत्र पर निर्मित भगवान रामजी या राम दरबार का चित्र या प्रतिमा की प्रतिष्ठा करके आवाहन करें। पुरुष सूक्त से षोडशोपचार पूजन करें। ओउम् रामाय नमः या बीज मंत्र ओउम् रां रामाय नमः मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।

वैदिक और काशी पंचांग में भी नवमी 27 को

ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 25 मार्च दिन बुधवार को दोपहर में 1:50 बजे शुरू होगी। समापन 26 मार्च बृहस्पतिवार को सुबह 11:49 बजे होगा। उदयातिथि के आधार पर दुर्गा अष्टमी 26 मार्च को मनाई जाएगी और नवमी तिथि का आरंभ 26 मार्च सुबह 11:49 बजे हो रहा है। नवमी 27 मार्च को सुबह 10:08 बजे समाप्त होकर दशमी तिथि लग जाएगी। चैत्र नवरात्र का नवमी पूजन 27 मार्च को किया जाएगा। काशी पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 25 मार्च बुधवार शाम 04:29 बजे शुरू होगी। समापन 26 मार्च दिन बृहस्पतिवार को दिन में 02:11 बजे होगा और नवमी तिथि का आरंभ 26 मार्च को दिन में 02:11 बजे हो रहा है। नवमी तिथि 27 मार्च को दिन में 12:02 बजे समाप्त हो रही है। ऐसे में चैत्र नवरात्र का नवमी पूजन 27 मार्च को किया जाएगा। इसी दिन रामनवमी का व्रत रखना उचित है।

अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि नवरात्र के अंतिम दो दिनों महाअष्टमी और महानवमी के दिन कन्या पूजन का विधान है। कुछ लोग अष्टमी को कन्या पूजन करते हैं तो कुछ लोग अंतिम दिन नवमी को पूजन करते हैं। 2 वर्ष से 10 वर्ष तक की कन्याओं के पूजन का महत्व है। 9 कन्याओं को 9 देवियों के रूप में पूजा जाता है। एक लांगुरिया (छोटा बालक) की पूजा करने का भी विधान है। माता को हलवा, पूरी और चने का भोग लगाया जाता है। व्रत के समापन पर हवन का खास महत्व है जिससे देवी मां प्रसन्न होती हैं और मनोकामना पूर्ति, स्वास्थ्य लााभ, सुख, शांति, समृद्धि धन, यश के लाभ संग शत्रु का नाश होता है।

एआई तस्वीर

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