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Invest UP: पुच एआई कंपनी की वित्तीय हैसियत 43 लाख, करार 25 हजार करोड़ रुपये निवेश का, उठे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Thu, 26 Mar 2026 07:21 AM IST
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सार
पुच एआई नामक कंपनी के साथ प्रदेश में एआई पार्क स्थापित करने के लिए 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश का एमओयू किया थालेकिन बाद में कंपनी की वास्तविक वित्तीय क्षमता को लेकर गंभीर सवाल सामने आ गए। मामले पर सीएम योगी ने भी बयान दिया है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े पुच एआई कंपनी के एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर संकट गहरा रहा है। इन्वेस्ट यूपी ने कंपनी की वित्तीय क्षमता को लेकर उठे सवालों के बीच इस समझौते को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी की ओर से जरूरी दस्तावेज समय से पेश न करने से मामला और संदिग्ध हो गया है।
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दरअसल, बीते सप्ताह इन्वेस्ट यूपी ने पुच एआई नामक कंपनी के साथ प्रदेश में एआई पार्क स्थापित करने के लिए 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश का एमओयू किया था। प्रस्तावित निवेश की राशि को देखते हुए इस समझौते को तेजी से आगे बढ़ाया गया लेकिन बाद में कंपनी की वास्तविक वित्तीय क्षमता को लेकर गंभीर सवाल सामने आ गए। सोशल मीडिया पर कंपनी की वित्तीय स्थिति की चर्चा तेज होने के बाद खुलासा हुआ कि कंपनी की अधिकृत पूंजी मात्र 42.9 लाख रुपये है। इसके बाद सवाल उठने लगे कि इतनी कम हैसियत वाली कंपनी के साथ इतने बड़े निवेश का समझौता किन आधारों पर किया गया? फिलहाल, इन्वेस्ट यूपी ने कंपनी को अंतिम रूप से जरूरी दस्तावेज और स्पष्टीकरण बृहस्पतिवार तक पेश करने का निर्देश दिया है। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब न मिलने पर एमओयू को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया जाएगा।
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विपक्ष भी हुआ सक्रिय: मामला संज्ञान में आने पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि कंपनी निवेश करने में सक्षम नहीं पाई जाती है तो एमओयू स्वतः निरस्त माना जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में निवेश प्रक्रियाएं पूरी पारदर्शिता से संचालित की जा रही हैं। इसमें अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं, इस मुद्दे पर विपक्ष भी सक्रिय हो गया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा कि एमओयू से पहले ही कंपनी के बारे में जानकारी जुटा ली जाती तो ऐसी स्थिति नहीं आती। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे प्रशासनिक चूक बताया।
जांच प्रक्रिया पर भी सवाल: पूरे घटनाक्रम ने निवेश प्रस्तावों की जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े निवेश प्रस्तावों में पारदर्शिता के साथ कंपनियों की वित्तीय और तकनीकी क्षमता का गहन मूल्यांकन अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचा जा सके।